महज चार माह पहले मार्च में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (एसपी) की सरकार के सत्ता में आते ही बेरोजगार युवा अपने जिलों के सेवायोजन कार्यालय की ओर दौड़ लिए थे. इस आस में कि नई सरकार अपने वादे के मुताबिक बेरोजगारों को भत्ता देगी जिससे महंगाई के इस दौर में उनकी कड़की कु छ दूर हो सकेगी.
विधानसभा चुनाव का नतीजा आने के दो हफ्ते के भीतर राज्य के सेवायोजन कार्यालयों में 10 लाख से ज्यादा बेरोजगारों ने दस्तक दी. लेकिन भत्ता पाने के लिए नियम-कानूनों की भरमार देखकर बेरोजगार इससे बिदक गए. सेवायोजन कार्यालयों पर सन्नाटा पसर गया. नतीजा अब सरकार नियमों में ढील देकर बेरोजगारों को लुभाने का प्रयास कर रही है.
आखिर बेरोजगारी भत्ता किसे मिलेगा? दरअसल इस सवाल को लेकर शुरुआत से ही भ्रम की स्थिति बनी हुई थी. एसपी ने कहा था कि सरकार बनने पर वह 35 साल से अधिक उम्र वाले हर बेरोजगार को 1000 रु. प्रतिमाह भत्ता देगी. पर 15 मई को बेरोजगारी भत्ते के लिए जब नियम जारी हुए तो पूरा परिदृश्य ही बदल गया.
सरकार ने बेराजगारी भत्ता पाने की प्रक्रिया को तमाम नियमों व शर्तों में लपेट दिया. इसके मुताबिक 30 से 40 वर्ष की उम्र वाले वही बेरोजगार भत्ते के योग्य होंगे, जिन्होंने इस वर्ष 15 मार्च को एसपी सरकार के शपथ लेने तक अपना पंजीकरण सेवायोजन कार्यालय में करा लिया होगा. यही नहीं, बेरोजगार व्यक्ति के परिवार की समस्त स्त्रोतों से आय 36,000 रु. वार्षिक या इससे कम होनी चाहिए. सरकार ने बजट में नौ लाख बेरोजगारों के भत्ते के लिए 1100 करोड़ रु. का प्रावधान भी किया.
जैसे ही नियमावली जारी हुई, बेरोजगारों की उम्मीदों पर मानो पानी फिर गया हो. फिर सरकार ने अपने नियमों में संशोधन किया. उन बेरोजगारों को भत्ता पाने के लिए पात्र माना गया जिन्होंने 15 अप्रैल तक अपना पंजीकरण करवाया था. 15 जुलाई तक प्रदेश के सभी सेवायोजन कार्यालयों में कुल 55,095 बेरोजगारों ने ही भत्ते के लिए आवेदन किया जो सरकार के निर्धारित लक्ष्य का महज छह फीसदी ही था.
जय नारायण डिग्री कॉलेज में समाजशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनोद चंद्र कहते हैं, ''एक ओर तो सरकार यह दिखा रही है कि वह 9 लाख लोगों को बेरोजगारी भत्ता देने जा रही है लेकिन असलियत यह है कि सरकार के पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है कि उसकी शर्तों के मुताबिक प्रदेश में भत्ता पाने के लिए योग्य बेरोजगारों की संख्या कितनी है?''
अपनी महत्वाकांक्षी योजना का हश्र देखते हुए सरकार ने एक बार फिर नियमों में ढील दी और 23 जुलाई को आदेश जारी कर 25 से 40 वर्ष की उम्र वाले बेरोजगारों को भी भत्ता पाने का हकदार बना दिया. यही नहीं, अब 31 अगस्त तक पंजीकरण कराने वाले बेरोजगार भी भत्ते के लिए पात्र होंगे. इससे 24 जुलाई तक प्रदेश के सेवायोजन कार्यालयों में आवेदन करने वालों की संख्या 73,362 तक पहुंच गई.
