प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के मौके पर 17 सितंबर की शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लखनऊ स्थित सरकारी आवास में बनास डेयरी, गुजरात द्वारा उत्तर प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के वार्षिक अंतर मूल्य (बोनस) भुगतान के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया. पालनपुर, गुजरात की बनास डेयरी एशिया की सबसे बड़ी सहकारी डेयरी होने के साथ ही, अमूल की सबसे बड़ी सदस्य है. बनास डेयरी ने लगभग 30 करोड़ रुपए, दुग्ध भावान्तर (बोनस) के रूप में किसानों को अतिरिक्त रूप से देना तय किया है. यह कुल खरीद का 4.41 प्रतिशत है. यह धनराशि बनास डेयरी द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है. कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल बनास डेयरी, गुजरात के अध्यक्ष शंकर भाई चौधरी ने बताया कि बनास डेयरी द्वारा गो-पालन व गो-संवर्धन के लिए छह माह का एक पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश के चयनित युवाओं को इस पाठ्यक्रम में रहने-खाने की निःशुल्क सुविधा के साथ-साथ प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा. उन्होंने कहा कि बनास डेयरी द्वारा उत्तर प्रदेश में 2 नए दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे. वाराणसी में गौ-आधारित एक सी.एन.जी. प्लांट भी लगाया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने जनपद उन्नाव व हरदोई के 2-0 दुग्ध उत्पादकों को वार्षिक अंतर मूल्य (बोनस) भुगतान का चेक प्रदान किया. कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बनास डेयरी को दुग्ध आपूर्ति करने वाले जनपद बिजनौर, वाराणसी, फतेहपुर, जालौन, आगरा तथा कानपुर देहात के एक-एक किसान से संवाद किया.
यूपी में दुग्ध के व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक राजस्व ग्रामों में दुग्ध समितियों के गठन की कार्रवाई की जा रही है. वर्तमान में प्रदेश में 7,293 दुग्ध समितियां कार्यरत हैं. योगी सरकार ने इनकी संख्या को तेजी से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है. प्रदेश सरकार राज्य में 8 ग्रीनफील्ड डेयरियों की स्थापना करा रही है. यह ग्रीनफील्ड डेयरियां लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, बरेली, गोरखपुर, फिरोजाबाद, अयोध्या तथा मुरादाबाद में स्थापित की जा रही हैं. साथ ही, झांसी, नोएडा, अलीगढ़ तथा प्रयागराज की 4 पुरानी डेयरियों के उच्चीकरण का कार्य भी कराया जा रहा है.
मुख्यमंत्री योगी ने दुग्ध विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राज्य में स्थापित किए जा रहे डेयरी संयंत्रों को बनास डेयरी के साथ समन्वय स्थापित करते हुए संचालित करें. बनास डेयरी द्वारा वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश के किसानों से 14 करोड़ रुपए प्रतिमाह की दूध खरीद की जाती थी. वर्तमान में यह खरीद 60 करोड़ रुपए प्रतिमाह की है. राज्य सरकार पहले चरण में प्रदेश के प्रत्येक मंडल में एक-एक डेयरी, दूसरे चरण में दो जनपदों में एक डेयरी तथा अंतिम चरण में प्रत्येक जनपद में एक-एक डेयरी की स्थापना की योजना पर काम कर रही है. दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश स्तर पर सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाले उत्पादक को 2 लाख रुपए तथा दूसरे स्थान वाले दुग्ध उत्पादक को 1.50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि दी जाती है. इसी प्रकार जनपद स्तर पर सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाले दुग्ध उत्पादक को ‘गोकुल पुरस्कार’ के रूप में 51,000 रुपए तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है. सहकारी दुग्ध समितियों के माध्यम से भारतीय गोवंश द्वारा प्रदेश में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाले को 51,000 रुपए, जनपद स्तर पर सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाले को 21,000 रुपए तथा विकास खंड स्तर पर सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाले को 5,100 रुपए की धनराशि ‘नन्द बाबा पुरस्कार’ के रूप में दी जाती है.
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