सुर्खियों के सरताजः मुश्किल मोर्चे पर लड़ती योद्धा
उनके साथ काम कर चुके नौकरशाह उन्हें ऐसा मेहनती और जिज्ञासु मंत्री बताते हैं जो सबकी सुनती हैं, सबकी सलाह को गंभीरता से लेती हैं पर अपनी असहमतियां भी जताती हैं. उनके कुछ सहयोगियों ने उन्हें कमतर आंकना जारी रखा है फिर भी पार्टी के शीर्ष नेताओं का भरोसा उन पर कायम है.

निर्मला सीतारमण, 60 वर्ष
केंद्रीय वित्त मंत्री
मई के अंत में जब निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला तो उन्हें आलोचक चारों ओर दिख जाते थे पर सहानुभूति दिखाने वाला कोई नहीं था. उन्हें कद्दावर पूर्व वित्त मंत्री दिवंगत अरुण जेटली की जगह लेनी थी और यह तथ्य उनकी चुनौतियां बढ़ाने वाला था.
भारत की पहली महिला वित्त मंत्री सीतारमण के पास केंद्रीय बजट पेश करने के लिए एक महीने का समय था. वह ऐसा समय था जब अर्थव्यवस्था के करीब सभी सूचकांक—निवेश, विनिर्माण, रोजगार या ग्रामीण अर्थव्यवस्था—धीमा प्रदर्शन कर रहे थे. पारंपरिक लाल ब्रीफकेस की बजाए लाल बही-खाते में लिपटे उनके बजट ने अर्थव्यवस्था को बहुत कम उम्मीदें दीं; विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर अधिभार और विदेशी मुद्रा में सॉवेरिन बॉन्ड जारी करने जैसे उपायों के साथ बजट ने बाजार और अर्थशास्त्रियों दोनों को समान रूप से डरा दिया.
आर्थिक मोर्चे पर बुरी खबरें लगातार मिलती रहीं पर सरकार उन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं थी. इससे आलोचक सरकार के खिलाफ और मुखर हो गए. बाद में सीतारमण ने नुक्सान की भरपाई की कोशिश शुरू की. एफपीआइ पर अधिभार का प्रस्ताव वापस लेने के साथ-साथ परेशानी से घिरे क्षेत्रों, विशेष रूप से नौकरी पैदा करने वाली रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों के लिए अलग से उपायों की घोषणा की गई. नवंबर में, अटकी हुई आवासीय परियोजनाओं को धन प्रदान करने के लिए उन्होंने 25,000 करोड़ रुपये की विशेष खिड़की की घोषणा की.
वैसे उनकी चुनौती खत्म नहीं हुई है. प्याज संकट को लेकर उनकी प्रतिक्रिया, ''मैं एक ऐसे परिवार से आती हूं, जो प्याज और लहसुन नहीं खाता'' के लिए उनकी बहुत खिल्ली उड़ी. उनके पास अपने पूर्ववर्ती जेटली, चिदंबरम और प्रणव मुखर्जी जैसा सियासी कद नहीं है. पर उनके पास दो जटिल मंत्रालयों—रक्षा और वाणिज्य को संभालने का अनुभव है. उनके साथ काम कर चुके नौकरशाह उन्हें ऐसा मेहनती और जिज्ञासु मंत्री बताते हैं जो सबकी सुनती हैं, सबकी सलाह को गंभीरता से लेती हैं पर अपनी असहमतियां भी जताती हैं. उनके कुछ सहयोगियों ने उन्हें कमतर आंकना जारी रखा है फिर भी पार्टी के शीर्ष नेताओं का भरोसा उन पर कायम है. फिलहाल स्थितियां भले उनके अनुकूल नहीं हैं, पर सीतारमण आसानी से हार नहीं मानने वालीं. ठ्ठ
सुर्खियों की वजह
इस साल मई में देश की पहली महिला वित्त मंत्री बनीं
ऐसे समय में अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी उन्हें मिली है जब तकरीबन सारे संकेतक बहुत धीमे विकास का संकेत दे रहे हैं
प्याज के संकट पर उनके जवाब-''मैं प्याज नहीं खाती'' की काफी आलोचना हुई.
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