लखनऊ के आलमबाग में रहने वाले कैलाश गुप्ता (25) एमकाम करने के बाद बीते चार साल से बेरोजगार हैं. वे बताते हैं, ''असली बेरोजगार तो वह है कि जो पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के लिए भटक रहा है.''
अंबेडरकरनगर के अल्लाहपुर कस्बे में रहने वाले दिनेश पांडेय (30) बेरोजगारी भत्ते के लिए जारी सरकारी मानकों पर फिट बैठते हैं लेकिन वे भता नहीं पा सकेंगे. दिनेश बताते हैं, ''मैंने आंबेडरकर नगर के सेवायोजन कार्यालय में मार्च के महीने में रजिस्ट्रेशन करा दिया था. तब यह बताया गया था कि रजिस्ट्रेशन फार्म के साथ लगाये गए पोस्टकार्ड पर सेवायोजन कार्यालय की मुहर लगाकर आवेदनकर्ता के घर भेजा जाएगा जो रजिस्ट्रेशन हो जाने का प्रमाण होगा लेकिन चार महीने से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी मेरे पास ऐसा कोई पोस्टकार्ड नहीं आया है.''
सेवायोजन दफ्तर में दिनेश ही नहीं, बड़ी संख्या में बेराजगार अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पाने के लिए भटक रहे हैं.
यहां यह बताना भी जरूरी है कि बीते माह आंबेडकरनगर सेवायोजन कार्यालय में जमा हुए रजिस्ट्रेशन फार्म बड़ी संख्या में सड़क के किनारे पड़े मिले थे. प्रशासन इनकी जांच कर रहा है. वरिष्ठ भाजपा नेता कलराज मिश्र कहते हैं, ''भत्ता पाने के लिए तमाम शर्तें लगाना जायज नहीं है. इससे बेरोजगार अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है.''
सेवायोजन अधिकारी भी इन शर्तों को व्यवहारिक नहीं बताते. एक सेवायोजन अधिकारी बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति की आय 36000 रु. सालाना है तो पहले तो वह बेरोजगार कैसे हुआ? हकीकत तो यह है कि शर्तों के अनुसार वास्तविक पात्र लोगों में ज्यादातर ने भत्ते के लिए पंजीकरण करवाया ही नहीं है. लखनऊ के सेवायोजन अधिकारी पी. के. पुंडीर भी स्वीकारते हैं कि बेरोजगारी भत्ते के आवेदनकर्ताओं ने फार्म के साथ जो कागजात लगाए हैं फिलहाल उन्हें 'क्रॉसचेक' करने की कोई व्यवस्था नहीं है.
हालांकि सरकार ने बेरोजगारी भत्ते के आवेदनकर्ताओं में किसी प्रकार की धांधली होने से रोकने के लिए इनसे काम लेने की रणनीति बनाई है. श्रम एवं सेवायोजन प्रमुख सचिव शैलेश कृष्ण बताते हैं, ''इससे केवल वही बेरोजगार भत्ते के लिए आवेदन करेंगे जो वास्तविकता में कहीं और काम नहीं कर रहे हों.''
बेरोजगारों से काम लेने के सरकार के निर्णय का खासा विरोध हो रहा है. कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर कहते हैं, ''भत्ते की एवज में बेरोजगारों से काम लेना किसी भी हिसाब से जायज नहीं है.'' बेरोजगारी भत्ते के प्रारूप को लेकर बीएसपी एसपी सरकार पर सबसे ज्यादा हमलावर है.
पार्टी विधानमंडल दल के नेता और नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं, ''एसपी ने युवाओं और बेरोजगारों को गुमराह किया है. उनका मजाक उड़ाया है. कोई भी शिक्षित युवक बेरोजगार हो सकता है. इसके लिए उम्र की सीमा निर्धारित करना तर्कसंगत नहीं है. सरकार उन्हीं बेरोजगारों को भत्ता देगी जिनका रजिस्ट्रेशन 31 अगस्त तक होगा, क्या इसके बाद बेरोजगारी खत्म हो जाएगी?''

