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आखि‍र क्यों भाव खा रहा है आलू ?

यूपी में पिछले वर्ष फुटकर बाजार में 10 से 15 रुपए प्रति किलो बिकने वाला आलू इस बार 60 रुपए प्रति किलो बिक रहा है.

इस बार आलू के दाम आसमान पर चढ़े हुए हैं (फोटोः रॉयटर्स)
इस बार आलू के दाम आसमान पर चढ़े हुए हैं (फोटोः रॉयटर्स)
अपडेटेड 25 नवंबर , 2020

यूपी में आलू बेल्ट के एक प्रमुख जिले कन्नौज में पिछले कई वर्षों से किसान लागत से कम दाम मिलने की वजह से आलू को सड़कों पर फेंक रहे थे. वहीं इस बार आलू मुंह मांगे दाम पर बिक रहा है. यहां के बाजार में पंजाब से भी नया आलू आ गया है लेकिन आलू के दाम में कोई गिरावट नहीं दिखी है. पिछले वर्ष फुटकर बाजार में 10 से 15 रुपए प्रति किलो बिकने वाला आलू इस बार 60 रुपए प्रति किलो बिक रहा है. कन्नौज में आलू के थोक विक्रेता रामसरन यादव बताते हैं, “इस साल आलू के दाम पंजाब में काफी ज्यादा हैं. इस साल फसल कम हुई है. पिछले वर्षों में आलू की पैदावार ज्यादा होने से इसके दाम कम थे. ऐसे में आमदनी कम होने से आलू उत्पादकों की पिछले चार साल में कमर टूट गई थी. इस साल उन्होंने आलू की फसल से किनारा कर लिया. पुखराज, डायमंड शुगर फ्री, ज्योति आलू खाने के काम आता है. इसकी पैदावार कम हुई है. कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के चलते आलू उत्पादक किसान घबरा गए थे कि आलू को भंडारित कैसे करेंगे? आलू की सप्लाई कैसे की जाएगी? गर्मी के कारण आलू खराब होने का भी खतरा था. इस कारण भी बाजार में आवक कम हुई और आलू का दाम काफी बढ़ गया.” कन्नौज ही नहीं उत्तर प्रदेश के हर जिले में आलू के दाम आसमान पर चढ़े हुए हैं. उद्यान विभाग के एक अधि‍कारी बताते हैं कि देश में आलू के सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में पिछले साल सितंबर और अक्तूबर में बारिश होने से आलू की बुआई देर से शुरू हुई और फसल के रकबे में भी कमी आई. इस वर्ष फरवरी में बारिश होने से प्रति हेक्टेयर पैदावार पर भी असर पड़ा. इसके चलते यूपी में आलू का उत्पादन पिछले वर्ष के 160 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले इस बार 140 लाख मीट्रिक टन से भी कम रहा.

कालाबाजारी ने बिगाड़े हालात

कालाबाजारी ने भी आलू के दामों में इजाफा किया है. लखनऊ के 15 कोल्डस्टोरेज से 31 अक्तूबर तक 90 फीसद आलू की निकासी हो गई थी लेकिन इसके बावजूद दाम में कमी नहीं हुई. लखनऊ में एक दिन की औसत मांग 4,000 बोरी आलू यानि महीने में एक लाख 20 हजार बोरी है. कैसरबाग मंडी के आढ़ती राजू सोनकर कहते हैं, "अगर लखनऊ में कोल्ड स्टोरेज का 90 फीसद आलू मंडी में पहुंचता तो इसके दाम जरूर गिरते. कोरोना संक्रमण के चलते शादी समारोह और अन्य आयोजनों में लगे प्रतिबंध के कारण भी आलू की डिमांड कम है. इसके बावजूद आलू के दाम चढ़ रहे हैं तो इसकी वजह कालाबाजारी ही है.” हालांकि पहली नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सब्ज‍ियों की जमाखोरी करने वालों पर कार्रवाई करने के लिए छापे मारने के आदेश दिए थे. इसके बाद कई जिलों प्रशासन ने कार्रवाई की लेकिन इसके बाद भी दाम में कोई कमी नहीं हुई है. लखनऊ की कैसरबाग सब्जी मंडी में आलू का थोक दाम 50 रुपए प्रति किलो है जबकि फुटकर में यह 60 से 70 रुपए किलो मिल रहा है.

