scorecardresearch

शख्सियत: समर्पण, सेवाकार्य, सियासत और स्वतंत्रदेव

लॉकडाउन में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने कभी एनरायड फोन न उपयोग करने के बावजूद संपर्क के डिजिटल तौर तरीके सीखे और भाजपा कार्यकर्ताओं को सेवाकार्य के लिए प्रेरित किया.

स्वतंत्रदेव सिंह
स्वतंत्रदेव सिंह
अपडेटेड 23 मई , 2020

जो शख्स एनरायड फोन का उपयोग नहीं करता हो, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बारे में केवल सुन ही रखा हो, उसके सामने अगर दूसरों से संपर्क के लिए केवल सोशल मीडिया प्लेटफार्म, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की शर्त आ जाए तो परेशान होना लाजमी है. ऐसा ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह के साथ हुआ. ये मार्च के अंतिम हफ्ते में कार्यकताओं के साथ सीधे संवाद करने के लिए बैठकों की रूपरेखा बना चुके थे कि कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन लागू हो गया. सब कुछ बंद हो गया. स्वतंत्रदेव भी लखनऊ के गौतमपल्ली स्थित अपने सरकारी आवास में कैद हो गए.

शुरुआत में तो इन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि राजनीति और सेवाकार्य कैसे किया जाए? स्वतंत्रदेव इसी उधेड़बुन में लगे थे कि इसी बीच भाजपा के आइटी प्रकोष्ठ की एक टीम ने इनके आवास पर संगठन की तरफ भेजी गई 60 इंच की टीवी, कैमरा, माइक और वाइफाइ ‘इंस्टाल’ कर दिया. आइटी प्रकोष्ठ के कार्यकर्ता लगातार दो दिन स्वतंत्रदेव सिंह के साथ रहकर इन्हें जूम सॉफ्टवेयर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करना, आडियो ब्रिज का उपयोग करके कार्यकताओं से संवाद करने का बकायदा प्रशिक्षण दिया. स्वतंत्रदेव ने भी पूरे समर्पण के साथ एक छात्र की भांति लॉकडाउन में संचार के इन तौर-तरीकों की एक-एक बारीकियां सीखीं. लॉकडाउन के एक हफ्ते के भीतर स्वतंत्रदेव ने संचार के इन नए तौर-तरीकों पर पूरा कमांड कर लिया. आज आडियो ब्रिज, वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान आने वाली छोटी तकनीकी खामियों को ये खुद की ठीक कर लेते हैं.

स्वतंत्रदेव ने 31 मार्च को पहली बार मंडल प्रभारियों के साथ आडियो ब्रिज के जरिए संवाद किया. छह अप्रैल को भाजपा के विधायकों और सांसदों के साथ पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संपर्क किया. यह क्रम रोज नियमित चलने लगा और रोज सुबह पांच से उठने के बाद स्वतंत्रदेव अखबार पढ़ने के साथ ही अपने कार्यकर्ताओं को फोन करके उनका हालचाल पूछते हैं. हर शाम को यह अपनी डायरी में उन कार्यकर्ताओं के नाम नोट कर लेते हैं जिन्हें किसी प्रकार की समस्या है. सुबह पांच बजे से लेकर सात बजे तक स्वतंत्रदेव अखबार पर नजरें गड़ाए और कान में फोन चिपकाए कार्यकताओं का हालचाल लेते हैँ. लॉकडाउन में परिवार में कोई बीमार है, किसी को सेवाकार्य करने में कोई दिक्कत है, स्वतंत्रदेव तुरंत स्थानीय विधायक या संगठन के पदाधिकारियों को कार्यकर्ता की मदद के लिए भेजते हैं.

