नए अंदाज में काम-काज

महामारी की चुनौती को देखते हुए संस्थानों को अपनी कार्यशैली को लेकर पुनर्विचार करना पड़ा और रणनीतियों में बदलाव करते हुए काम-काज की एक नई परिपाटी शुरू करनी पड़ी

काम पर कंपनी के नया प्रोटोकॉल लागू करने के बाद घर से काम करते सॉफ्टवेयर इंजीनियर भवानी सिंह
काम पर कंपनी के नया प्रोटोकॉल लागू करने के बाद घर से काम करते सॉफ्टवेयर इंजीनियर भवानी सिंह

जब लॉकडाउन की घोषणा हुई तो जयंती (अनुरोध पर नाम बदल दिया गया है) समझ नहीं पा रही थीं कि अगले कुछ महीने कैसे बीतने वाले हैं. पति विदेश में फंसे हुए थे, और एक छोटे बच्चे की मां को अपने बच्चे को संभालने, घर के काम निबटाने और इन सबके साथ घर से दफ्तर का काम (डब्ल्यूएफएच) करने की एक ऐसी चुनौती थी कि वे खुद को इन सबके बीच बुरी तरह घिरा हुआ पाती थीं. काम में उनके प्रदर्शन पर असर होना लाजमी था. अंतत: जयंती को पार्टटाइम काम पर स्थानांतरित होना पड़ा. आज जब दुनिया कोविड महामारी से जूझ रही है, जयंती जैसे कई लोग इस कठिन परिस्थिति से जूझने में पूरे जी-जान से प्रयास कर रहे हैं.

जयंती अकेली नहीं हैं. कोविड व्यवधान ने बहुत से लोगों, विशेषकर महिलाओं के करियर को बदल दिया है. महिलाओं के लिए एक करियर प्लेटफॉर्म जॉब्सफॉरहर, की सीईओ और संस्थापक नेहा बगड़िया इसका एक सकारात्मक पक्ष देखती हैं. वे महसूस करती हैं कि महामारी ने कंपनियों को फिर से इस बात का मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित किया है कि महिलाएं आखिर किन परिस्थितियों में काम करती हैं. कंपनियों के नजरिए में बदलाव भी आए हैं. वे कहती हैं, ''कंपनियां काम के लचीले विकल्प चुन रही हैं. हम कॉर्पोरेट्स को लचीले कामकाजी विकल्पों की आवश्यकता समझाने की कोशिश करते आ रहे हैं, और इस महामारी ने उस दिशा में हमारी मदद ही कर दी है.'' हालांकि, एक चेतावनी भी बनी हुई है. महिलाओं के लिए डब्ल्यूएफएच यानी वर्क फ्रॉम होम तभी कारगर हो सकता है जब उन्हें घर में पर्याप्त सहायता और समर्थन प्राप्त हो.

और सिर्फ महिलाएं ही क्यों, घर से काम करना ज्यादातर लोगों के लिए बहुत सुखद नहीं था. कई लोग शोर-शराबे वाले कमरों में और खराब इंटरनेट के साथ बिना उपयुक्त डब्ल्यूएफएच उपकरणों के काम करने के लिए मजबूर थे वह भी घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों को निभाते हुए. कंपनियों के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी, संगठनात्मक विकास, डेटा एनालिसिस और व्यवहार तंत्रिका विज्ञान से संबंधित समाधान प्रदान करने वाली फर्म eXlygenze SenseWorks की मुख्य परामर्श अधिकारी शाची इरडे बैठकों में ''प्रेशर कुकर मोमेंट्स'' का जिक्र करती हैं. वे कहती हैं, ''लगभग सभी घरों में पृष्ठभूमि में एक प्रेशर कुकर की सीटी बज रही होगी—भारतीय घरों में यही माहौल होता है.'' इरडे उन शुरुआती चुनौतियों के बारे में भी बात करती हैं जिनसे कंपनियों और कर्मचारियों दोनों को निबटना था. वे कहती हैं, ''कंपनियों को संदेह था कि कर्मचारी अगर घर से काम करेंगे तो यह कितना उत्पादक होगा. संगठन चरम सीमा में चले गए. ऐसे भी उदाहरण मिले हैं जब एचआर के बंदे कर्मचारियों के लॉग-इन और लॉग-आउट घंटों में कॉल किया करते थे. कर्मचारी या तो अपनी नौकरी खोने की चिंता के कारण या फिर अभिभूत महसूस करते हुए 24&7 उपलब्ध होना चाहते थे.''

