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पश्चिम बंगाल में भाजपा का तृणमूलीकरण

राज्य की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी भाजपा पूर्व टीएमसी नेताओं के भरोसे है जो तृणमूल से निपटने के तरीके बेहतर जानते हैं.

मारे गए पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भाजपा ने उत्तरी कोलकाता के बागबाजार घाट में 'शहीद तर्पण' आयोजित किया (एएनआइ)
मारे गए पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भाजपा ने उत्तरी कोलकाता के बागबाजार घाट में 'शहीद तर्पण' आयोजित किया (एएनआइ)
अपडेटेड 22 सितंबर , 2020

मुकुल रॉय, अर्जुन सिंह और निसिथ प्रमाणिक जैसे तृणमूल कांग्रेस के नेता जो या तो घोटालों के आरोपी हैं या अपने बाहुबल के लिए जाने-जाते हैं जब भाजपा में लिए गए तो भगवा पार्टी और इसके वैचारिक संगठन आरएसएस को कुछ ज्यादा सफाई देनी पड़ी थी. ये कदम पार्टी की उस उच्च नैतिकता वाले दावे के विपरीत है जिसका कि वह दावा करती है यानी दूसरों से अलग पार्टी. दिलीप घोष जैसे नेता वाल्मीकि का उदाहरण देकर इसे तर्कसंगत ठहराते हैं कि किस तरह वे एक लुटेरे से रामायण के लेखक बन गए. दलील ये है कि ये महत्व नहीं रखता कि आप कौन हैं और क्या रहे हैं, पार्टी आपको अपने में ढाल लेगी.  

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले जब भाजपा ने अपने दरवाजे दूसरी पार्टी और उसमें भी खासतौर पर तृणमूल कांग्रेस के विवादित नेताओं के लिए खोले तो पार्टी के नेताओं ने अपनी अंत:करण और आलोचनाओं को यह कहकर दरकिनार किया कि कोई भी इनसान पूरी तरह बुरा नहीं होता. उसकी संगत और पार्टी या संगठन जिससे वह जुड़ा है, उसके काम के लिए जिम्मेदार होती है. साथ ही भाजपा उनके अंदर के अच्छे इनसान को बाहर निकाल लेगी.  

लेकिन यह बदलाव अकेले नहीं बल्कि अपने बोरिया-बिस्तर के साथ आया और यह एकतरफा ट्रैफिक है भी नहीं. टीएमसी के बागी भगवा रंग में रंगे तो जरूर लेकिन अपने साथ टीएमसी संस्कृति के तत्वों को भी लेकर आए जो सचेतन या अचेतन रूप से भाजपा की कार्यसंस्कति में मिल गए और भाजपा ने भी इसे जारी रखा.  

अन्य वजहों के अलावा टीएमसी नेताओं को पार्टी में लेने का मुख्य मकसद ये था वे जानते हैं कि टीएमसी से कैसे लड़ना है क्योंकि वे उस पार्टी में रह चुके हैं. अगर विपक्ष के दांव-पेंच और तुच्छ नाटकीय हरकतें अपनाने में कुछ असहजता होती है तो भाजपा भी अपनी आपत्तियां और ऊंचे नैतिक आधार दरकिनार करने की इच्छा रखती है. ऐसी हरकतें ममता और उनकी ब्रिगेड की कार्यशैली का हिस्सा हैं. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब हम तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को ले रहे थे तो हमारा पहला लक्ष्य ये था कि आने वाला नेता पार्टी के लिए लोकसभा सीट जीतने की ताकत रखता हो. बाकी का काम (भाजपा परिवार में ढलना) बाद में हो जाएगा.

पार्टी ने इन नेताओं को खुला हाथ दिया जिससे अनेक लोग ये सोचने लगे कि क्या ये पार्टी तृणमूल के भ्रष्ट, दागदार और बागी नेताओं के पुनर्वास का अड्डा है. हालांकि पार्टी उस पुरानी कहावत पर भरोसा कर रही है कि चोर को पकड़ने के लिए चोर को तैनात करो. टीएमसी से जो विशेषताएं बंगाल भाजपा में आयात हुई हैं उनमें बंगाल के महापुरुषों को याद करना और उनकी जयंती-पुण्यतिथि मनाना भी शामिल है.

श्यामाप्रसाद मुखर्जी, विवेकानंद, दीनदयाल उपाध्याय, वीर सावरकर जैसे प्रसिद्ध नेताओं के अलावा भाजपा ने रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर और यहां तक कि कांग्रेस से प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री हुए बिधान चंद्र राय तक को श्रद्धांजलि दी. भाजपा ने जमीनी स्तर पर पकड़ बनाने के लिए स्थानीय नेताओं को रामनवमी, हनुमान जयंती, गणेश पूजा, शिवरात्रि जैसे पर्व मनाने की खुली छूट दी है. यहां तक कि बंगालियों के सबसे बड़े पर्व दुर्गापूजा में भी बड़े क्लबों के कुछ आयोजक और संरक्षक भाजपा नेता बने हैं. आमतौर पर इस क्षेत्र में टीएमसी और कांग्रेस नेताओं का एकाधिकार था.  

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कुछ वर्षों से पूजा आयोजकों को आर्थिक मदद देती आ रही हैं. पिछले साल उन्होंने 28,000 पूजा कम्युनिटी में से प्रत्येक को 25,000 रुपए देने का ऐलान किया जिससे राज्य के बजट पर 70 करोड़ का दबाव पड़ा. भाजपा भी ग्रामीण इलाकों में पूजा के लिए वित्तीय मदद दे रही है ताकि ये परंपरा जीवित रहे.

साथ साथ पार्टी खैरात के जरिये स्थानीय क्लबों को अपनी तरफ खींच रही है. टीएमसी सरकार प्रदेश के 15,000 क्लबों को 1 लाख रुपए से लेकर 2 लाख रुपए तक देती है. भाजपा ने छोटे क्लबों को खेल के सामान और ढांचे, जिम उपकरण देने के साथ दीन दयाल उपाध्याय फुटबाल टूर्नामेंट का शुरू किया है. मुकुल राय, निसिथ प्रमाणिक और सौमित्र खान जैसे नेता जनता की सहानुभूति लेने के लिए राजनीतिक शहीदों की शवयात्रा निकालने की परंपरा भी भाजपा में शुरू कर चुके हैं. राय जब तृणमूल में थे तब उन्होंने यही रणनीति वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ अपनाई थी. पार्टी कार्यकर्ताओं पर होने वाले प्रत्येक हमले को भाजपा मुद्दा बनाती है और मुख्य सड़कों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करना और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करती है. इसका मकसद ध्यान अपनी ओर खींचना, सुर्खियां बटोरना और सरकार को असहज करना है.

एक बार फिर ये मुकुल राय का ही आइडिया है कि टीएमसी के हाथों मारे गए नेताओं का शहीदी दिवस सभी भाजपा कार्यकर्ता मनाएं. ये रणनीति सीधे-सीधे टीएमसी की राजनीतिक किताब से ली गई है. सितंबर 2019 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने पश्चिम बंगाल का दौरा किया था और शहीद दिवस के मौके पर 80 उन भाजपा कार्यकर्ता का सामूहिक तर्पण (महालय) किया जिनकी जान चली गई थी. यहां तक के ‘दादा के बोलो’ कार्यक्रम भी ममता के ‘दीदी के बोलो’ कार्यक्रम की काट के तौर पर लाया गया है. शब्द बदलने से एकरूपता नहीं बदल जाती, लोगों को ये जानकर हैरान नहीं होना चाहिए कि टीएमसी और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.

अनुवादः मनीष दीक्षित

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