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राम की जन्मभूमि और तपोभूमि से ‘राजनीतिक शक्ति’‍ ले रहे योगी

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ आठ बार चित्रकूट के दौरे पर आ चुके हैं. किसी भी मुख्यमंत्री के इतनी बार धर्मनगरी चित्रकूट आने का यह पहला वाकया है.

चित्रकूट के वाल्मीकि आश्रम में वाल्मीकि की मूर्ति को फूल चढ़ाते मुख्यमंत्री योगी
चित्रकूट के वाल्मीकि आश्रम में वाल्मीकि की मूर्ति को फूल चढ़ाते मुख्यमंत्री योगी
अपडेटेड 31 अक्टूबर , 2020

भगवान राम की तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध चित्रकूट के जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर स्थ‍ित राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे लालपुर गांव के समीप स्थि‍त प्राचीन वाल्मीकि आश्रम 30 अक्तूबर को 'जय श्री राम..,जय जय सीता राम.., जय महर्षि वाल्‍मीकि..' के जय घोष और जबरदस्‍त शंखनाद से गूंज रहा था. मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की मौजूदगी में महर्षि वाल्‍मीकि की तपोस्‍थली उत्‍सव मना रही थी. केसरिया रंग में सराबोर वाल्‍मीकि पर्वत पर शुक्रवार का दिन कुछ खास था. भगवान महर्षि वाल्‍मीकि की जयंती के उपलक्ष्य पर चित्रकूट पहुंचे मुख्यमंत्री योगी अन्‍य साधु संतों के साथ आश्रम में आयोजित अनुष्‍ठान, पूजन, हवन, आरती और अखंड रामायण के पाठ में शामिल हुए. यह पहला मौका था जब योगी आदित्यनाथ चित्रकूट में किसी विशुद्ध धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए हों.

31 अक्तूबर को महर्षि वाल्‍मीकि की जयंती है. मुख्‍यमंत्री ने आश्रम में महर्षि वाल्‍मीकि की पूजा, गोरक्षा हवन और आरती करने के साथ अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ भी किया. करीब एक घंटे तक आश्रम में रुकने के दौरान सीएम योगी ने आश्रम की देख-रेख की जानकारी लेने के साथ ही चित्रकूट को विश्‍व स्‍तर के तीर्थ स्‍थल के रूप में विकसित करने और आवश्‍यक सुविधाओं पर साधु संतों स्‍थानीय जन प्रतिनिधियों से चर्चा की. इस मौके पर मुख्‍यमंत्री ने असावर माता मंदिर के सामने सुंदरीकरण कार्य का शिलान्यास भी किया. चित्रकूट के वरिष्ठ समाजसेवी संदीप रिछारिया बताते हैं, “प्रदेश की बागडोर संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या के विकास के साथ भगवान राम की तपोस्थली के रूप में पहचानी जाने वाली नगरी चित्रकूट को भी पर्यटन के नक्शे पर उभारने के लगातार प्रयास किए हैं.”

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ कुल आठ बार चित्रकूट के दौरे पर आ चुके हैं. किसी भी मुख्यमंत्री के इतनी बार धर्मनगरी चित्रकूट आने का यह पहला वाकया है. यूपी के मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी सबसे पहले चित्रकूट मुख्यालय से सटे सिद्धपुर गांव आए थे. इसके बाद वह दो दिवसीय दौरे पर कसहाई गांव पहुंचे थे. इस दौरान योगी ने भगवान कामतानाथ का दर्शन कर परिक्रमा भी लगाई थी. पिछले वर्ष मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के दौरान योगी ने लालता रोड पर चुनावी जनसभा भी की थी. इस वर्ष फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का शि‍लान्यास करने के अवसर पर भी योगी चित्रकूट पहुंचे थे. संदीप रिछारिया कहते हैं, “यह महज एक संयोग नहीं है कि मुख्यमंत्री योगी जब भी राम की जन्मस्थली अयोध्या जाते हैं तब तब उनका राम की तपोस्थली चित्रकूट में आगमन जरूर होता है. यह दोनों स्थल मुख्यमंत्री की राजनीति के केंद्र बिंदु बनकर उभरे हैं.”

अयोध्या के विकास को चित्रकूट से जोड़ने की कई सरकारी योजनाएं आकार ले रही हैं. राम वनगमन मार्ग के जरिए चित्रकूट को अयोध्या से जोड़ा जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी ने इसी मार्ग से तुलसी नगरी के रूप में जाना जाने वाली राजापुर और महर्ष‍ि वाल्मीकि आश्रम को जोड़ने के निर्देश भी अधि‍कारियों को दिए हैं. मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर पर्यटन विभाग ने वाल्मीकि आश्रम के सुदरीकरण की योजना तैयार की थी. यह कार्य अभी जारी है. वाल्मीकि आश्रम से 30 किलामीटर दूर राजापुर गांव है जिसकी पहचान गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली के रूप में है. आश्रम के पास स्थि‍त भौंरी गांव के पास से राजापुर को जाने वाली सड़क का चौड़ीकरण करने की योजना भी बनाई जा रही है. वाल्मीकि आश्रम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान योगी ने कहा कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे चित्रकूट के विकास की धुरी बनने जा रहा है. हर घर नल पाइप पेयजल योजना से घर-घर में शीघ्र पाइप पेयजल पहुंचेगा. उन्होंने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर के अंतर्गत चित्रकूट में शीघ्र हथियार बनाने के कारखाने लगेंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट को देश और दुनिया से जोड़ने के लिए शीघ्र ही हवाई सेवा प्रारंभ करायी जायेगी. चित्रकूट के देवांगना में पहाड़ी पर मौजूद प्रदेश का पहला एयरपोर्ट का निर्माण कराया जा रहा है जिसे अगले वर्ष तक पूरा होने की उम्मीद है. लखनऊ में कान्य कुब्ज कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बृजेश मिश्र बताते हैं, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या और चित्रकूट में बड़े पैमाने पर विकास कार्य शुरू करके प्रदेश की एक बड़ी जनसंख्या को राजनीतिक संदेश देने की कोशि‍श की है. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में इस पहल को एक बड़ी उपल‍ब्धि‍ के रूप में गिनाया जाएगा.”

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