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नोट के बदले वोट: जुबान खोलेंगे अमर सिंह?

अगर वे जुबान खोलने के लिए तैयार हुए तो अमर सिंह यूपीए के लिए समस्याएं पैदा कर सकते हैं, जिसकी उन्होंने 28 जुलाई, 2008 के अविश्वास प्रस्ताव से पार पाने में मदद की थी.

अमर सिंह
अमर सिंह
अपडेटेड 10 सितंबर , 2011

सन्‌ 2008 के कैश-फॉर-वोट स्कैंडल के मामले में 7 सितंबर को अमर सिंह और भाजपा के दो पूर्व सांसदों फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर सिंह भगौरा को 13 दिन की न्यायिक हिरासत पर भेजने के कुछ ही क्षण बाद विशेष न्यायाधीश संगीता ढींगरा सहगल ने दिल्ली पुलिस के वकील से अन्य दो अभियुक्तों के बारे में पूछा.

इनमें से एक हैं भाजपा सांसद अशोक अर्गल, जो अभी तक शिकंजे से इस कारण बाहर बने रहने में सफल रहे हैं कि लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार से उनकी गिरफ्तारी की इजाजत नहीं मिली है.

दूसरे, वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सहयोगी सुधींद्र कुलकर्णी अभी तक-दिल्ली और मुंबई दोनों जगह-आठ सम्मनों की अनदेखी कर चुके हैं और आखिरकार अपने वकील के जरिए उन्होंने अदालत को सूचित किया कि वे अमेरिका में हैं.

न्यायाधीश इससे संतुष्ट नहीं दिखीं. वे 19 सितंबर को अगली सुनवाई में दोनों को अदालत में पेश देखना चाहती हैं. 15 अगस्त को इंडिया टुडे की आवरण कथा में बताया गया है कि अमर सिंह किस तरह पूछताछ से बच गए. इस कांड की जांच कर रही संसदीय समिति ने राज्‍यसभा के एक सदस्य से पूछताछ करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उसे लगता था कि इसकी प्रक्रिया ज्‍यादा  'झंझ्ट वाली' है. इसकी वजह से दिल्ली पुलिस भी अमर सिंह को लेकर सुस्त हो गई.

अब सारी निगाहें अमर सिंह पर हैं. उन्होंने जुबान खोल दी तो यूपीए के लिए समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जिसे अमर सिंह ने 28 जुलाई, 2008 के अविश्वास प्रस्ताव से पार पाने में मदद की थी. दिल्ली में सबसे बड़ा खुला रहस्य है यह कि वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं.

अविश्वास प्रस्ताव उस समय आया था, जब मुलायम सिंह यादव सत्ता से बाहर थे और पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले अमर सिंह समाजवादी पार्टी को राजनैतिक अखाड़े में प्रासंगिक बनाए रखने पर आमादा थे.

वे उत्तर प्रदेश का चुनाव कांग्रेस के साथ गठबंधन करके लड़ना चाहते थे, पर यह चाल अंततः नाकाम रही. तीन साल बाद, यह घोटाला और इसके कई अनुत्तरित सवाल, अब लंबे मुकदमों की दिशा में बढ़ते नजर आ रहे हैं, क्योंकि कोई नहीं जानता कि अमर सिंह चुप बने रहने के लिए क्या मांगेंगे.

फिलहाल एक निजी थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के मुंबई चैप्टर के प्रमुख कुलकर्णी के बारे में उम्मीद है कि वे अगले सप्ताह लौट आएंगे और पुलिस के सामने पेश होंगे. दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ''उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.'' इस मामले का भंडाफोड़ करने वाले की भूमिका अपनाने वाले कुलकर्णी को पुलिस ने यूपीए-1 सरकार के खिलाफ वोट डालने से गैरहाजिर रहने के लिए भाजपा के तीन सांसदों को घूस देने के मामले में मुख्य षड्यंत्रकारी करार दिया है.

दिल्ली पुलिस के आरोप पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं से संपर्क करने, उन्हें उकसाने और जाल में फंसाने के सारे अभियान की योजना कुलकर्णी के घर पर एक अन्य अभियुक्त सुहैल हिंदुस्तानी के साथ मिलकर रची गई.

आरोप पत्र में कहा गया है कि ''हिंदुस्तानी और कुलकर्णी की कोशिश कामयाब हुई और अमर सिंह विश्वास प्रस्ताव पर गैरहाजिर रहने के लिए भाजपा के हरेक सांसद को 3 करोड़ रु. देने के लिए राजी हो गए.''

अभी दिल्ली में ही मौजूद अर्गल उलटे कांग्रेस पर दिल्ली पुलिस को और इस तरह आरोप पत्र को प्रभावित करने का आरोप लगा रहे हैं. कुलस्ते और भगौरा के साथ अर्गल को कथित रूप से 2008 के मत विभाजन के दौरान कांग्रेस के पक्ष में मतदान के लिए घूस देने के लिए खोजा गया था और उन्होंने इस घटनाक्रम को रिकॉर्ड करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन करने में मदद की.

वे कहते हैं, ''हम अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं, पर यह फैसला पुलिस के दाखिल आरोप पत्र पर आधारित है. आरोप पत्र हमें भ्रष्ट साबित करता है. अगर हम भ्रष्ट होते तो नोटों को संसद में दिखाने के लिए टीवी कैमरे न लाए होते.'' वे यह भी कहते हैं, ''यह कांग्रेस ने करवाया है. पुलिस तीन साल तक चुप क्यों रही और अब उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई क्यों की? इस ऑपरेशन में शामिल रहे मीडिया घराने को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया?''

सात लोगों को आरोपी बनाया गया है. अमर सिंह को तिहाड़ में संगत देने के लिए पूर्व सहयोगी संजीव सक्सेना, कुलस्ते, भगौरा और हिंदुस्तानी मिलेंगे, जिसकी बहुत जरूरत भी थी.

जेल की गाड़ी में सवार होने के पहले अमर सिंह ने अपनी अंगूठियां उतार लीं, जिनमें एक वह रत्नजड़ित अंगूठी भी थी, जो दुर्भाग्य से बचाने के लिए थी. रुद्राक्ष और एक पवित्र धागा उन्होंने रहने दिया जो उनके दाहिने हाथ में बंधा था. उन्होंने कुछ फोन किए और अपने समर्थकों को दिलासा दिया कि वे आरोपी हैं, अभी मुजरिम नहीं.

कांग्रेस ने इस मामले से दूर रहने की कोशिश की है और जोर दिया है कि इस मामले में गिरफ्तारियां सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में चल रही जांच की परिणति हैं. पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ''ये गिरफ्तारियां सुप्रीम कोर्ट की बेहद नजदीकी देखरेख में चली पड़ताल के पूरे होने पर की गई हैं.''

इस बीच कयास लगाए गए कि क्या अमर सिंह की गिरफ्तारी जांच को सरकार के द्वार तक ले जाएगी, क्योंकि इस घटनाक्रम से आखिरकार फायदा लाभ यूपीए का ही हुआ था. और अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के समय अमर सिंह कांग्रेस की ही सहयोगी समाजवादी पार्टी में थे.

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