सीएम उद्धव ठाकरे के लिए अब मुंबई मेरी जान

शिवसेना के मजबूत गढ़ मुंबई का कायाकल्प, सत्ता का विकेंद्रीकरण और जनता के लिए सुलभ होना महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के शासन का मुख्य एजेंडा है

मंदार देवधर
मंदार देवधर

पिछले साल 28 नवंबर को मुख्यमंत्री का पद संभालने के करीब पंद्रह दिन बाद उद्धव ठाकरे ने मंत्रालय में अपने अधिकारियों के साथ एक बैठक में बताया कि वे मुंबई को 'विजुअल प्रदूषण' से छुटकारा दिलाना चाहते हैं. अधिकारियों को इस बात का मतलब समझ में नहीं आया और वे मुख्यमंत्री का मुंह ताकने लगे. तब ठाकरे ने उन्हें खुलकर समझाया कि वे मुंबई के अनियोजित निर्माण, भवनों के खराब रखरखाव और शहर भर में जगह-जगह फैली गंदगी को देखकर बहुत चिंतित हैं और मुंबई को संवारना चाहते हैं.

मुख्यमंत्री बनने के दो महीने बाद ठाकरे अब प्रशासन पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए महाराष्ट्र के लिए जब अपना विजन तैयार करने में लग गए हैं तो कुछ बातें एकदम साफ हैं—उनका ध्यान शिवसेना के मजबूत गढ़ मुंबई का कायाकल्प करने पर है और वे खुद को एक ऐसे प्रशासक के तौर पर पेश करना चाहते हैं जो सभी के लिए आसानी से उपलब्ध है.

राजनीतिक पर्यवेक्षकों को तब बहुत अचंभा हुआ जब ठाकरे गठबंधन के सहयोगियों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस को सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी देने के लिए राजी हो गए. सेना को केवल दो बड़े विभागों—शहरी विकास और कृषि पर सीधा नियंत्रण हासिल है. बाकी के गृह, वित्त, सार्वजनिक निर्माण, राजस्व, बिजली, जल संसाधन, शिक्षा, स्वास्थ्य व आदिवासी विकास आदि विभाग सहयोगियों के पास हैं.

शिवसेना के एक भीतरी व्यक्ति कहते हैं कि ठाकरे की प्राथमिकता मुंबई में पार्टी की पकड़ मजबूत करना है. 2022 में होने वाले बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनावों में वे पार्टी को 227 में से 100 से ज्यादा सीटों पर जिताना चाहते हैं. करीब 25,000 करोड़ रु. के सालाना बजट वाली बीएमसी पूरे एशिया में सबसे ज्यादा पैसे वाला स्थानीय निकाय है. इस व्यक्ति का कहना है, ''दो साल बहुत लंबा समय लगता है लेकिन हम अभी से बीएमसी चुनावों पर ध्यान देना चाहते हैं.''

ठाकरे ने अपने बेटे और पर्यटन मंत्री आदित्य को मुंबई सबअर्बन (उपनगर) जिले का प्रभारी मंत्री बना दिया है. हालांकि वे मुंबई सिटी जिले से विधायक चुने गए हैं 2017 में हुए बीएमसी चुनाव में भाजपा ने मुंबई के उपनगरीय इलाकों में शिवसेना के लिए बड़ी चुनौती खड़ी करते हुए 82 सीटें जीत ली थीं जो सेना के मुकाबले केवल दो सीट कम थीं. प्रभारी मंत्री के पास जिले के सालाना खर्च की योजना बनाने का अधिकार होता है, ऐसे में आशा की जाती है कि आदित्य उन इलाकों में खूब पैसा झोंकेंगे जहां सेना को बीएमसी चुनाव में फायदा मिलने की उम्मीद है. 22 जनवरी को मुंबई सबअर्बन जिले की योजना पर बुलाई गई बैठक की अध्यक्षता करते हुए आदित्य ने 3,000 करोड़ रु. के विकास कार्यों को मंजूरी दे दी.

मुंबई में सरकार के प्रमुख कार्यों में कचरे का पृथक्करण, 65 जगहों पर भारतीय मूल के 4,00,000 पौधों की रोपाई, लंदन आइ की तर्ज पर मुंबई आइ परियोजना को दुबारा शुरू करना और 100 करोड़ रु. का औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान बनाना शामिल है.