लगभग 70 कंपनियों के साथ परामर्श करने वाली इरडे ने महसूस किया कि पिछले नौ महीनों में बहुत कुछ बदल गया है और कई कंपनियों ने काम करने की अलग-अलग शैलियां अपनाई हैं जिनमें अधिक लचीलेपन और कुशल निगरानी की आवश्यकता होती है. वे कहती हैं, ''अब विश्वास का एक बड़ा अर्थ है. कंपनियां यह जानना चाहती हैं कि प्रदर्शन को कैसे मापना है, कैसे कौशल को बढ़ाना है और नई क्षमता की रूपरेखा किस प्रकार तैयार करनी है. कंपनियां वर्चुअल टी सेशन्स और हैप्पी आवर्स का आयोजन कर रही हैं और कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे किसी भी तरह की मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों के बारे में बताएं, जिनका वे सामना कर रहे हैं.''


आइबीएम के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी सुब्रम नटराजन फर्मों के क्लाउड, एआइ और अन्य प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने के बारे में बात करते हैं. आमतौर पर यह प्रक्रिया बहुत अधिक समय लेती थी. डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने और ग्राहकों की बदलती मांगों को पूरा करने से लेकर कर्मचारियों को प्रेरित करने और डब्ल्यूएफएच चुनौतियों से निबटने के उपायों तक, 2020 ने व्यवसायों और व्यक्तियों को नए तरीके से खुद को सुसज्जित करने के लिए मजबूर किया. कई फॉर्च्यून 500 कंपनियों को भोजन प्रदान करने वाली फूड टेक कंपनी, फीडिंगबिलियंस के संस्थापक और सीईओ सार्थक गहलोत ने लॉकडाउन की घोषणा के बाद लगभग 50 दिनों तक अपने कर्मचारियों को नोएडा में अपने परिसर में रखा था. एक कॉर्पोरेट कैटरर के रूप में उन्हें अपने ग्राहकों की सुरक्षा चिंताओं को रातोरात दूर करना पड़ा. ग्राहक उनकी रसोई का अब नियमित रूप से निरीक्षण करते हैं और उनके कर्मचारी शिफ्ट में काम कर रहे हैं.

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की तुलना में सेवा-संचालित क्षेत्र के लिए नए प्रोटोकॉल की जरूरतों के अनुसार खुद को ढालना आसान भी था और त्वरित भी. मसलन, एफएमसीजी दिग्गज पार्ले एग्रो ने भविष्य में मांग का अनुमान लगाने को एआइ समाधान का इस्तेमाल किया. एक आवश्यक सेवा ब्रांड मदर डेयरी, जिसकी आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं था, उन कंपनियों में थी जिन्होंने अपने कर्मचारियों के लिए बैक-एंड पर बुनियादी मदद सुनिश्चित करते हुए एक डब्ल्यूएचएफ प्रोटोकॉल तैयार किया. आइबीएम को बिना किसी साइट विजिट के प्रक्रिया सुनिश्चित करनी थी. भारतीय रोबोटिक्स फर्म मिलग्रो ने इस अवधि के दौरान अपूर्व वृद्धि देखी. मिलग्रो के संस्थापक और अध्यक्ष राजीव करवाल के अनुसार, ''कंपनी ने पिछले वर्ष की तुलना में इस साल अक्तूबर में 2,000 प्रतिशत और नवंबर में 500 प्रतिशत की तरक्की की.'' ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए रोबोट जैसे उत्पाद टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी पहुंचे. जब सुविधा प्रबंधन कंपनियों और होटलों की मांग में गिरावट आई, तो आवासीय मांग ने गति पकड़ ली.

कोविड के कारण, जिसे कभी कामकाज की बाधित व्यवस्था माना जाता था, अब वह ''नई सामान्य बात'' हो गई है. इरडे कहती हैं, ''नियोक्ता ई-सक्षम सिस्टम को अपनाने पर काम कर रहे हैं जो कार्य और व्यवहार को नैनो टास्क में तोड़ देते हैं. क्या एक कर्मचारी को अधिक कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता है? क्या भूमिका को विकसित करने की आवश्यकता है? ये सिर्फ कुछ सवाल हैं जो नियोक्ता पूछ रहे हैं.'' वास्तव में कई पूरी तरह से एक जगह की आवश्यकता पर पुनर्विचार कर रहे हैं. इन सारे बदलावों के बीच एक बात तो तय है—अस्तित्व बचाए रखने के लिए परंपरागत कार्यक्षेत्रों को नए तरीके से विकसित होने की आवश्यकता है.

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