गर्भनिरोधक इमरजेंसी पिल के इस्तेमाल पर सरकार क्यों दे रही नई चेतावनी?
असुरक्षित यौन संबंध के बाद इमरजेंसी पिल लेना ज्यादा असरदार तो होता है लेकिन इसे रोजाना गर्भनिरोधक का तरीका नहीं समझना चाहिए

इमरजेंसी गर्भनिरोधक पिल रोजाना नहीं खाई जा सकती (सांकेतिक तस्वीर)
भारत में इमरजेंसी गर्भनिरोधक पिल के पैकेट पर जल्द ही इसके सही इस्तेमाल को लेकर साफ जानकारी दी जा सकती है. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि आम तौर पर 0.75 mg और 1.5 mg की खुराक में मिलने वाली लेवोनोर्गेस्ट्रेल वाली इमरजेंसी गर्भनिरोधक पिल के पैकेट पर एक बॉक्स बनाकर चेतावनी दी जाए.
प्रस्ताव के मुताबिक चेतावनी में बताया जाए कि यह गोली सिर्फ इमरजेंसी में इस्तेमाल के लिए हैं, इन्हें रोजाना गर्भनिरोधक के तौर पर नहीं लेना चाहिए, इनसे गर्भपात नहीं होता और ये एचआईवी या दूसरे यौन संक्रमण से बचाव नहीं करतीं. यह प्रस्ताव अभी ड्राफ्ट के रूप में है.
चुनौती यह है कि इन साफ चेतावनियों से पिल के गलत इस्तेमाल को रोका जाए और महिलाओं में इसे लेकर डर भी न पैदा हो. विशेषज्ञों का मानना है कि असुरक्षित यौन संबंध होने या गर्भनिरोधक तरीका फेल होने पर यह पिल गर्भधारण रोकने में मदद कर सकती है.
कैसे काम करती है पिल
लेवोनोर्गेस्ट्रेल कुछ समय के लिए ओव्यूलेशन होने से रोकता है. इस वजह से गर्भ ठहरने से पहले एग बाहर नहीं निकलता लेकिन अगर गर्भ ठहर चुका है तो यह पिल उसे खत्म नहीं कर सकती. इसलिए इसे गर्भपात की पिल नहीं माना जाता.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, इमरजेंसी गर्भनिरोधक तरीका 5 दिनों के भीतर इस्तेमाल करने पर 95 प्रतिशत से ज्यादा गर्भधारण को रोक सकता है. हालांकि, इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सा तरीका अपनाया गया और उसे कितनी जल्दी इस्तेमाल किया गया. स्टडी में पाया गया कि लेवोनोर्गेस्ट्रेल वाली इमरजेंसी पिल लेने के बाद करीब 1.2 से 2.1 प्रतिशत महिलाओं में गर्भधारण हुआ.
जितनी जल्दी लें, उतना बेहतर
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस पिल को लेने में देर नहीं करनी चाहिए. WHO की सलाह है कि असुरक्षित यौन संबंध के बाद लेवोनोर्गेस्ट्रेल वाली इमरजेंसी गर्भनिरोधक पिल जितनी जल्दी ली जाए, उतना बेहतर है. इसे 120 घंटे के भीतर लिया जा सकता है लेकिन देर होने पर इसका असर कम होता जाता है.
बिना गर्भनिरोधक के यौन संबंध होने, कंडोम फटने या खिसकने, गर्भनिरोधक पिल लेना भूल जाने या यौन हिंसा के दौरान गर्भनिरोधक का इस्तेमाल न होने की स्थिति में भी यह पिल ली जा सकती है.
बार-बार इस्तेमाल करने पर क्या होगा?
इस मामले में सही बात समझना जरूरी है. इमरजेंसी गर्भनिरोधक पिल रोजाना गर्भधारण रोकने के लिए इस्तेमाल नहीं की जानी चाहिए. हालांकि, इन्हें बार-बार लेने का मतलब यह नहीं है कि ये खतरनाक हैं.
