एक्सपायरी डेट के बाद भी ठीक लगे खाना तो उसे खा सकते हैं?

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि सिर्फ स्वाद और दिखने भर से पुराने पैकेज्ड खाने की अंदर की हालत का पता नहीं चलता

एक्सपायरी डेट बाद भी खाने का स्वाद पहले जैसा लग सकता है (सांकेतिक फोटो)

चिप्स, नूडल्स या मेयोनीज का पैकेट एक्सपायरी डेट के कई हफ्ते बाद भी दिखने में बिल्कुल ठीक लग सकता है. उसकी गंध और स्वाद भी पहले जैसा हो सकता है लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ देखकर यह पता नहीं चल सकता कि पैकेट के अंदर का पुराना खाना खराब हो रहा है या नहीं. यह चिंता तब और बढ़ गई जब महाराष्ट्र के अधिकारियों ने नवी मुंबई में ब्रांडेड खाने के सामान की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी तारीख बदलने का मामला पकड़ा.

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन और नवी मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 24 से 29 अगस्त के बीच यह कार्रवाई की. इस दौरान 76 लाख रुपए से ज्यादा का सामान जब्त किया गया. इसमें स्नैक्स, नूडल्स, सूप, मेयोनीज और सॉफ्ट ड्रिंक शामिल थे. अधिकारियों के मुताबिक, सामान पर लिखी असली मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट मिटाकर उनकी जगह नई तारीखें लिखी गई थीं.

सामान में इस्तेमाल होने वाली चीजों और पोषण की जानकारी वाले लेबल भी बदल दिए गए थे. पुरानी छपी जानकारी मिटाने और नए लेबल बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और केमिकल भी जब्त किए गए.

यह मामला पैकेज्ड खाने को लेकर एक बड़ी गलतफहमी सामने लाता है. एक्सपायरी के बाद खाना खराब हो गया है या नहीं,  जरूरी नहीं है कि यह बात उसकी गंध या स्वाद से ही पता चले.

कोलकाता के जनरल फिजिशियन डॉ. निखिल पांडा बताते हैं, "पैकेज्ड खाना इस तरह बनाया जाता है कि वह लंबे समय तक ठीक रहे. इसमें खाना जल्दी खराब होने से रोकने वाली चीजें मिलाई जाती हैं, नमी का ध्यान रखा जाता है और इसे बाहर की हवा और वातावरण से बचाकर पैक किया जाता है. इसलिए लोग मान लेते हैं कि अगर एक्सपायर हो चुके पैकेट का स्वाद ठीक है तो खाना भी सुरक्षित होगा लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है."

एक्सपायरी डेट के बाद पैकेज्ड फूड का इस्तेमाल सेहत खराब कर सकता है (सांकेतिक तस्वीर)

डॉ. पांडा चेतावनी देते हैं, "एक्सपायरी डेट बीत जाने के बाद भी खाना देखने, सूंघने और यहां तक कि स्वाद में भी पहले जैसा लग सकता है लेकिन इस दौरान खाना खराब होना शुरू हो सकता है."

एक्सपायरी डेट के बाद खाने का क्या होता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह कौन सा खाना है. चिप्स, बिस्किट, नमकीन और इंस्टेंट फूड में मौजूद फैट धीरे-धीरे खराब होने लगता है. इससे तेल और फैट बासी होने लगते हैं और खाने का स्वाद और पोषण कम होने लगता है. समय के साथ विटामिन भी कम हो सकते हैं. वहीं, नमी या पैकेट को हुआ थोड़ा सा नुकसान भी कीटाणुओं को बढ़ने का मौका दे सकता है. सॉस, मेयोनीज, दूध से बने सामान और ज्यादा नमी वाले दूसरे खाने को अगर सही तरीके से नहीं रखा गया तो उनमें कीटाणुओं का खतरा ज्यादा हो सकता है.

जानकार यह भी बताते हैं कि ‘बेस्ट बिफोर’ और ‘यूज बाय’ या एक्सपायरी की तारीख में एक जरूरी अंतर होता है. बेस्ट बिफोर तारीख का मतलब है कि इस तारीख तक कंपनी को उम्मीद होती है कि सामान अपनी अच्छी गुणवत्ता बनाए रखेगा. वहीं, एक्सपायरी या यूज बाय तारीख का मतलब है कि इस तारीख के बाद सामान बताए गए तरीके से रखने पर भी सुरक्षित नहीं रह सकता. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के मुताबिक, एक्सपायरी या यूज बाय तारीख निकल चुके खाने को इंसानों के खाने के लिए बेचा या बांटा नहीं जाना चाहिए.

अगर खराब खाने में हानिकारक कीटाणु या उनके जहरीले पदार्थ मौजूद हों तो उसे खाने से जी मिचलाना, उल्टी, पेट में ऐंठन और दस्त हो सकते हैं. डॉ. पांडा कहते हैं, "खतरा यह है कि जीभ हमेशा इसका पता नहीं लगा पाती."

वे बताते हैं, "कुछ बैक्टीरिया और उनके जहरीले पदार्थ स्वाद में कोई बदलाव नहीं करते. खाने और उसमें मौजूद कीटाणुओं के आधार पर एक्सपायर हो चुका सामान पेट और आंतों में थोड़े समय की बीमारी से लेकर शरीर में पानी की बहुत कमी या इससे भी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है. इसका खतरा खास तौर पर बच्चों, बुजुर्गों और जिन लोगों की रोगों से लड़ने की क्षमता कम है, उनमें ज्यादा हो सकता है."

वहीं सूखा खाना होने का मतलब यह नहीं है कि वह हमेशा सुरक्षित रहेगा. जानकारों के मुताबिक, सामान को रखते समय तेल धीरे-धीरे खराब होता रहता है. ज्यादा गर्मी, धूप और नमी से खाना जल्दी खराब हो सकता है. इसलिए बार-बार ले जाए गए या गर्म गोदामों में रखे गए पैकेट की हालत उसी सामान से अलग हो सकती है, जिसे सही तरीके से रखा गया हो. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) लोगों को सलाह देता है कि एक्सपायरी या यूज बाय डेट निकलने के बाद खाना न खाएं. संगठन यह भी कहता है कि खाने को फ्रिज में रखना और सही पैकेट में बंद करना उसे जल्दी खराब होने से रोक सकता है लेकिन उसे हमेशा के लिए सुरक्षित नहीं रख सकता.

डॉ. पांडा कहते हैं कि लोगों को खाना चखकर यह तय नहीं करना चाहिए कि वह सुरक्षित है या नहीं. वे कहते हैं, "एक्सपायर हो चुके पैकेज्ड खाने का स्वाद ठीक होने का मतलब यह नहीं है कि खाना सुरक्षित है." उनका कहना है, "तारीख, पैकेट की हालत और उसे किस तरह रखा गया था, ये बातें ज्यादा जरूरी हैं. जब कोई पैकेट पर लिखी तारीख बदल देता है तो खाने वाले के पास यह तय करने के लिए जानकारी नहीं रहती कि खाना सुरक्षित है या नहीं."

यही वजह है कि एक्सपायरी डेट में धोखाधड़ी सिर्फ लेबल बदलने का मामला नहीं है. पैकेट पर तारीख बदल देने से सिर्फ लिखी हुई तारीख बदलती है लेकिन अंदर का खाना जिस तरह पहले से खराब हो रहा था, वह वैसा ही चलता रहता है.

Read more!