मुंबई में एक बेटे का उदय

आदित्य ठाकरे शिवसेना को एक नई आधुनिक दिशा में ले जाते दिख रहे हैं

दानेश जस्सावाला
दानेश जस्सावाला

मरीन लाइंस से लेकर वर्ली तक मुंबई में मुख्य सड़क का हिस्सा रविवार सुबह सिर्फ साइक्लिंग और जॉगिंग करने वालों के लिए आरक्षित रहता है! यह सुनकर बहुत अच्छा लग रहा है न? खुशी की बात है कि यह सच है.

3 दिसंबर की सुबह खुला मुंबई का पहला साइकिल ट्रैक, इस बात का एक उदाहरण है कि किस प्रकार शिवसेना के संस्थापक स्वर्गीय बाल ठाकरे के पोते आदित्य ठाकरे पार्टी को नया स्वरूप देकर उसे ऐसी आधुनिक राजनीतिक इकाई के रूप में गढऩा चाह रहे हैं, जो युवाओं की आकांक्षाओं से तालमेल बना सके. इस 26 वर्षीय लॉ ग्रेजुएट वंशज ने तब से अब तक काफी लंबा रास्ता तय कर लिया है, जब उनके दादा ने सात साल पहले पार्टी की युवा शाखा युवा सेना का मुखिया बनाकर उन्हें राजनीति में उतारा था. नए युग के नेता आदित्य ने शिवसेना की परंपरागत 'संस्कृति' से दूरी बनाए रखी है.

उन्हें शायद ही कभी परंपरागत दही हांडी समारोह में देखा गया हो, जबकि उनकी पार्टी इसमें काफी उत्साह से शामिल होती है. इसकी जगह कॉस्मोपॉलिटन आकांक्षाओं के अनुरूप ही उन्होंने पार्टी के नियंत्रण वाले बीएमसी (बृहन्मुंबई नगरपालिका) को इस बात के लिए प्रेरित किया कि वह उन इलाकों में छतों पर पार्टी और रात भर चलने वाली खान-पान की दुकानों, रेस्टोरेंट की इजाजत दे, जहां अभी तक इन पर प्रतिबंध था.

भाजपा के नेतृत्व वाली देवेंद्र फडऩवीस सरकार की सोच के विपरीत-जिसने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर 'नाइटलाइ' नियमों में किसी तरह के बदलाव का विरोध किया- आदित्य ने कहा कि शहर में खुलापन लाने से राजस्व बढ़ेगा और मुंबई को ज्यादा 'पर्यटक अनुकूल' बनाया जा सकेगा. (हालांकि पार्टी कार्यकर्ता भ्रम में हैं, क्योंकि उन्हें ये समझ नहीं आ रहा कि ऐसे बदलाव से सांस्कृतिक मूल्यों को बचाए रखने के पार्टी के नजरिए पर किस तरह का असर पड़ेगा).

इन सबके बावजूद, आदित्य ठाकरे आगे बढ़ रहे हैं और समझदारी के साथ शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक कार्य जैसे क्षेत्रों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जहां वह युवाओं से सीधे जुड़ सकते हैं. जब मुंबई विश्वविद्यालय ने छात्रों की आंसरशीट्स के ऑनलाइन मूल्यांकन में गड़बड़ी की, तो वे शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े के पास पहुंच गए. हाल में ही आदित्य ने परिवहन मंत्री दिवाकर रावते पर इस बात के लिए दबाव बनाया कि वे दक्षिण मुंबई में इलेक्ट्रिक बसें शुरू करें और पर्यावरण मंत्री रामदास कदम से मांग की कि वह अप्रैल 2018 से प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाएं. 

इसके अलावा शिवेसना की धमकाने वाली पहले की छवि के विपरीत आदित्य ने मुंबई के रेस्टोरेंट्स से यह अनुरोध किया कि वे प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचें. आदित्य ने सेना के मुख्य वोट बैंक का ध्यान रखते हुए कई लोकप्रिय पहल की हैं: पार्टी के एक नए पोर्टल पर बीएमसी के स्कूलों के मराठी छात्रों के लिए ऑडियो-विजुअल सिलेबस दिया गया है. बेस्ट (बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई ऐंड ट्रांसपोर्ट यूटिलिटी) की बसों में अब यूनिफॉर्म वाले स्टूडेंट्स की यात्रा मुफ्त होती है.

आदित्य को कई झटके भी सहने पड़े-शहर के चिडिय़ाघर में छह पेंगुइन आयात की उनकी मांग पूरी करने के लिए प्रत्येक पर 45 लाख रु. खर्च हुए, आदित्य ज्यादा परिपक्व हो चुके हैं. खबर है कि पिता उद्धव ठाकरे और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की 30 अक्तूबर को हुई मुलाकात की व्यवस्था उन्होंने ही की थी, जिससे इस बात को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं, कि शिवसेना आगे चलकर भाजपा के खिलाफ  बनने वाले किसी साझे मोर्चे में शामिल हो सकती है. चर्चा तो है कि उनका अगला कदम दिल्ली की ओर हो सकता है. सूत्रों का कहना है कि आदित्य 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर-मध्य मुंबई सीट से पार्टी के प्रत्याशी हो सकते हैं.

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