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यूआईडी-एनपीआर विवाद: घर में ही टकराव

आधार कार्ड पर कैबिनट सचिव को लिखी गृह मंत्रालय की एक चिट्ठी को लेकर सरकार के भीतर मतभेद उजागर.

अपडेटेड 29 जनवरी , 2012

गृह मंत्री पी. चिदंबरम इस बात से इनकार कर रहे हैं कि यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआइडीएआइ) के मुद्दे पर योजना आयोग से कोई मतभेद है. लेकिन कैबिनेट सचिव अजित सेठ को लिखी गृह सचिव आर.के. सिंह की चिट्ठी से सरकार के दोनों विभागों के बीच टकराव की पुष्टि होती है. उसी का नतीजा है कि कैबिनेट ने इस मसले के हल होने तक यूआइडीएआइ नोट पर विचार-विमर्श को फिलहाल मुल्तवी कर दिया है. पहले इस पर 25 जनवरी को विचार होना था.

गृह सचिव ने 16 जनवरी को सेठ को लिखी चिट्ठी में साफ-साफ कहा है कि यूआइडीएआइ के कारण गृह मंत्रालय के नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) के काम में देरी हो रही है. आर.के. सिंह कहते हैं, ''एनपीआर से संबंधित मामलों पर यूआइडीएआइ के रवैए से एनपीआर के काम में देरी होगी.''

उनकी चिट्ठी से ऐसी विचित्र स्थिति का भी संकेत मिलता है जो योजना आयोग और गृह मंत्रालय दोनों में पैदा होने जा रही है. ये दोनों विभाग अपनी परियोजनाओं के लिए कैबिनेट का समथर्न मांग रहे हैं. योजना आयोग ने समूचे देश के लिए आंकड़े इकट्ठा करने के वास्ते इजाजत मांगी है. शुरू में केवल 20 करोड़ भारतीयों के बायोमेट्रिक पंजीकरण की इजाजत दी गई थी. योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. वे कहते हैं, ''मैं केवल इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि हम कैबिनेट को एक नोट भेज रहे हैं.''

गृह सचिव ने गृह मंत्रालय के प्रोजेक्ट को कैबिनेट में आगे बढ़ाने के लिए सेठ का समर्थन मांगा था. आर.के. सिंह कहते हैं, ''केंद्रीय गृह मंत्री ने इच्छा व्यक्त की है कि मामले को जल्दी से जल्दी कैबिनेट के पास भेजा जाए ताकि राष्ट्रीय स्तर पर रेजिडेंट आइडेंटिटी (स्मार्ट) कार्ड प्रोजेक्ट जारी रखने या न रखने के बारे में स्पष्ट निर्देश मिल सके. यह प्रोजेक्ट तटवर्ती एनपीआर स्कीम प्रोजेक्ट में लागू किया जा रहा है. गृह मंत्रालय स्मार्ट कार्ड प्रोजेक्ट के सिलसिले में कैबिनेट को एक नोट भेज रहा है.''

गृह मंत्रालय के सूत्रों का दावा है कि उनके प्रोजेक्ट में जानबूझकर देरी की जा रही है और उसे कैबिनेट में रखने की इजाजत नहीं मिल रही है. इसलिए इसे कैबिनेट सचिव के सामने रखना मंत्रालय के लिए जरूरी हो गया था. गृह सचिव शिकायत करते हैं, ''रेजिडेंट आइडी कार्ड जारी करने के लिए ड्राफ्ट खर्च वित्तीय समिति के मेमो का मसौदा अगस्त, 2011 से रुका पड़ा है.''

रेजिडेंट आइडी कार्ड जारी करने के मुद्दे के अलावा, गृह मंत्रालय ने देश भर में एनपीआर के आंकड़े के लिए एक मेंटिनेंस और अपग्रेडिंग मैकव्निज्‍म बनाने का प्रस्ताव किया था. आर.के. सिंह ने अपनी चिट्ठी में लिखा था, ''अगर इन दोनों प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी गई तो एनपीआर प्रोजेक्ट के तहत इस साल 1,696 करोड़ रु. वापस करने पड़ सकते हैं.''

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