दो दिन बाद फिर कार्यकर्ता को फोन कर वे पूछते हैं कि उसकी समस्या का निदान हुआ कि नहीं. सुबह ठीक सात से आठ बजे तक ये अपना फोन अलग रख देते हैं. स्वतंत्रदेव का यह एक घंटा सूर्यनमस्कार और योग करते बीतता है. स्नान आदि करने के बाद पूजा पर बैठ जाते हैं. स्वतंत्रदेव ने “सीताराम” की सवा लाख माला और “ओम नम: भगवती” की 25 हजार माला जप का प्रण लिया था, लॉकडाउन में भी यह संकल्प निरंतर जारी है. रोज एक घंटे की एकाग्र पूजा के बाद स्वतंत्रदेव की अंगुलियां आइपैड पर थिरकने लगती हैं. यह व्हाट्सऐप के जरिए पार्टी नेताओं से संवाद करते हैं.

प्रदेश में हो रहे भाजपा कार्यकर्ताओं के सेवा कार्य की एक ‘कंपाइल्ड’ रिपोर्ट रोज व्हाट्सएप के जरिए स्वतंत्रदेव के पास पहुंचती है. यह इस रिपोर्ट का अध्ययन कर ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करते हैँ जहां कार्यक्रम को और गति देने की आवश्यकता है. व्हाट्सऐप पर ही स्वतंत्रदेव अपना निर्देश सबको भेज देते हैं. पूर्वान्ह साढ़े ग्यारह बजे भोजन करने के बाद यह दोपहर ठीक 12 बजे वीडियो कांफ्रेंसिंग पर बैठ जाते हैं. इसके लिए इनके सरकारी आवास में एक कक्ष में पूरा सिस्टम ‘इंस्टाल’ है. देखने में यह कक्ष भाजपा का कमांड सेंटर जैसा मालूम होता है. यहां पर शाम सात बजे तक स्वतंत्रदेव कई चरणों में पार्टी के अलग-अलग नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद करते हैं.

अब तक प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अलग-अलग लोगों के साथ सौ से अधिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर चुके हैं. इस दौरान इन्होंने एक-एक करके यूपी के मंडल प्रभारी, मंडल अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, क्षेत्र के पदाधिकारी, प्रदेश के पदाधिकारी, सभी मोर्चोँ और प्रकोष्ठों की की टीम, सेक्टर संयोजक, सेक्टर प्रभारी और बूथ के अध्यक्ष तक संगठन की सभी संरचना को न केवल डिजिटल प्लेटफार्म पर सक्रिय किया बल्कि लॉकडाउन के दौरान कार्यकर्ताओं को सेवा कार्य के लिए भी प्रेरित किया. स्वतंत्रदेव सिंह के आइपैड पर आई जानकारी के मुताबिक यूपी में भाजपा कार्यकर्ता अबतक तीन करोड़ से अधिक लोगों को भोजन मुहैया करा चुके हैं.

मई में जैसे ही प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में यूपी पहुंचने लगे स्वतंत्रदेव ने फौरन भाजपा कार्यकर्ताओं को एक अभियान चलाकर इनकी मदद करने का निर्देश दिया. सत्तू, लैया-चना, गुड़-चना, खीरा, तरबूज से लेकर मास्क, जूता, चप्पल जो भी कार्यकर्ताओं के पास था उसे प्रवासी मजदूरों के बीच बांटने का आह्वान किया. लॉकडाउन में भाजपा कार्यकर्ताओं को सेवा कार्य में लगाए रखने के साथ ही स्वतंत्रदेव ने पार्टी संगठन को भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए सेक्टर और बूथ प्रभारी की संरचना को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है.

कोरोना संकट के चलते गांव लौटे प्रवासी मजदूरों की लामबंदी पर भी प्रदेश भाजपा ने नजरें गड़ा दी हैं. स्वतंत्रदेव ने सभी बूथ प्रभारियों और अध्यक्षों को इन प्रवासी मजदूरों की निगरानी और देखभाल करने के निर्देश दिए हैं. ग्रामीण इलाकों में चल रही सरकारी योजनाओं का लाभ हर हाल में इन पात्र प्रवासी मजदूरों को भी मिले, इसके लिए भी भाजपा कार्यकर्ताओं को प्रयास करते रहने को कहा गया है.

