बस्ती में कोरोना पीड़ित एक युवक की गोरखपुर मेडिकल कालेज में हुई मौत के के तीसरे दिन दो अप्रैल को बस्ती के एक अन्य 21 वर्षीय युवक के कोरोना पाजिटव निकलने से पूर्वांचल में दहशत का माहौल है. उधर बिना ट्रेवल हिस्ट्री वाले बस्ती के युवक की कोरोना से मौत स्वास्थ्य विभाग के लिए पहेली बन गया है.
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया “यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि युवक को इन्फेक्शन कहां से हुआ. उन्होंने कहा कि यह ‘कम्युनिटी स्प्रेड’ का मामला नहीं है.”
कोरोना के अज्ञान सोर्स से गोरखपुर और इससे सटे पूर्वांचल के जिलों में दहशत का माहौल है. कई कोशिशों के बाद प्रशासन न तो बस्ती के मृत कोरोना पीड़ित मरीज की कोई “ट्रैवल हिस्ट्री’ पता लगा पाया है और न ही संक्रमण के संभावित ठिकानों का ही. इसकी सबसे बड़ी वजह कोरोना पीड़ित मरीज के परिजनों का असहयोग है.
बस्ती जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. ओ. पी. सिंह बताते हैं “जिस वक्त कोरोन का संदिग्ध मरीज भर्ती हुआ, उस दौरान उसकी हिस्ट्री परिजनों से ली गई, लेकिन कुछ भी नहीं बताया. फिलहाल इलाज करने वाले चिकित्सक व स्टाफ को क्वारंटाइन कर दिया गया है. सोल्जर वार्ड से लेकर इमरजेंसी वार्ड को सैनिटाइज करा दिया गया है.
जब संदिग्ध कोरोना मरीज भर्ती हुआ था, तो उस वक्त कोई अन्य मरीज उस वार्ड में भर्ती नहीं था.” परिजन प्रशासन को यह नहीं बता रहे हैं कि उनके जिस कोरोना पीड़ित मरीज की गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में मृत्यु हुई थी उसे यह बीमारी कहां से मिली? क्या वह कहीं बाहर से आया था या फिर किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आया था जिसे कोरोना की बीमारी थी. ऐसे में प्रशासन के सामने कोरोना का सोर्स ढूंढ़ना एक कठिन कार्य बन गया है.
वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञ इसे बड़ी चूक बता रहे हैं. गोरखपुर के वरिष्ठ चिकित्सक डा. एस. के. राय बताते हैं “कोरोना वायरस के संक्रमण की दर सबसे अधिक है. ऐसे में युवक लंबे कम्युनिटी ट्रांसमिशन से गुजरता हुआ आया होगा तो कईयों में वायरस के संक्रमण की आशंका है. जिसे तत्काल ढूंढ़ पाना संभव नहीं होगा.”
लखनऊ के कम्युनिटी हेल्थ विशेषज्ञ डॉ. अमर सिंह के अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमण का पता अब तो बीस दिन बाद पता चल रहा है. लखनऊ में ऐसे मामले आए हैं. ऐसे में कोरोना का सोर्स न पता चलने पर एक बड़ी आबादी के संक्रमण से ग्रसित होने की आशंका बन गई है.
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