कम भंडारण से बढ़े दाम

यूपी में कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के एक पदाधि‍कारी बताते हैं कि पिछले साल भंडारण क्षमता के मुकाबले 78 फीसद आलू शीत गृहों में भरे थे. इस साल इससे 15 फीसद कम भंडारण हुआ. इस साल आलू का भंडारण भी उंचे दाम पर भी हुआ है. सभी खर्च मिलाकर आलू भंडारण की लागत 15 से 18 रुपये किलो है, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है. कम भंडारण और ऊंचे भाव पर भंडारण के कारण ही इस साल आलू में भारी तेजी देखी जा रही है. आगरा मंडी में आलू कारोबारी दीपक कुमार कहते हैं, “इस साल कोल्ड स्टोर में भंडारण कम होने से मंडियों में आवक भी कम हो रही है. बीते वर्षों में घाटे की मार झेल चुके भंडार गृहों में आलू रखने वाले कम कीमत पर आलू बेचने को तैयार नहीं हैं. इसने भी आलू के दाम बढ़ाए हैं.”

कोल्ड स्टोरेज की समस्या

सोनभद्र जैसे पिछड़े जिले में आलू किसानों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उद्यान विभाग के अनुसार, सोनभद्र में करीब 800 हेक्टेयर में ही आलू की खेती होती है. किसान केवल खाने के लिए ही आलू की खेती करते हैं क्योंकि जिले में आलू के स्टोर के लिए एक भी कोल्ड स्टोरेज नहीं है. सोनभद्र के किसान रामशकल कहते हैं, “आलू अधि‍क उगाकर क्या करेंगे जब जिले में एक भी कोल्डस्टोर नहीं है. मिर्जापुर में कोल्डस्टोर है, ऐसे में अगर किसान सोनभद्र से मिर्जापुर आलू लेकर जाते हैं तो उसका किराया ही इतना लग जाता है कि किसानों को घाटा उठाना पड़ता है.” सोनभद्र मंडी के थोक व्यापारी अनूप सोनकर बताते हैं कि जिले की मंडी में कानपुर और आगरा से आलू मंगाया जाता है. इस बार आलू की आवक कम होने से इसके दाम में काफी इजाफा हुआ है. सोनभद्र के जिला उद्यान अधि‍कारी सुनील कुमार के अनुसार, जिले में कोल्ड स्टोर की समस्या का समाधान करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. यूपी में वर्तमान में 1,911 कोल्ड स्टोर हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 1.5 लाख मीट्रिक टन है. आलू के बढ़ते दाम को देखते हुए राज्य सरकार ने इस बार ऑफ सीजन के लिए अपने सीधे नियंत्रण में पर्याप्त आलू रखने का निर्णय लिया है. इसके तहत आलू उत्पादन वाले 54 ब्लॉकों में कम क्षमता के कोल्ड स्टोर बनाए जाएंगे. यह कवायद आलू की भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए की जा रही है ताकि जैसे ही जमाखोरी की शि‍कायत आए सरकार इन कोल्ड स्टोरेज से आलू की आवक बढ़ाकर दाम को बढ़ाने की कोशि‍शों को नाकाम कर दे. अपर मुख्य सचि‍व उद्यान मनोज सिंह बताते हैं कि उन जिलों में जहां एक भी कोल्ड स्टोरेज नहीं है वहां के ब्लॉकों में छोटे कोल्ड स्टोरेज की सुविधा देने पर विचार हो रहा है.

नए आलू का इंतजार

यूपी में सहालग का समय शुरू हो गया है. ऐसे में आलू के बढ़े दाम ने आयोजकों का खर्च और बढ़ा दिया है. उद्यान विभाग का मानना है कि नया आलू बाजार में आने पर इसके दाम में कमी हो सकती है. अभी यूपी में ज्यादातर नया आलू पंजाब, हरियाणा और गुजरात से आ रहा है. ऐसे में परिवहन के खर्चे के कारण इसके दाम में कमी नहीं आई है. यही वजह है कि पुराने आलू के दाम में भी कमी नहीं आई है. उद्यान विभाग के अधि‍कारी रमेश वर्मा बताते हैं, “सितंबर में अधि‍क गर्मी पड़ने के कारण यूपी का अगेती आलू भी इस बार बाजार में देरी से आ रहा है. प्रदेश में 18 नवंबर से नए आलू की खुदाई शुरू हुई है. जैसे-जैसे यूपी के किसान नया आलू बाजार में लाते जाएंगे वैसे-वैसे इसका दाम गिरता जाएगा.” फि‍लहाल आलू का दाम कम होने के लिए दिसंबर तक का इंतजार करना होगा.

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