हॉकी के लिए उम्मीद की किरण

मिडफील्डर हार्दिक सिंह को आगामी विश्वकप और एशियाई खेलों में भारतीय हॉकी टीम के बहुत अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद.

Leisure: Sports
मिडफील्डर हार्दिक सिंह

अभी हार्दिक सिंह को सीनियर टीम में आए एक दशक भी नहीं हुआ है मगर वे तीन बार हॉकी इंडिया के वर्ष के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार अपने नाम कर चुके हैं. वैसे 27 वर्षीय इस मिडफील्डर के लिए निजी तमगे उतना मायने नहीं रखते. वे टीम के अहम स्तंभ हैं और कई लोग उन्हें भविष्य का कप्तान मानते हैं. वे कहते हैं, ''जब टीम में स्वस्थ और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा होती है तो आप में निजी स्तर पर भी सुधार होता है.’’

हार्दिक के लिए टीम के दो ओलंपिक कांस्य पदक, एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक और एशिया कप का खिताब ज्यादा मायने रखते हैं. मगर वे इनसे संतुष्ट होने वाले नहीं. विश्वकप और एशियाई खेलों के बीच बहुत कम अंतराल और इस व्यस्त कार्यक्रम की वजह से यह साल उनके लिए बेहद अहम है.

उनका कहना है, ''हम अभी आधी मंजिल तक ही पहुंचे हैं. किसी खिलाड़ी का सफर तभी पूरा माना जाता है जब वह विश्व चैंपियन बने और ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते.’’

यह भारत के लिए विश्वकप में पिछले 50 वर्षों से चले आ रहे पदक के सूखे को खत्म करने और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक का टिकट पकका करने का मौका है. उनके शब्दों में, ''इस दौरान थकान और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ेगा.

हर कोई विश्व चैंपियन बनना चाहता है. भारत के लिए हॉकी वही मायने रखती है जो ब्राजील के लिए फुटबॉल. हर कोई जीत का इंतजार कर रहा है.’’ लगातार दो बड़े खिताब जीतना आसान नहीं मगर वे इस चुनौती को सकारात्मक नजरिए से देखते हैं और मानते हैं कि टीम का मूल्यांकन उसी के आधार पर होगा.

भारत के लिए मौजूदा सत्र की शुरुआत कठिन रही. प्रो लीग में टीम आठवें स्थान पर है और घरेलू मैदान पर अर्जेंटीना से मिली करारी शिकस्त ने उसे झकझोर दिया है. टीम की निरंतरता और फॉर्म पर सवाल उठे. हार्दिक कहते हैं, ''यह हमारे लिए आंखें खोल देने वाला अनुभव है. इससे पता चलता है कि किसी भी प्रतिद्वंद्वी को हलके में नहीं लिया जा सकता.

शीर्ष आठ टीमें ऐसी हैं कि यह कहना मुश्किल है, कौन किसे हरा दे. नतीजे हमारे हाथ में नहीं होते, हम सिर्फ इतना कर सकते हैं कि जमकर मेहनत करें और उसी पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करें.’’—हार्दिक सिंह कहते हैं,''किसी खिलाड़ी का सफर तभी पूरा माना जाता है जब वह विश्व चैंपियन  बने और ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते.’’

खेलकूद : महिलाओं की अपनी लीग
रग्बी इंडिया की ओर से महिला लीग की शुरुआत खेलों में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि

अपने महज दूसरे ही साल में रग्बी इंडिया ने वह उपलब्धि हासिल कर ली है, जिसके लिए बीसीसीआइ को एक दशक लग गए और कबड्डी फेडरेशन उसे अब तक हासिल नहीं कर पाया है.

दरअसल, रग्बी इंडिया ने महिला लीग का आगाज कर दिया है. अभिनेता, पूर्व खिलाड़ी और फिलहाल इंडियन रग्बी फुटबॉल यूनियन के अध्यक्ष राहुल बोस कहते हैं, ''मैंने हमेशा इस पल का ख्वाब देखा है जब भारत के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ खेलेंगे.

