एआइ के दौर में इंसान बने रहने के गुर

यह किताब संभावनाओं की किताब है. नितिन मानते हैं कि नौकरियों पर खतरे के बावजूद 2040 तक दस से बीस करोड़ नए काम पैदा होंगे. स्किल ही नौकरी बचाएगा. बस हमें अपने भीतर के टिके रहने और विकास करने की मूल प्रवृत्ति को फिर से खोजने की जरूरत है

नितिन सेठ की किताब AI युग में मानवीय श्रेष्ठता

एक सेल्फ-ड्राइविंग कैब की पिछली सीट पर बैठे नितिन सेठ के दिमाग में मार्क बेनिऑफ की यह घोषणा गूंजती है कि हम AI की सहायता वाली दुनिया से एक स्वायत्त दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं.

नितिन को तकनीक की सटीकता प्रभावित नहीं करती बल्कि प्रभावित करता है ड्राइवर मित्र की नौकरी चले जाने का भय. यही छोटा-सा, निजी अनुभव किताब एआइ युग में मानवीय श्रेष्ठता का बीज बन जाता है. किताब ह्यूमन एज इन द एआइ  का हिंदी अनुवाद है जिसे किया है अपूर्व कृष्ण ने.

करीब 500 पन्नों में फैली यह किताब तर्क और विश्लेषण दोनों सामने रखती है. नितिन सेठ ने लगभग तीन दशक दुनिया की बड़ी संस्थाओं के बीच काम करते हुए ऑटोमेशन की कई लहरों को आते देखा है और हर बार उनके सामने एक ही सवाल रहा कि जब मशीनें हमारे काम का बड़ा हिस्सा अपने हाथ में लेने लगेंगी, तब हमारे पास क्या बचेगा?

किताब की संरचना की रीढ़ है 'POSSIBLE'फ्रेमवर्क. यह आठ आयामों वाला एक संक्षिप्त रूप हैः Problem solving, Openness to change, Spirituality, Sports, Impact, Balance, Leadership और Entrepreneurship.

नितिन कहते हैं कि यह कोई मौलिक आविष्कार नहीं बल्कि एनाग्राम है. ऐसे आदर्शों को एक साथ समेटने वाला ढांचा, जो AI के आने से बहुत पहले से मौजूद रहा है.

वे सेल्फ हेल्प बुक्स वाली बातों और किसी भविष्यवाणी से बचते हैं और बार-बार वैदिक और बौद्ध शब्दावली की ओर लौटते हुए बुद्धि, अहंकार और मनस् जैसे विचारों का इस्तेमाल यह समझाने के लिए करते हैं कि एआइ अपनी तमाम शक्तियों के बावजूद मानव चेतना की बहुस्तरीय संरचना की नकल नहीं कर सकता.

श्रम बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव की भविष्यवाणी को योग सूत्रों में दिए गए आत्म-बोध के विचार से जोड़ना, बिजनेस की किताब के लिए एक असामान्य रास्ता है. 

किताब के सबसे मजबूत हिस्से वे हैं, जिनमें आंकड़े मौजूद हैं. नितिन आने वाले बदलाव के पैमाने को लेकर किसी तरह की भावुकता या नरमी नहीं बरतते. उनके अपने अनुमान के अनुसार, 2030–35 के बीच मध्यम अवधि में 15–35 प्रतिशत नौकरियों पर खत्म होने का खतरा हो सकता है लेकिन 2035 से 40 तक, जब इंसान और एआइ के एकसाथ काम करने वाले पद अधिक विकसित हो जाएंगे तो यह आंकड़ा 35–50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.

वे यह बताने से भी नहीं बचते कि कौन-से पेशों पर सबसे अधिक खतरा आ सकता है. यह पाठक के लिए असहज जागरूकता भरी स्पष्टवादिता है. कहीं-कहीं किताब दार्शनिक पहलू में चली जाती है. जैसे एआइ की बढ़त आइक्यू में है, जबकि मनुष्य के पास ईक्यू और एसक्यू यानी स्पीरिचुअल कोशेंट की ऐसी बढ़त है, जिस पर उसका एकाधिकार बना रहेगा.

यहां समस्या यह है कि किताब के शुरुआती हिस्से में यह स्वीकार किया गया है कि एआइ अब बातचीत और यहां तक कि भावनात्मक कार्यों में भी इंसानों के बराबर या उनसे बेहतर प्रदर्शन कर रहा है लेकिन बीच-बीच में नितिन की कही बात ही धुंधली लगने लगती है.

संरचना के स्तर पर किताब लेखक की खेलों में रुचि और मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में उनके अनुभव, दोनों से ऊर्जा लेती है. एक ओर भारत की 2024 टी20 जीत और 2018 फीफा वर्ल्ड कप पर अध्याय हैं तो 'टैन की फ्रेमवर्क्स' भी.

स्टीव जॉब्स से लेकर सांसों पर नियंत्रण और विपश्यना तक के उदाहरण पुस्तक का हिस्सा हैं. यह विविधता किताब की खूबी भी है और उसका जोखिम भी. किताब में अलग-अलग स्रोतों और समझाने के लिए चित्रों और ग्राफ्स को उदारता से जगह दी गई है. 

अनुवाद निश्चित रूप से कठिन रहा होगा लेकिन फिर भी POSSIBLE फ्रेमवर्क के हर शब्द का अनुवाद किताब के स्वाद और केंद्रीयता दोनों को फीका कर रहा है. हर बात का उत्तर देना और अनुवाद करना जरूरी नहीं होता. जब हिंदी इतनी उदार है तो अनुवादक को कठोर नहीं होना चाहिए. 

यह किताब संभावनाओं की किताब है. नितिन मानते हैं कि नौकरियों पर खतरे के बावजूद 2040 तक दस से बीस करोड़ नए काम पैदा होंगे. स्किल ही नौकरी बचाएगा. बस हमें अपने भीतर के टिके रहने और विकास करने की मूल प्रवृत्ति को फिर से खोजने की जरूरत है. एक तरह से लेखक एकसाथ दो चीजों को समझने-समझाने की कोशिश करते हैं. एक, जो आंकड़ों से समझा जा सकता है और दूसरा जो आंकड़ों के पार है.

POSSIBLE भविष्य में एक टिकाऊ मॉडल साबित होगा या सिर्फ निमॉनिक, अभी कुछ नहीं कह सकते लेकिन नितिन सेठ का मूल सवाल विचार करने लायक है कि एआइ जब गाड़ी की स्टीयरिंग संभालेगा तो हम किस तरह के यात्री बने रहना चुनेंगे और अगर वह यात्री होगा तो हम किस तरह के चालक होंगे?

AI युग में मानवीय श्रेष्ठता
प्रकाशकः पेंगुइन स्वदेश
कीमतः 599 रुपए

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