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उत्तर प्रदेशः गाड़ियां हुईं लॉक, डाउन हुआ प्रदूषण

लॉकडाउन की स्थिति में अर्थव्यवस्था पर चाहे कितना बुरा असर पड़ा हो, पर उत्तर प्रदेश में पर्यावरण पर इसका सकारात्मक असर दिखने लगा है

फोटोः मनीष अग्निहोत्री
फोटोः मनीष अग्निहोत्री
अपडेटेड 2 अप्रैल , 2020

कोरोना संकट के चलते हर तरफ लॉकडाउन है. तमाम बुरी खबरों के बीच इसका असर कम से कम पर्यावरण पर सकारात्मक रूप से दिखने लगा है. उत्तर प्रदेश के कई शहरों में वायु की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं. इन आंकड़ों के अनुसार, लॉकडाउन लागू होने के एक दिन पहले 24 मार्च को लखनऊ का “एयर क्वालिटी इंडेस्क” (एक्यूआइ) 204 था वह 31 मार्च को 80 के भी नीचे पहुंच गया था.

इसी प्रकार ग्रेटर नोएडा का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 178 से घटकर 90 के नीचे आ गया है. राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन जे. पी. एस. राठौर बताते हैं, "सड़कों पर गाड़ियां पूरी तरह से नदारद हैं. उद्योग भी बंद हैं. यही स्थिति यूपी के आसपास के प्रदेशों में भी है. लॉकडाउन के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश हुई है. इसका पाजिटिव असर हवा की गुणवत्ता में सुधार के रूप में दिखाई देने लगा है."

कानपुर शहर को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2018 में विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार किया था. यहां भी एयर क्वॉलिटी इंडेक्स लॉकडाउन के दौरान 50 से नीचे जा चुका है.

कुंभ नगरी प्रयागराज में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 38 पर पहुंच गया है जो बीते एक दशक का सबसे कम आंकड़ा है. इसी प्रकार यूपी के मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर जिले जिनका नाम वर्ष 2019 में प्रदेश के सबसे प्रदूषित शहरों में आया था जहां हवा की गुणवत्ता सबसे खराब थी. यहां भी पहली बाद एयरक्वालिटी इंडेक्स अपने न्यूनतम स्तर पर है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में बीते एक सप्ताह के एक्यूआइ के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो वह 100 से 50 माइक्रोग्राम घनमीटर के बीच सिमट कर रह गया है, जबकि लॉकडाउन से पहले यह आंकड़ा ज्यादातर 200 के करीब रहता था.

गोरखपुर इन्वायरमेंटल एक्शन ग्रुप की ओर से पर्यावरण की वर्तमान स्थिति पर अध्ययन करने वाले मौसम विशेषज्ञ और पर्यावरणविद् कैलाश पांडेय बताते हैं कि आमतौर होली के बाद धूल भरी हवाओं के चलते एक्यूआइ बढ़ता है लेकिन इस बार यह स्थिति नहीं है.

गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष और पर्यावरणविद् प्रो. शांतनु रस्तोगी का कहना है कि गोरखपुर शहर और इसके आसपास के क्षेत्र के वातावरण में पिछले कुछ वर्षो में ब्लैक कार्बन की मात्रा तेजी से बढ़ी है. इसकी बड़ी वजह वाहनों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी है. चूंकि लॉकडाउन की वजह से वाहन नहीं चले हैं, इसलिए एक्यूआइ नियंत्रण में आ गया है.

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