कार्डियो के बाद कचौड़ी! फिटनेस का यह कैसा ट्रेंड?

बीकानेर में कचौड़ी रन, बेंगलुरु में बेकरी-हॉप रन और मुंबई में गणेश उत्सव के दौरान मोदक रन जैसे आयोजन हो रहे हैं

बीकानेर में 'कचौड़ी रन' आयोजित होती है (फोटो : AI)

सुबह दौड़ने के बाद कचौड़ी, तिरामिसु केक या आइसक्रीम खाना उलटी बात लग सकता है. लेकिन खाने-पीने से जुड़े ऐसे रन भारत में तेजी से बढ़ती सामुदायिक फिटनेस संस्कृति का हिस्सा बन रहे हैं. 

इन आयोजनों में दौड़ने की रफ्तार, दूरी या अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ने पर ध्यान देने के बजाय थोड़ी दूरी तक मनोरंजन के लिए दौड़ा जाता है. इसके बाद खाने-पीने के लिए कहीं रुका जाता है या साथ में भोजन किया जाता है. इस तरह व्यायाम एक सामाजिक गतिविधि बन जाता है.

मिसाल के तौर पर बीकानेर में धावक ‘कचौड़ी रन’ में हिस्सा लेते हैं. दौड़ पूरी करने के बाद वे शहर के मशहूर नाश्ते का स्वाद लेते हैं. बेंगलुरु में ‘बेकरी-हॉप रन’ आयोजित किए गए हैं. इनमें प्रतिभागी कुछ किलोमीटर दौड़ते हैं और रास्ते में अलग-अलग बेकरी पर रुकते हैं. हैदराबाद के धावकों के समूहों ने ‘तिरामिसु रन’ और ‘आइसक्रीम रन’ जैसे आयोजन भी किए हैं. वहीं मुंबई में गणेश उत्सव के दौरान ‘मोदक रन’ आयोजित किए गए.

शहर और मौके के हिसाब से खाने की चीजें बदल जाती हैं लेकिन इन आयोजनों का मकसद एक ही है. ऐसे कार्यक्रम तैयार करना जिनमें वे लोग भी शामिल होने के लिए आकर्षित हों जो आम तौर पर किसी पारंपरिक रनिंग ग्रुप से जुड़ने के लिए आगे नहीं आते.

यह अंतर महत्वपूर्ण है. पारंपरिक रनिंग क्लब कभी-कभी नए लोगों को डराने वाले लग सकते हैं. खासकर तब जब वहां बातचीत दौड़ने के समय, अभ्यास की योजनाओं और प्रतियोगिता में तय की जाने वाली दूरी के इर्द-गिर्द होती है.

कामकाजी युवाओं के बीच 'फूड रन' तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं (फोटो : AI)

विशेषज्ञों का कहना है कि खाने-पीने पर केंद्रित रन इन बाधाओं को जानबूझकर कम करते हैं. इनमें दौड़ की दूरी आम तौर पर कम होती है और रफ्तार भी धीमी रखी जाती है. प्रतिभागियों को यहां सिर्फ दौड़ पूरी करने की नहीं, बल्कि आपस में बातचीत करने की भी गुंजाइश मिलती है.

बेंगलुरु में ब्रांड मैनेजर 29 साल की नैना कपूर का कहना है कि खाने-पीने से जुड़े रन वाले समूह में शामिल होना उन्हें कम मुश्किल लगा. वे बताती हैं, "मुझे हमेशा लगता था कि रनिंग क्लब गंभीर धावकों के लिए होते हैं जो लगातार अपनी रफ्तार पर नजर रखते हैं. यहां लोग दौड़ते हुए बातें कर रहे थे, एक-दूसरे का इंतजार कर रहे थे और साथ में रुक रहे थे. दौड़ खत्म होने तक आप कई लोगों के नाम जान चुके होते हैं. बाद में सबके एक साथ जुटने की वजह खाने-पीने की चीजें भी बन जाती हैं."