पार्टी संगठन पर मजबूत पकड़ रखने वाले स्वतंत्रदेव मूलरूप से मिर्जापुर में जमालपुर के ओरी गांव के रहने वाले हैं. पिताजी खेती करते थे. तीन भाईयों में सबसे छोटे स्वतंत्रदेव ने गांव के स्कूल में ही कक्षा आठ तक की पढ़ाई करने के बाद यह वर्ष 1980 में बुंदेलखंड के कालपी चले आए. यहां इनके बड़े भाई श्रीपत सिंह पुलिस विभाग में कार्यरत थे. यहां के एमएसवी इंटरकालेज में पढ़ाई करने के बाद इन्होंने उरई के डीडीसी डिग्री कालेज में बायोलाजी से ग्रेजुएशन किया. इसके बाद से यह उरई के होकर रह गए. भले ही इनका पैतृक घर मिर्जापुर में हो लेकिन इनकी कर्मभूमि बुंदेलखंड ही रही.

उरई में ग्रेजुएशन करने के दौरान वर्ष 1986 में एनसीसी में अपने एक मित्र के जरिए स्वतंत्रदेव सिंह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संपर्क में आए. इन्होंने संघ की शाखा में हिस्सा लेना शुरू किया. इसके बाद इन्होंने संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष नागपुर तक किया. वर्ष 1988 में यह विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री बने. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से वापस आने के बाद स्वतंत्रदेव सिंह ने कुछ समय पत्रकारिता भी की. वर्ष 1990 में यह उरई जिले में समाचार पत्र स्वतंत्र भारत के जिला प्रभारी नियुक्त हुए थे. भाजपा में इनकी पहली नियुक्ति वर्ष 1991 में युवा मोर्चा के बुंदेलखंड प्रभारी और इसके बाद कानपुर प्रभारी के रूप में हुई. इसके बाद जब दिनेश शर्मा प्रदेश युवा मोर्चा के अध्यक्ष थे तो स्वतंत्रदेव को महामंत्री बनाया गया. इसके बाद विनोद पांडेय के अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान भी यह युवा मोर्चा के महामंत्री बने.

वर्ष 2000 में स्वतंत्रदेव भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने. इसके बाद इन्होंने आगरा में एक लाख नौजवानों का एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय अधिवेशन कराकर अपनी संगठनात्मक क्षमता जाहिर कर दी थी. इस अधिवेशन तत्कालीन भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवराज सिंह ने शिरकत की थी. संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए भाजपा संगठन ने वर्ष 2004 में स्वतंत्रदेव को प्रदेश भाजपा का महामंत्री बनाने के साथ इन्हें विधान परिषद में भेजा. वर्ष 2010 से दो वर्ष तक यह भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे और इसके बाद फिर महामंत्री बने. स्वतंत्रेदव की कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह यूपी में हुई सभी रैलियों, यात्राओं या अभियान के प्रभारी या सह प्रभारी रहे हैं.

वर्ष 2009 में यह लाल कृष्ण आडवाणी की यूपी में हुई रैलियों के प्रभारी थे. वर्ष 2012 में यह भाजपा की विजय संकल्प यात्रा के प्रभारी और दो वर्ष बाद वर्ष 2014 में इन्होंने वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूपी में हुई रैलियों के प्रभारी का दायित्व संभाला था. वर्ष 2017 में यूपी में भाजपा की सरकार बनने पर स्वतंत्रदेव राज्यमंत्री स्वतंत्रप्रभार के रूप में प्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल हुए और पार्टी ने इन्हें एमएलएसी बनाकर विधान परिषद भी भेजा. स्वतंत्रदेव सिंह इकलौते नेता हैं जो जब से भाजपा में आए तब से ऐसा कोई दिन नहीं गया जब ये बगैर पद के सोए हों. यह भी बहुत कम लोग जानते हैं कि स्वतंत्रदेव सिंह का घरेलू नाम कांग्रेस सिंह था. जब यह संघ के संपर्क में आए तब इन्हें एक नया नाम स्वतंत्रदेव मिला.

***

Advertisement
Advertisement