समाजवादी पार्टी भले ही अल्पसंख्यकों के वोट के लिए जूझ रही हो पर उसने अपने मुस्लिम चेहरे, आजम खान को नाराज कर दिया है.
8 फरवरी 2012: तस्वीरों में इंडिया टुडे
समाजवादी पार्टी (सपा) के मुस्लिम नेता आजम खान यह जाहिर करने लगे हैं कि वे पार्टी के भीतर की गतिविधियों से खुश नहीं हैं. मुलायम सिंह यादव ने 28 फरवरी को लखनऊ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में जब दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी को गले लगाया तब खान वहां मौजूद नहीं थे. बाद में जब बुखारी ने कहा कि वे अल्पसंख्यकों के लिए 4.5 फीसदी आरक्षण के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि इससे ओबीसी कोटा कम होगा और दोनों समुदायों के बीच मतभेद पैदा होगा तब खान ने उन्हें झिड़कते हुए कहा, ‘मौलवियों और पंडितों को इस तरह के मुद्दों से अलग रहना चाहिए.’
1 फरवरी 2012: तस्वीरों में इंडिया टुडे
खान 2009 में पार्टी से निकाले जाने के बाद दिसंबर, 2010 में फिर लौट आए. उनकी वापसी आसान नहीं रही है. उन्होंने जनवरी में बा'बली डी.पी. यादव के सपा में शामिल होने का स्वागत किया, लेकिन सपा के प्रदेश प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी में शामिल करने से इनकार कर दिया.’ इस तरह के अपराधियों को शामिल करने का सवाल ही नहीं उठता.’
25 जनवरी 2012: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
उसके बाद से ही सपा नेतृत्व के साथ खान का समीकरण बिगड़ गया. वे 20 जनवरी को लखनऊ में पार्टी घोषणापत्र जारी करने के समारोह समेत प्रमुख कार्यक्रमों और रैलियों में शामिल नहीं हुए. अखिलेश ने इस मामले को दबाते हुए कहा कि उनके जहाज आने में देर हो गई थी. लेकिन खान पार्टी की देवरिया और कुशीनगर रैलियों में भी नजर नहीं आए. वे अपनी गैर-मौजूदगी पर सफाई देते हैं: ‘किसी नेता के लिए हर रैली में मौजूद रहना मुमकिन नहीं है.’ फिलहाल, उन्हीं की दलील मान लेते हैं.

