हाई-प्रोटीन डाइट के साथ कुछ गलतियां आपकी सेहत बिगाड़ भी सकती हैं!

फिटनेस के बढ़ते ट्रेंड के बीच लोग प्रोटीन की मात्रा पर जरूरत से ज्यादा जोर दे रहे हैं. लेकिन लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए सिर्फ प्रोटीन नहीं, संतुलित आहार जरूरी है

Paneer and eggs aren’t the only protein sources. Here’s a simple look at everyday high protein foods in India that many people overlook in their daily meals.
इन दिनों हाई प्रोटीन डाइट का ट्रेंड जोरों पर है

प्रोटीन जरूरी है लेकिन असीमित मात्रा में नहीं. दरअसल इन दिनों हाई-प्रोटीन डाइट फिटनेस ट्रेंड और सुपरमार्केट की अलमारियों में छाती जा रही है लेकिन प्रोटीन को फाइबर, साबुत अनाज और दूसरे पोषक तत्वों के साथ संतुलित रखना बहुत जरूरी है.  

नई दिल्ली के ISIC मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल की मुख्य क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट हिमांशी शर्मा इस संतुलन की जिक्र करते हुए आगाह करती हैं कि लंबे समय तक अच्छी सेहत सिर्फ प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने पर नहीं बल्कि संतुलित आहार पर निर्भर करती है. हिमांशी यहां बता रही हैं कि प्रोटीन के साथ एक परफेक्ट डाइट क्या होनी चाहिए. 

जरूरत बनाम जरूरत से ज्यादा

आज हर जगह प्रोटीन ही प्रोटीन नजर आता है- प्रोटीन शेक, हाई-प्रोटीन स्नैक बार, हाई-प्रोटीन भोजन और न जाने क्या-क्या. कई फिटनेस इन्फ्लुएंसर और लोकप्रिय ब्लॉगर वजन कम करने, मांसपेशियां बढ़ाने और बेहतर स्वास्थ्य के लिए ज्यादा प्रोटीन लेने की सलाह देते हैं. 

प्रोटीन एक जरूरी पोषक तत्व है लेकिन बहुत ज्यादा प्रोटीन लेना जरूरी नहीं कि अच्छी बात हो. मुख्य सवाल यह है कि व्यक्ति कितनी मात्रा में प्रोटीन ले रहा है, वह किन स्रोतों से मिल रहा है और दूसरे खाद्य पदार्थों के साथ उसका संतुलन कैसा है. 

प्रोटीन मांसपेशियों के विकास और उनकी मरम्मत, प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज और हार्मोन व एंजाइम के निर्माण में मदद करता है. इससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है. लेकिन बहुत से लोग इसके परिणाम जाने बिना जरूरत से ज्यादा प्रोटीन ले रहे हैं.

संतुलित प्लेट

कई लोग अतिरिक्त प्रोटीन को जगह देने के लिए स्वस्थ कार्बोहाइड्रेट और फाइबर वाले खाद्य पदार्थों की मात्रा कम कर देते हैं. साबुत अनाज, फल, सब्जियां और दालों में पाचन, हृदय स्वास्थ्य और आंतों की सेहत के लिए जरूरी विटामिन, खनिज और फाइबर होते हैं. इनमें से किसी भी पोषक तत्व की कमी से कब्ज, अपच और पोषक तत्वों की कमी हो सकती है.

एक और चिंता प्रोटीन के स्रोत को लेकर है. दालें, बीन्स, डेयरी उत्पाद, अंडे, स्किनलेस चिकन और मछली लीन प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं. 

अगर प्रोटीन का ज्यादातर हिस्सा डिब्बाबंद प्रोटीन उत्पादों, बहुत ज्यादा लाल मांस या प्रोसेस्ड मीट से आ रहा है, तो शरीर में सैचुरेटेड फैट, सोडियम, प्रिजर्वेटिव और अतिरिक्त शुगर की मात्रा बढ़ सकती है. इससे हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और जीवनशैली से जुड़ी दूसरी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.

डॉक्टर की सलाह लें

हाई-प्रोटीन डाइट किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों की किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है. स्वस्थ लोगों के लिए प्रोटीन की मात्रा में मामूली बढ़ोतरी ठीक है लेकिन किडनी की बीमारी वाले लोगों को प्रोटीन सप्लीमेंट केवल स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह पर ही लेना चाहिए.

यह धारणा भी है कि मांसपेशियां बढ़ाने के लिए प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना जरूरी है. जबकि मांसपेशियां बनाने के लिए सभी जरूरी पोषक तत्वों, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, आराम और संतुलित पोषण के बीच सही तालमेल जरूरी है.

सप्लीमेंट सभी के लिए नहीं

एक और गलत धारणा यह है कि हर व्यक्ति को प्रोटीन सप्लीमेंट लेने की जरूरत होती है. ज्यादातर स्वस्थ वयस्कों की प्रोटीन की जरूरत सामान्य भोजन से आसानी से पूरी हो सकती है. सप्लीमेंट केवल स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डाइटिशियन की सलाह पर ही लिया जाना चाहिए. 

प्रोटीन की जरूरत व्यक्ति के वजन, शारीरिक गतिविधि के स्तर और संपूर्ण स्वास्थ्य पर निर्भर करती है. उम्र और शारीरिक गतिविधि के हिसाब से पोषण संबंधी जरूरतें भी अलग-अलग होती हैं. इसलिए प्रोटीन के सेवन की कोई एक सार्वभौमिक मात्रा तय नहीं की जा सकती.

लंबे समय की सेहत

लोगों को सिर्फ प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के बजाय संतुलित प्लेट बनाने की कोशिश करनी चाहिए, जिसमें अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन, साबुत अनाज, स्वस्थ वसा, फल और सब्जियां शामिल हों. लंबे समय तक स्वस्थ रहने का सबसे अच्छा तरीका अपने भोजन में विविधता रखना है. 

प्रोटीन स्वस्थ आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसके लिए संपूर्ण पोषण से समझौता नहीं किया जाना चाहिए. लंबे समय तक अच्छी सेहत का राज टिकाऊ खान-पान है, न कि बेहद सख्त डाइट.

Read more!