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श्रमिक स्पेशल ट्रेन या ऊंट के मुंह में जीरा

फंसे हुए मजदूरों की परिभाषा को लेकर राज्य और केंद्र सरकारों की अलग-अलग दलील हैं. राज्य सरकारे जहां अपने गृह राज्य से बाहर रहने वाले सभी मजदूरों को फंसा हुआ मान रही है वहीं केंद्र सरकार के दिशा निर्देश में फंसे हुए मजदूर सिर्फ वह हैं जो अपने घरों के लिए निकल पड़े हैं और राहत शिविरों में जिन्हे रोक कर रखा गया है.

फोटोः पीटीआइ
फोटोः पीटीआइ
अपडेटेड 5 मई , 2020

फंसे हुए मजदूरों की परिभाषा को लेकर राज्य और केंद्र सरकारों की अलग-अलग दलील हैं. राज्य सरकारे जहां अपने गृह राज्य से बाहर रहने वाले सभी मजदूरों को फंसा हुआ मान रही है वहीं केंद्र सरकार के दिशा निर्देश में फंसे हुए मजदूर सिर्फ वह हैं जो अपने घरों के लिए निकल पड़े हैं और राहत शिविरों में जिन्हे रोक कर रखा गया है.

गृह मंत्रालय ने इन फंसे हुए मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने की अनुमति तो दे दी है लेकिन मजदूरों की संख्या के लिहाज से यह नाकाफी साबित हो रहा है. रेल मंत्रालय. से मिली जानकारी के मुताबिक अभी तक 62 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया गया है और 13 और ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा. अर्थात कुल 75 ट्रेनों के जरिए लगभग 75 हजार मजदूर ही अपने घरों तक पहुंचेंगे.

जबकि श्रम मंत्रालय के अधिकारी अनौपचारिक रूप से यह बताते हैं कि राहत शिविरों में 20 लाख से अधिक मजदूर हैं. अर्थात 19 लाख से ज्यादा मजदूर अभी भी फंसे हुए हैं. राहत शिविरों में रहने वाले मजदूरों की यह संख्या 17 अप्रैल की है. इसके बाद का आंकड़ा श्रम मंत्रालय अभी जुटा रहा है.

रेलवे सूत्रों का कहना है कि जब तक राज्य सरकारें फंसे हुए मजदूरों का रजिस्ट्रेशन करा कर सूची नहीं सौंपती है तब तक ट्रेनों का परिचालन संभव नहीं है. सूची मिलने की रफ्तार धीमी है. इसलिए 5-6 से ज्यादा ट्रेन एक दिन में चलाना मुश्किल है. एक ट्रेन यदि 24 बोगी की है तो अधिकतम 1200 मजदूर ही जा सकते हैं.

कुछ मामलों में तो सिर्फ 800 मजदूरों को लेकर ही ट्रेनों का परिचालन किया गया है. इस लिहाज से देखा जाए तो एक दिन में औसतन 10000 मजदूर ही ट्रेनों के जरिए अपने घरों तक पहुंच पाएंगे. यदि मान लिया जाए कि लाक डाउन 17 मई तक जारी है और मजदूरों को भेजा जा रहा है तो 1 से 1.5 लाख और मजदूरों को ही भेजा जा सकता है. अर्थात बड़ी संख्या में मजदूर फिर भी अपने गृह राज्य नहीं जा पाएंगे.

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