पिछले 5 दिन से राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड के इलाकों में खतरनाक और बेहद खतरनाक हीट वेव चल रही हैं.
यह स्थिति अगले 24 घंटो तक जारी रहने वाली है.
गरमी के मौसम में पश्चिमोत्तर और उत्तर भारत में हीट वेव जैसी मौसमी परिस्थितियां नई बात नहीं हैं. पश्चिमोत्तर इलाकों से आने वाली सूखी और गर्म हवा से ऐसी परिस्थितियां बनती हैं. पर इस साल मई के पहले पखवाड़े तक मौसम सामान्य से कम रहा था और इसमें अचानक बढोतरी आई है. इसके पीछे महाचक्रवात अंफन की भूमिका भी है.
सुपरसाइक्लोन अंफन की भूमिका
महाचक्रवात अंफन का असर खत्म होने के बाद ही हीट वेव जैसी परिस्थितियां पैदा हुई. अंफन बंगाल की खाड़ी, दक्षिणी प्रायद्वीप और मध्य भारत की नमी को अपने साथ खींच ले गया. अगर इन इलाकों की नमी बरकरार रहती तो छींटे और बौछारें, तड़ित झंझा और नम हवाएं यदा-कदा चला करतीं. इससे सूखी पछुआ को पैर पसारने का मौका नहीं मिलता. मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काइमेट के मुताबिक, “नमी अंफन के साथ जाने के साथ ही पाकिस्तान के बलूचिस्तान और सिंध प्रांत से होकर आने वाली गर्म और शुष्क हवाओं और तेज धूप के कारण तापमान तेज़ी से ऊपर गया है और गर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है. बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, चूरु, गंगानगर में तापमान हर दिन नई ऊंचाई छू रहा है.”

स्काईमेट के मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, “लंबे समय से शुष्क मौसम और पश्चिमोत्तर से आ रही हवाएं राजस्थान की गर्मी भी साथ ला रही हैं, उनका असर बढ़ते तापमान के रूप में देखने को मिल रहा है.”
लेकिन इस हीट वेव पर साफ आसमान का असर भी पड़ रहा है. स्काईमेट के मुताबिक, “लंबे समय से साफ आसमान के कारण धूप का पूरा प्रभाव नीचे ज़मीन की सतह तक पहुंच रहा है. धूप और धरती के बीच प्रदूषण या बादलों का कोई व्यवधान या बाधा नहीं है यही कारण है कि तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है.”
इसका मतलब यह है कि लॉकडाउन में कम प्रदूषण भी इस गहन हीट वेव के पीछे एक कारण है. दूसरा महत्वपूर्ण कारण ताकतवर अंफन तूफान रहा है.
बहरहाल, पेशावर की तरफ से चली हवा स्थल के ऊपर से चलती है और काफी सूखी हो जाती है. और राजस्थान की रेतीली और गर्म इलाके में और अधिक गर्म हो जाती है. इसकी वजह से दिन का तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया जा रहा है. खासकर राजस्थान के चुरू में मंगलवार को 50 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया.
हालांकि, मौसम विभाग (आइएमडी) के मुताबिक, मई के आखिरी तीन दिनों में दिल्ली-एनसीआर में झड़ी लग सकती है. पर उससे तापमान थोड़ा ही नीचे आएगा. एकाध दिन के बाद हीट वेव दोबारा आरंभ हो सकता है.

इलाकावार कहें तो भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) के मुताबिक, महाराष्ट्र के विदर्भ में यह अपने बेहद खतरनाक रूप में रहने वाला है. पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों समेत, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में हीट वेव अपना रौद्र रूप दिखाएगी. इसके साथ ही पंजाब, बिहार, झारखंड, ओडिशा, सौराष्ट्र और कच्छ, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक के अंदरूनी हिस्सों में छिटफुट जगहों पर अगले 24 घंटों तक हीट वेव का असर रहेगा.
हालांकि, लगातार आ रहे पश्चिमी विक्षोभों की वजह से मई के पहले पखवाड़े तक पूरे उत्तर भारत में मौसम ज्यादा गर्म नहीं हो पाया था और एकाध जगहों को छोड़कर कहीं भी हीट वेव दर्ज नहीं किया गया था.
हालांकि, मई के दूसरे हफ्ते तक सामान्य गर्मी के मुकाबले मौसम का उदारवादी रवैया भी वैज्ञानिकों के मुताबिक असामान्य ही था.
आखिर ये हीट वेव क्या बला है?
हीट वेव भारत में गर्मियों में पैदा होते हैं. असल में, किसी भी जगह पर हीट वेव है या नहीं, इसका निर्धारण मौसम विज्ञानी करते हैं. सामान्य तौर पर, अगर मैदानों में दिन का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो तो उसे हीट वेट कहा जाता है. पहाड़ों पर यह स्तर 30 डिग्री सेल्सियस है तो तटीय इलाकों में अगर तापमान 37 डिग्री हो जाए तो उसे हीट वेव कहा जाता है. सामान्य तापमान में अंतर आने पर हीट वेव निर्धारण के दो तरीके हैं,
हीट वेवः सामान्य औसत तापमान में 4.5 डिग्री या 6.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी
गंभीर हीट वेव (सीवियर हीट वेव)- सामान्य औसत तापमान में 6.4 डिग्री सेल्सियस से अधिक की बढ़ोतरी
इसका दूसरा तरीका वास्तविक अधिकतम तापमान पर भी आधारित होता है लेकिन यह सिर्फ मैदानी इलाकों के लिए ही इस्तेमाल किया जाता हैः
हीट वेवः जब वास्तविक अधिकतम तापमान 45 डिग्री के बराबर हो या उससे अधिक हो
गंभीर हीट वेव (सीवियर हीट वेव)- जब वास्तविक अधिकतम तापमान 47 डिग्री के बराबर हो या उससे अधिक हो
पर हीट वेव घोषित करने से पहले यह तापमान किसी मौसम उपकेंद्र के दो स्टेशनों पर अवश्य दर्ज किए जाने चाहिए.

हीटवेवः पश्चिमी विक्षोभ के साथ सीधा मुकाबला?
मई में अमूमन देश भर में दिन का तापमान 40 डिग्री के आसपास रहता है और कभी-कभार यह 45 डिग्री पर भी पहुंचता है. पर इस साल मई के दूसरे पखवाड़े के बाद भी इतना अधिक तापमान कम ही जगहों पर दर्ज किया गया. इसकी एक वजह तो वही बारबार आने वाला पश्चिमी विक्षोभ था. सरदी का मौसम खत्म होने के बाद भी लगातार आ रहे पश्चिमी विक्षोभ से पहाड़ों पर बर्फबारी होती रही और उत्तरी भारत के मैदान बारिशों का मजा लेते रहे. मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, जनवरी से मार्च के बीच कोई 20 पश्चिमी विक्षोभ आए. इनका आना मई तक जारी रहा.
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