रात 11 बजे के बाद खाना कैसे बिगाड़ सकता है आपकी सेहत?

रात में देर से खाने की बढ़ती आदत सिर्फ नींद ही नहीं, पाचन और शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकती है

कई रिसर्च भी देर रात खाने के सेहत पर बुरे असर की पुष्टि करती हैं (सांकेतिक तस्वीर)

भारतीय अब पहले के मुकाबले रात में काफी देर से खाना खा रहे हैं. फूड डिलीवरी के आंकड़ों से पता चलता है कि देर रात खाना अब कभी-कभार की आदत नहीं रह गया है बल्कि खाने का एक अलग पैटर्न बनता जा रहा है.

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी और कंसल्टिंग फर्म किअर्नी की ‘हाऊ इंडिया ईट्स’ रिपोर्ट के लिए पिछले एक साल में जुटाए गए डेटा के मुताबिक, देर रात के खाने के ऑर्डर डिनर के ऑर्डर की तुलना में करीब तीन गुना तेजी से बढ़ रहे हैं. 

रात 11 बजे के बाद सबसे तेजी से बढ़ने वाले खाने में पीत्ज़ा, केक और सॉफ्ट ड्रिंक शामिल हैं. इससे पता चलता है कि लोग ऐसे समय में अपेक्षाकृत भारी, हाई-फैट और हाई-शुगर खाना पसंद कर रहे हैं जब शरीर सोने की तैयारी कर रहा होता है.

यह ट्रेंड इतना बढ़ गया है कि स्विगी ने जुलाई 2026 में ज्यादा देर तक काम करने वाले लोगों के लिए अलग से ‘लेट नाइट ईट्स’ प्रोग्राम शुरू किया. यह 30 शहरों में 4,000 से ज्यादा ऑफिस लोकेशन और 30,000 रेस्टोरेंट में रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक चलता है. 

स्विगी का कहना है कि इन ऑफिस लोकेशन पर खाना पहुंचाने वाले एक-तिहाई से ज्यादा रेस्टोरेंट अब रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच भी ऑर्डर स्वीकार करते हैं.

इसका असर अपच जैसी आम समस्या से शुरू हो सकता है लेकिन इसके कुछ छिपे हुए खतरे ज्यादा गंभीर हो सकते हैं. नोएडा के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. सुदीप बाथिया का कहना है कि कई मरीजों में देर रात ज्यादा खाना और नींद खराब होने के बीच संबंध दिखाई देता है. 

देर रात को जंक फूड खाना सेहत के लिए और भी बुरा है (सांकेतिक फोटो)

डॉ. सुदीप बताते हैं, "मेरे पास ऐसे बहुत से मरीज आते हैं जिन्हें रात में ज्यादा खाने की वजह से नींद की समस्या होती है. इसके बाद उन्हें पाचन से जुड़ी दिक्कतें होने लगती हैं और वे ठीक से सो नहीं पाते."

पाचन से जुड़ी समस्याओं और नींद के बीच संबंध की पुष्टि मेडिकल रिसर्च भी करती हैं. 2026 में प्रकाशित 18 अध्ययनों की एक सिस्टेमैटिक रिव्यू (कई अध्ययनों की एक साथ समीक्षा) और मेटा-एनालिसिस (अलग-अलग अध्ययनों के आंकड़ों का संयुक्त विश्लेषण) में 1.10 लाख से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया था. 

इसमें गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (पेट का एसिड ऊपर भोजन नली में आना) और स्लीप डिसऑर्डर्स (नींद से जुड़ी समस्याएं) के बीच महत्वपूर्ण संबंध पाया गया. खासकर जिन लोगों को एसिडिटी (पेट में जलन) या रिफ्लक्स (पेट का एसिड ऊपर आना) की समस्या रहती है, उनके लिए सोने से ठीक पहले खाना परेशानी बढ़ा सकता है.

देर से खाना मेटाबॉलिज्म पर भी असर डाल सकता है. ‘द जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म’ में प्रकाशित एक स्टडी में स्वस्थ लोगों में शाम 6 बजे और रात 10 बजे एक ही खाना खाने के असर की तुलना की गई. 

देर से डिनर करने पर रात में ग्लूकोज का स्तर ज्यादा रहा और खाने से मिली फैट के इस्तेमाल की प्रक्रिया कम हुई. शोधकर्ताओं ने कहा कि लगातार देर रात खाना समय के साथ मेटाबॉलिज्म पर खराब असर डाल सकता है.

ओलिसिटी जर्नल में प्रकाशित एक अन्य स्टडी में खाने का समय चार घंटे आगे किया गया. इसमें पाया गया कि देर से खाना शरीर के पोषक तत्वों को प्रोसेस करने के तरीके को बदल सकता है. शाम के खाने के बाद शरीर में कॉर्बोहाइड्रेट ऑक्सीडेशन ज्यादा और फैट ऑक्सीडेशन कम हुआ.

जिन लोगों के काम या लाइफ स्टाइल की वजह से देर से डिनर करना मजबूरी है उनके लिए डॉ. सुदीप का सुझाव है कि खाना पूरी तरह छोड़ने के बजाय उसके प्रकार में बदलाव किया जाए. वे कहते हैं, "अगर आपको देर से खाना ही है तो कुछ हल्का खाएं. सूप या ऐसा कोई हल्का और आसानी से पचने वाला खाना रात में ज्यादा या भारी खाना खाने से बेहतर है."

लेकिन रात 11 बजे के बाद सबसे तेजी से बढ़ने वाले खाने में पिज्जा, केक और सॉफ्ट ड्रिंक शामिल हैं. इसलिए चिंता सिर्फ इस बात की नहीं है कि भारतीय देर से खाना खा रहे हैं. चिंता इस बात की भी है कि वे सोने से ठीक पहले क्या खा रहे हैं.

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