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नोएडा के अंधविश्वास के सामने योगी का विकास

गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा को नया रूप देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां पर कई नई योजनाओं की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं.

8 अगस्त को नोएडा में प्रदेश के सबसे बड़े कोविड अस्पताल का उद्घाटन करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी (फोटो:आशीष मि‍श्र)
8 अगस्त को नोएडा में प्रदेश के सबसे बड़े कोविड अस्पताल का उद्घाटन करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी (फोटो:आशीष मि‍श्र)
अपडेटेड 22 सितंबर , 2020

देश की राजधानी नई दिल्ली से सटे यूपी के गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा को नया रूप देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां पर कई नई योजनाओं की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं. नोएडा के दादरी में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और बोडाकी में ट्रांसपोर्ट हब, ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को उत्तरी भारत के सबसे बड़े लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने की योजनाओं पर काम शुरू हुआ है. इसके अलावा नोएडा एयरपोर्ट को देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनाने की दिशा में भी यूपी सरकार ने कदम बढ़ाया है.

यूपी में मार्च, 2017 में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद से योगी आदित्यनाथ नोएडा के जरिए प्रदेश के विकास की रूपरेखा बनाने में जुट गए थे. कानपुर के एक उद्यमी और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आइआइए) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सचिन वैश्य बताते हैं, “विकास हमेशा ऊपर से नीचे की ओर आता है. अगर नोएडा में तेजी से विकास होगा तो यहां के बाद कंपनियां इसके आसपास के इलाकों की ओर आएंगी. यहां से फि‍र आसपास के दूसरे इलाके विकसित होंगे और यह क्रम चलता रहेगा.” इसी कॉन्सेप्ट को लेकर योगी आदित्यनाथ ने नोएडा के विकास पर ध्यान दिया. हालांकि नोएडा को लेकर एक बड़ा अंधविश्वास भी जुड़ा था. वह यह कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है उसकी कुर्सी चली जाती है. नोएडा को लेकर अंधविश्वास तब जुड़ा जब कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री और गोरखपुर के निवासी वीर बहादुर सिंह 23 जून 1988 को नोएडा गए थे. इसके अगले दिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उनको अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. यहीं से अंधविश्वास पनप गया कि जो भी नोएडा जाता है उसकी कुर्सी चली जाती है.

बहादुर सिंह के बाद नारायण दत्त तिवारी, मुलायम सिंह यादव, कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता, राजनाथ सिंह, मायावती से लेकर अखिलेश यादव तक मुख्यमंत्री बने लेकिन नोएडा सबको डराता रहा. हालांकि बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बतौर मुख्यमंत्री इस अंधवश्विास को तोड़ने का हौसला दिखाया था. बाद में उनकी भी कुर्सी नहीं बची थी. मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने नोएडा के बारे में पूर्व से चले आ रहे मिथक को तोड़ा. योगी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर 25 दिसंबर, 2017 को नोएडा के बॉटनिकल गार्डन से दक्षिण दिल्ली के कालिका जी मंदिर तक दिल्ली मेट्रों की मजेंटा लाइन के उद्घाटन में शिरकत किया. इसके बाद से अब तक योगी करीब डेढ़ दर्जन बार नोएडा के चक्कर लगा चुके हैं. कोरोना संक्रमण के बीच योगी दो बार नोएडा जा चुके हैं. पिछले महीने 8 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी ने टाटा कंपनी के सहयोग से नोएडा के सेक्टर 39 में बने 420 बिस्तरों वाले प्रदेश के सबसे बड़े कोविड-19 अस्पताल का उद्घाटन किया था. भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय बहादुर पाठक बताते हैं, “मुख्यमंत्री योगी यूपी की सत्ता संभालने के बाद से लगातार नोएडा जा रहे हैं. नोएडा का अंधविश्वास तो पिछले लोकसभा चुनाव में ही टूट गया था जब भाजपा ने अपने सहयोगियों के साथ प्रदेश की 80 में से 64 सीटें जीती थीं. इसके बाद विधानसभा उपचुनाव में भी मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में जीत हासिल की गई. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में भाजपा यूपी में प्रचंड बहुमत हासिल करेगी. योगी सरकार के विकास के सामने अंधविश्वास की बातें बेमानी हैं. ”

नोएडा में देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट

मुख्यमंत्री योगी का निर्देश मिलने के बाद नोएडा एयरपोर्ट को देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने कदम बढ़ाया है. प्राइस वाटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) कंपनी ने इसकी प्राथमिक फि‍जिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर ली है. इसके मुताबिक, पहले चरण में दो रनवे के साथ एयरपोर्ट से हवाई यात्रा की शुरुआत होगी जबकि दूसरे चरण में तीन और रनवे बनाए जाएंगे. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) के मुताबिक ज्यूरिख कंपनी से करार होते ही एयरपोर्ट के निर्माण का काम शुरू हो जाएगा. अधि‍कारियों के मुताबिक यह करार 15 अक्तूबर तक होने की उम्मीद है और वर्ष 2023 से इन दो रनवे से उड़ान शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है.

फि‍ल्म सिटी से मचेगी धूम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से फिल्म सिटी के लिए नोएडा के तीनों प्राधिकरणों से जमीन तलाशने का निर्देश दिया था. नोएडा प्राधि‍करण ने 500 एकड़ जमीन पर फिल्म सिटी बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है. यह जमीन नोएडा के सेक्टर-162, 164, 165 और 166 में है. प्राधि‍करण की सीईओ रितु महेश्वरी के मुताबिक, अभी फि‍ल्म सिटी के लिए 200 एकड़ जमीन उपलब्ध है और बाकी भूमि खरीदनी होगी. ग्रेटर नोएडा प्राधि‍करण ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के पास प्रस्तावित नाइट सफारी की 550 एकड़ जमीन पर फि‍ल्म सिटी बनाने का प्रस्ताव बनाया है. यमुना प्राधि‍करण ने जिस जमीन को फि‍ल्म सिटी के लिए चुना है वहां से नोएडा एयरपोर्ट मात्र छह किलोमीटर की दूरी पर है. यह जगह न केवल परी चौक सेक्टर 21 यमुना एक्सप्रेसवे के पास है बल्कि‍ ईस्टर्न पेरीफेरल से भी इसकी दूरी महज 12 किलोमीटर है. फि‍ल्म सिटी के लिए जमीन पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट लेगी.

उत्तर भारत का सबसे बड़ा लॉजिस्ट‍िक हब

यूपी सरकार ने नोएडा के दादरी में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और बोडाकी में ट्रांसपोर्ट हब, ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को उत्तरी भारत के सबसे बड़े लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने की योजना पर काम शुरू किया है. दादरी में ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर मिलेंगे. यहां से कुछ ही घंटों में मुंबई समेत अन्य व्यावसायिक नगरों को माल पहुंच सकेगा. इससे ग्रेटर नोएडा में बनने वाले लॉजिस्ट‍िक हब को बहुत मदद मिलेगी. उद्योग विभाग के एक अधि‍कारी बताते हैं कि अगले एक वर्ष के भीतर नोएडा के लिए शुरू की जा रही योजनाएं जमीन पर आकार लेती दिखाई पड़ने लगेंगी.

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