2025 की एक रिसर्च में 6 अलग-अलग स्टडी के नतीजों को देखा गया ताकि यह पता चल सके कि पीरियड्स के दौरान इमरजेंसी गर्भनिरोधक पिल बार-बार लेने से महिलाओं पर क्या असर होता है. इस बारे में अभी बहुत कम जानकारी उपलब्ध है और मौजूदा सबूतों पर ज्यादा भरोसा नहीं किया जा सकता.
हालांकि विशेषज्ञों को ऐसा कोई साफ सबूत नहीं मिला कि बार-बार पिल लेने से गंभीर साइड इफेक्ट बढ़ते हैं. उनका कहना था कि अगर उसी महीने फिर से असुरक्षित यौन संबंध हो जाए तो महिलाओं को दोबारा इमरजेंसी गर्भनिरोधक लेने से नहीं रोकना चाहिए.
हालांकि, पिल लेने के बाद पीरियड्स में बदलाव के बारे में ज्यादा जानकारी मौजूद है. 544 महिलाओं पर हुई एक स्टडी में, जिन्हें लेवोनोर्गेस्ट्रेल की 1.5 mg की एक खुराक दी गई थी, करीब 21 प्रतिशत महिलाओं के अगले पीरियड्स में एक हफ्ते से ज्यादा की देरी हुई. कुछ महिलाओं को हल्की ब्लीडिंग, पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग, उल्टी जैसा महसूस होना, चक्कर आना, सिरदर्द, ब्रेस्ट में दर्द या भारीपन और पेट में दर्द की शिकायत भी हुई.
WHO के मुताबिक, इस पिल को बार-बार लेने से स्वास्थ्य को कोई खास नुकसान नहीं होता और इससे भविष्य में गर्भधारण करने की क्षमता पर भी असर नहीं पड़ता. हालांकि इसे ज्यादा बार लेने पर साइड इफेक्ट बढ़ सकते हैं, खासकर पीरियड्स में बदलाव होने की संभावना रहती है.
भारत में भी कई महिलाएं इमरजेंसी गर्भनिरोधक पिल दोबारा लेती हैं. भारत में हुई 33 रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, पहले इसका इस्तेमाल कर चुकी महिलाओं में दोबारा पिल लेने की संख्या 12 प्रतिशत से 69 प्रतिशत तक रही. विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में इस पिल को लेकर डर पैदा करने के बजाय यह देखना जरूरी है कि कहीं वे इसे बार-बार लेकर रोजाना गर्भनिरोधक की तरह तो इस्तेमाल नहीं कर रही हैं.
अगर किसी महिला को बार-बार इमरजेंसी पिल की जरूरत पड़ रही है तो उसे गर्भधारण से बचने के लिए कोई नियमित गर्भनिरोधक तरीका अपनाने पर विचार करना चाहिए.
क्या ध्यान रखना जरूरी
एक बार इमरजेंसी गर्भनिरोधक पिल लेने से उसके बाद होने वाले यौन संबंध से गर्भधारण का खतरा खत्म नहीं होता. विशेषज्ञों का कहना है कि इसके बाद नियमित गर्भनिरोधक तरीका अपनाना चाहिए और जरूरत होने पर कंडोम का इस्तेमाल भी करना चाहिए.
ये इमरजेंसी गर्भनिरोधक पिल एचआईवी और दूसरे यौन संक्रमण से भी बचाव नहीं करतीं. अगर पीरियड्स आने में काफी देर हो जाए, पीरियड्स सामान्य से अलग हो या गर्भधारण के लक्षण दिखाई दें, तो विशेषज्ञ प्रेग्नेंसी टेस्ट कराने और डॉक्टर से सलाह लेने की सलाह देते हैं.
इसलिए नई चेतावनियों का मतलब यह नहीं है कि महिलाओं को यह पिल नहीं लेनी चाहिए. सीधी बात यह है कि जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी पिल लें, इसे जल्द लें और इसे रोजाना गर्भनिरोधक की तरह इस्तेमाल न करें.