किसी भी मां बाप के लिए दुनिया में सबसे खराब दिन वह होता है जब उन्हें पता चले कि उनकी औलाद को एक ऐसी बीमारी हो गई है जिसका दुनिया में अभी तक कोई पक्का इलाज नहीं है. क्या बीती होगी उन मां-बाप पर जब उन्हें पता चला होगा कि उनका वह बच्चा जिसने अभी तक अपना पहला जन्मदिन भी नहीं मनाया है, वह कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गया है. यूपी में बस्ती जिले के तुर्कलिया गांधी नगर के रहने वाले मोहम्मद आवेश और आयशा के पुत्र अरहान के साथ भी ऐसा ही हुआ.
कोविड-19 पॉजिटिव पाये जाने पर अरहान को 13 अप्रैल को जिला अस्पताल बस्ती में भर्ती कराया गया था. परिवार के किसी सदस्य ने पिछले पंद्रह दिनों में कहीं भी यात्रा नहीं की थी किंतु अरहान की मौसी में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी. इसी कारण पूरे परिवार की कोविड जांच कराई गई थी. आवेश और आयशा दोनों में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई थी. 14 अप्रैल को अरहान को बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया गया. यहां अरहान और उसके माता-पिता की दोबारा जांच की गई. दोबारा जांच में भी अरहान पॉजिटिव पाया गया.
अरहान को उसकी मां के साथ मेडिकल कालेज में कोविड आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया. इसके पश्चात मां आयशा को अरहान की देखभाल और सफाई रखने के बारे में डॉक्टरों ने समझाया. अरहान ऊपर से बोतल का दूध भी पीता था उसे सिर्फ स्तनपान कराने के लिए प्रेरित किया गया. केवल दो दिन में अरहान ने ऊपर का दूध पीना बंद कर दिया. बाल रोग विभाग में तैनात डाक्टरों ने इस दौरान अरहान के स्वास्थ्य को लेकर जांच जारी रखी.

14 अप्रैल को अरहान और उसके साथ रह रही उसकी मां की दोबारा कोविड जांच कराई गई तो दोनों की जांच निगेटिव आई. चौबीस घंटे बाद दोबारा जांच में अरहान फिर कोविड निगेटिव पाया गया. इसके बाद अरहान और उसकी मां को स्वस्थ्य घोषित कर 15 अप्रैल को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया.
दूसरी कहानी दस महीने के छोटे अब्दुल गनी की है. मुरादाबाद के मुगलपुरा इलाके में पेशे से टेलर मुख्तार अली की अकेली संतान अब्दुल गनी की जब कोविड की जांच हुई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई. हालांकि इस बच्चे की मां यास्मीन की जांच रिपोर्ट निगेटिव थी. पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर अब्दुल गनी को मां के साथ तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) कोविड अस्पताल में रेफर कर दिया गया.
21 अप्रैल को दोबारा पॉजिटिव रिपोर्ट आई. अब्दुल गनी की मां यास्मीन बताती हैं, “दो बार पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद मेरा दिल बैठ सा गया था. परंतु अस्पताल के डाक्टरों और चाक-चौबंद बंदोबस्त ने मेरा हौसला बनाए रखा. मुझे डाक्टरों पर यकीन था.” उनकी आंखों में खुशी के आंसू झलक जाते हैं जब यास्मीन उस दिन को याद करते हुए बताती हैं, “साझा परिवार के अब्दुल गनी का शुरू में आइसोलेशन वार्ड में मन नहीं लगा लेकिन बाद में मां के दुलार से 16 दिन बाद रविवार तीन मई को वह दिन आ ही गया जब उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई.”
दोबारा जांच में भी जब रिपोर्ट निगेटिव आई तो अब्दुल गनी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई. कोरोना की जंग जीतने वाले अब्दुल गनी और उसकी मां को अस्पताल के प्रशासनिक अफसरों और मेडिकल स्टाफ ने फूल बरसाकर और ताली बजाकर घर के लिए विदा किया. अस्पताल की ओर से अब्दुल गनी को उपहार में चॉकलेट भी दी गई. दरअसल यह दस माह के अब्दुल गनी की कोरोना की जंग जीतने का अवसर नहीं था बल्कि टीएमयू कोविड अस्पताल के लिए भी सुपर संडे था क्योंकि पहली बार इस अस्पताल में इतने छोटे मरीज का सफल इलाज हुआ था.

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में फिरोजाबाद से नौ माह के जियान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. मां बाप को जब पता चला कि जियान कोविड पॉजिटिव है तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. मन में इलाज को लेकर कई भ्रांतियां थीं. अस्पताल में कितने पैसे लगेंगे? मन में इन्हीं आशंकाओं से घिरे मां बाप ने 13 अप्रैल को भारी मन से जियान को अपेक्स मेडिकल कालेज एवं अस्पताल फिरोजाबाद में भर्ती कराया. करीब 20 दिन के मुफ्त इलाज के बाद जियान की दो कोविड रिपोर्ट निगेटिव आई और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
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