मगर मैंने इसे कभी लैंगिक खांचे में नहीं देखा.’’ रैंकिंग के मामले में एशिया में भारतीय महिला टीम छठे स्थान पर और पुरुष टीम 12वें स्थान पर है. पुरुष टीम से बेहतर रैंकिंग होने की वजह से यह स्वाभाविक है कि महिला टीम को अधिक सुर्खियां मिलें.

अगर यह राहुल बोस के बस में होता, तो वे महिला संस्करण को शुरुआत से ही शामिल करते क्योंकि रग्बी इंडिया के कामकाज में लैंगिक समानता केंद्रीय विचार है. यह संगठन अपने महिला और पुरुष खिलाड़ियों को एक समान वेतन देता है और उन्हें एक समान इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं उपलब्ध कराता है.

इस पहल के प्रभाव को लेकर राहुल बोस बेहद आश्वस्त हैं. वे कहते हैं, ''मुझे विश्वास है कि भारत के आदिवासी क्षेत्र से आने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी जिस पल दुनिया के किसी शीर्ष रग्बी खेलने वाले देश की खिलाड़ी को टैकल करेगी तो वह बदलाव का एक अहम क्षण होगा.’’
चारों महिला टीम की खिलाड़ी से कई प्रेरक कहानियां जुड़ी हुई हैं.

मसलन, पश्चिम बंगाल के सरस्वतीपुर की रीमा उरांव के माता-पिता चाय बागान के मजदूर हैं, जबकि वैष्णवी के पिता ऑटो रिक्शा चालक हैं. वैष्णवी के पिता पहले उनके खेलने के खिलाफ थे, मगर अब उनके सबसे बड़े हिमायती बन चुके हैं.

राहुल बोस का कहना है, ''रग्बी के मैदान पर उतरने वाली लड़कियां, खेल के मैदान के बाहर भी कुछ साबित करने के लिए संघर्ष कर रही होती हैं.’’ यह महिला लीग आगामी एशियाई खेलों की खातिर राष्ट्रीय टीम के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण मंच भी साबित होगी.

इस सीजन में शिखा यादव (दिल्ली रेड्ज) सबसे ज्यादा भुगतान हासिल करने वाली खिलाड़ी रही हैं

संगीत: जड़ों की ओर वापसी

अभिनेता, पूर्व खिलाड़ी और इंडियन रग्बी फुटबॉल यूनियन के अध्यक्ष राहुल बोस कहते हैं,''मैंने हमेशा इस पल का ख्वाब देखा है जब भारत के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ खेलेंगे.’’

एन्जॉय एंजामी के पांच साल बाद ऑस्ट्रेलियाई-तमिल गायिका धी ने एक नए तमिल गीत के साथ अपनी जड़ों से फिर नाता जोड़ा. इसके साथ ही उनका एक अंग्रेजी एल्बम भी आने वाला
दरअसल, पांच साल पहले ऑस्ट्रेलियाई-तमिल गायिका और गीतकार धी ने रैपर अरिवु के साथ तमिल गीत एन्जॉय एंजामी  जारी किया था.

उस गीत को अब तक एक अरब से ज्यादा बार सुना जा चुका है. तमिल प्लेबैक इंडस्ट्री में सक्रिय रहने के बावजूद, 'वरी वरी’ के साथ वे पांच साल बाद स्वतंत्र तमिल संगीत में लौट रही हैं.
वे कहती हैं, ''एन्जॉय एंजामी मेरे आगामी अंग्रेजी एल्बम के लिए एक सेतु की तरह था. मुझे महसूस हुआ कि मैंने लंबे वक्त से तमिल में कोई गीत जारी नहीं किया है और मुझे इसकी कमी महसूस हो रही थी.’’

अपनी जड़ों की ओर लौटने की यही चाह 'वरी वरी’ के रूप में सामने आई. वे बताती हैं, ''मैं कुछ निजी परिस्थितियों से गुजर रही थी और यह गीत अपनी यात्रा पर आगे बढऩे, खुद को और अपने भीतर के बच्चे को खोजने का एक बयान बन गया.’’ अपने आगामी अंग्रेजी एल्बम जैकफ्रूट  के बारे में उनका कहना है, ''इसमें कई चीजें हैं. तमिल लोकधुनों का भरपूर इस्तेमाल है तो काफी स्टोरीटेलिंग भी है.’’ 

Read more!