यह चलन इस बड़े बदलाव को भी दिखाता है कि शहरों में रहने वाले कुछ युवा भारतीय अब फिटनेस को किस तरह देखते हैं. व्यायाम के साथ सामाजिक मेलजोल भी तेजी से जुड़ रहा है. इसके लिए लोग रन क्लब, साइकिल चलाने वाले समूहों, पिकलबॉल खेलने वाले समूहों और वीकेंड में होने वाले फिटनेस कार्यक्रमों का सहारा ले रहे हैं. 

जिन लोगों के कामकाजी दिनों का बड़ा हिस्सा लंबे कामकाजी घंटों और स्क्रीन के सामने बीतता है, उनके लिए वीकेंड में दौड़ने के दो फायदे हो सकते हैं. इससे शारीरिक गतिविधि भी हो जाती है और दफ्तर के बाहर नए लोगों से मिलने का मौका भी मिलता है.

यह ऐसे समय में खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है जब युवाओं में अकेलापन और सामाजिक जुड़ाव की कमी चिंता का विषय बन रहे हैं. समूह में व्यायाम करने से लोगों को बार-बार मिलने और बातचीत करने का सहज मौका मिलता है. 

प्रतिभागी हर वीकेंड उन्हीं लोगों से मिल सकते हैं बिना अलग से मिलने-जुलने का कार्यक्रम बनाए. दौड़ के बाद नाश्ता या खाने-पीने के लिए कहीं रुकने से यह मेलजोल दौड़ खत्म होने के बाद भी जारी रहता है.

गुरुग्राम के 33 वर्षीय कंसल्टेंट रोहन बत्रा कहते हैं कि सामाजिक मेलजोल की वजह से उनके ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है. उनके मुताबिक, "अगर कोई मुझसे कहे कि रविवार को सिर्फ वर्कआउट करने के लिए जल्दी उठो तो हो सकता है कि मैं आसानी से प्रोग्राम कैंसल कर दूं. लेकिन अगर मेरे जानने वाले चार-पांच लोग जा रहे हों और उसके बाद नाश्ता भी हो तो यह दोस्तों से मिलने जैसा लगता है. तब दौड़ना पूरे कार्यक्रम का हिस्सा होता है, पूरा कार्यक्रम नहीं."

हालांकि विशेषज्ञ स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ सावधानियों की ओर भी ध्यान दिलाते हैं. दौड़ने के बाद कचौड़ी या मिठाई खाने भर से वह सेहतमंद नहीं हो जाती. व्यायाम को ज्यादा कैलोरी वाले भोजन को खाने का हक हासिल करने के तरीके के रूप में भी नहीं देखना चाहिए. 

इसके अलावा, मुश्किल वर्कआउट से ठीक पहले या उसके दौरान भारी, तैलीय या ज्यादा मीठा भोजन करने से पेट फूलने, एसिड रिफ्लक्स और पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है. लंबी दूरी की दौड़ की तैयारी कर रहे गंभीर धावकों को एक्सरसाइज के आसपास अपने खानपान की योजना बिल्कुल अलग तरीके से बनानी पड़ती है.

लेकिन खाने-पीने से जुड़े इन रनों को आम तौर पर खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी के रूप में पेश नहीं किया जाता. इनकी खासियत ही यह है कि फिटनेस की दिनचर्या को मुश्किल बना सकने वाले कुछ नियमों और गंभीरता को इनमें कम कर दिया जाता है. 

दौड़ने के बाद नाश्ता करने से भले ही कोई उम्दा एथलीट न बन पाए लेकिन अगर इससे कम सक्रिय रहने वाला कोई व्यक्ति नियमित रूप से चलने-दौड़ने लगे, नए लोगों से मिले और अगले वीकेंड फिर लौटकर आए तो इसकी भी अहमियत कम नहीं. इस लिहाज से कचौड़ी दौड़ में खर्च हुई कैलोरी का इनाम कम, फिटनेस की राह पर बने रहने के लिए प्रोत्साहन ज्यादा है.

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