वर्क फ्रॉम होम के दो पहलू

डब्ल्यूएचएफ के अपने नफे-नुक्सान हैं. हालांकि इससे मुझे अपने काम के समय को बचाने में मदद मिली है लेकिन मेरे काम में वर्चुअल मीटिंग के बजाए आमने-सामने की बैठकें अधिक प्रभावी साबित होती हैं.

सब काम पर के.एल. नरसिंहन (बाएं) और परिजन दिल्ली के अपने घर में काम और पढ़ाई करते हुए
सब काम पर के.एल. नरसिंहन (बाएं) और परिजन दिल्ली के अपने घर में काम और पढ़ाई करते हुए

केएल नरसिंहन और उनके परिवार को नई दिल्ली के कालकाजी के उनके तीन बेडरूम वाले घर से बाहर कदम रखे लगभग 10 महीने हो चुके हैं. जब लॉकडाउन की घोषणा की गई तो वे, उनकी स्कूल शिक्षिका पत्नी और दो बच्चों को तेजी से खुद को घर से काम करने और पढ़ाई करने के अनुकूल बनाना पड़ा.

शुरुआती दिन चुनौतीपूर्ण थे. बहुत-सी चुनौतियां थीं जिसने निबटना था. परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए कामकाज की एक जगह बनानी थी. बारहवीं में पढऩे वाले उनके बेटे और कॉलेज जाने वाली बेटी को ऑनलाइन क्लासेज के लिए खुद को तैयार करना था. उनकी पत्नी शुरू में अपनी क्लास लेने के लिए आइपैड का उपयोग कर रही थीं, लेकिन आखिरकार उन्हें एक लैपटॉप लेना पड़ा और आइपैड उनके बेटे के पास चला गया. नरसिंहन कहते हैं, ''हमें सबसे पहले अपने उपकरणों की व्यवस्था करनी थी. हम सभी घर से काम कर रहे थे इसलिए हमें अपने बैंडविड्थ को अपग्रेड करना था और घर के भीतर अपने-अपने काम करने की जगहें निर्धारित करनी थीं.''

परिवार सुबह 8.30 बजे अपने दिन का काम/कक्षाएं शुरू करता है, दोपहर के भोजन के समय के आसपास एक ब्रेक लेता है और फिर उसे वापस स्क्रीन के सामने आना होता है. नरसिंहन के लिए घर से काम करने से समय की कुछ बचत हुई है क्योंकि उन्हें काम के लिए अब हर दिन गुडग़ांव की यात्रा करने की आवश्यकता नहीं है. इस तरह ज्यादा नहीं तो कम से कम दिन में दो घंटे तो आराम से बच जाते हैं. लेकिन इसका एक अन्य पक्ष भी है. विनियामक मामलों के विभाग में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में उनको काम के सिलसिले में सरकारी अधिकारियों से मिलना होता है, जो एक चुनौती बन गया है. वे कहते हैं, ''हमें घर से काम करते हुए सरकारी अधिकारियों तक पहुंचने के रास्ते तलाशने होंगे.''

हालांकि, नरसिंहन का कहना है कि लॉकडाउन के शुरुआती कुछ महीनों में कई तरह की दिक्कतों और चुनौतियों के बाद चीजें धीरे-धीरे व्यवस्थित होने लग गई हैं. उनके शब्दों में, ''महामारी के दौरान कार्य संस्कृति को लेकर जनरल इलेक्ट्रिक बहुत ही लचीली रही है. जब तक हमारे प्रोजेक्ट पूरे नहीं होते तब तक हमें हर हाल में काम करना होता है लेकिन हमें हर मिनट का हिसाब नहीं देना पड़ता.''

क्या वे काम करने के इस नए तरीके को जारी रखना चाहते हैं? इसके जवाब में नरसिंहन कहते हैं, ''डब्ल्यूएचएफ के अपने नफे-नुक्सान हैं. हालांकि इससे मुझे अपने काम के समय को बचाने में मदद मिली है लेकिन मेरे काम में वर्चुअल मीटिंग के बजाए आमने-सामने की बैठकें अधिक प्रभावी साबित होती हैं.''

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