सेना के भीतरी व्यक्ति के अनुसार, ठाकरे 'कुछ ठोस' काम करके पार्टी के समर्थकों के एक बड़े वर्ग को संतुष्ट करना चाहते हैं जो कांग्रेस और एनसीपी से हाथ मिलाने और हिंदुत्व के एजेंडे से मुंह मोडऩे को लेकर नाराज है. उनका कहना है, ''ठाकरे ने एक रणनीति के तहत कांग्रेस और एनसीपी को अपनी सरकार में विशेष स्थान दिया है. वे सरकार को स्थायित्व देना चाहते थे ताकि अपना काम निर्बाध रूप से कर सकें.''

कांग्रेस के विधायक अनंत गाडगिल कहते हैं कि कांग्रेस को शिवसेना से सीखना चाहिए और शहरी इलाकों पर ध्यान देना चाहिए जहां जनाधार वह खोती जा रही है.

ठाकरे खुद को जनता के लिए सुलभ मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करने के लिए जनसंपर्क पर भी जोर दे रहे हैं. वे सप्ताह में एक बार मंत्रालय में आम लोगों से मिलकर उनकी शिकायतें सुनते हैं. उन्होंने डोंबिवली के 21 वर्षीय छात्र से मुलाकात की जो मूंगफली बेचता है. मुख्यमंत्री ने उसे पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया. ठाकरे के कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया, ''मुख्यमंत्री ने हमें निर्देश दिया है कि हम स्थानीय समाचार पत्रों में संपादक के नाम छपी हरेक चिट्ठी को पढ़ें और लोगों की राय और शिकायतों के बारे में उन्हें अवगत कराएं.''

ठाकरे ने सत्ता के विकेंद्रीकरण की दिशा में कई सुधारवादी कदम उठाए हैं. 21 दिसंबर को घोषणा के एक महीने के भीतर मुख्यमंत्री के उप-कार्यालयों को छह राजस्व मुख्यालयों में स्थापित कर दिया गया है, जहां अधिकारी जनता की शिकायती अॢजयां स्वीकार करते हैं और उन्हें संबंधित विभागों के पास भेज देते हैं. ठाकरे ने कहा है, ''मैं नहीं चाहता कि लोगों को उन समस्याओं के लिए मुंबई आना पड़े जिनका समाधान स्थानीय रूप से किया जा सकता है.'' राज्य के सभी 36 जिलों में कृषि सहायता केंद्र खोल दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने इसी तर्ज पर सभी जिलों में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ भी बना दिए हैं.

सूत्रों के अनुसार, ठाकरे ने अपने मंत्रियों से कह दिया है कि अगर कोई नीतिगत मामला न हो तो वे रोजमर्रा के उनके कामों में उनके विभागों में कोई दखल नहीं देंगे. नौकरशाहों के साथ अपनी पहली ही बैठक में उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वे किसी भी फाइल पर तभी दस्तखत करेंगे जब मुख्य सचिव ने उसे मंजूरी दे दी हो और कोई भी मंत्री या अधिकारी स्थापित प्रक्रिया की अनदेखी करके सीधे उनके पास न आए.

एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि ठाकरे में बहुत तेजी से सीखने का गुण है. वे कहते हैं, ''हमें उनके बारे में थोड़ा संदेह था क्योंकि वे दुपहर को ही दफ्तर में कदम रखते थे. लेकिन उन्होंने खुद को जल्दी ही ढाल लिया है और प्रशासन के कामकाज में रुचि लेने लगे हैं.'' लेकिन कांग्रेस के एक नेता का मानना है कि ठाकरे के रवैए से नौकरशाही को बहुत ज्यादा ताकत मिल जाएगी और मंत्री रबर की मोहर बनकर रह जाएंगे.

ठाकरे अपने सहयोगी दलों के साथ अब तक संबंध अच्छे बनाए रखने में सफल रहे हैं और अगर कुछ विवाद की चिनगारी भड़कती भी है तो उसे शांत कर देते हैं. शिवसेना के सांसद संजय राउत ने जब बयान दिया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मुंबई में अपराध जगत के सरगना करीम लाला से मिला करती थीं तो ठाकरे ने बेटे आदित्य को कांग्रेस के नेताओं को शांत करने का काम सौंप दिया था.

आदित्य ने संजय राउत से मुलाकात की और उन्हें बताया कि पिता उद्धव ठाकरे चाहते हैं कि वे बयान जारी करके कहें कि दिवंगत प्रधानमंत्री के प्रति उनके मन में सम्मान है. आदित्य ने राउत की तरफ इशारा करते हुए सार्वजनिक रूप से कहा, ''हमें अनावश्यक रूप से हर समय इतिहास का उल्लेख करने की जरूरत नहीं है.''

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