प्रतियोगी परीक्षाओं में कम होते अवसर, इनके पूरा होने में लगने वाला ज्यादा समय और घर-परिवार की ओर से नौकरी के लिए बढ़ते दबाव से प्रतियोगी छात्र टूट जा रहे हैं. प्रयागराज के सलोरी में रहने वाले ऐसे ही एक छात्र 20 वर्षीय मनीष कुमार यादव ने 27 फरवरी को फांसी लगाकर जान दे दी. मनीष मूल रूप से गाजीपुर के मरदहा गांव का रहने वाला था. उसके पिता केदारनाथ यादव किसान हैं. वह करीब दो साल से कर्नलगंज में सलोरी स्थित प्रजापति लॉज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था. प्रयागराज शहर में 17 दिन के भीतर प्रतियोगी छात्र-छात्राओं की खुदकुशी का यह चौथा मामला है. आठ फरवरी को ओमगायत्री नगर में रहने वाली सरोज चौरसिया ने फांसी लगाकर जान दे दी थी. फैजाबाद निवासी यह छात्रा रेलवे व अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी. इसी तरह 23 फरवरी को भी दो छात्रों ने खुदकुशी कर ली थी. इनमें सलोरी में मौसम यादव 21 ने फांसी लगाकर तो शिवकुटी में विजय उर्फ राजकुमार 27 ने ट्रेन के आगे कूदकर जिंदगी खत्म कर ली थी. मौसम, पुत्र जीतनारायण यादव, मूल रूप से वाराणसी के गद्दोजपुर जंसा का रहने वाला था. सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करेन के बाद वह जेईई की तैयारी करने शहर आया था जबकि मूल रूप से फत्तेपुर नवाबगंज का रहने वाला राजकुमार उर्फ विजय, पुत्र हरिश्चंद्र कटरा, में रहता था.
प्रतियोगी संस्थाओं कर्मचारी चयन आयोग, उत्तर प्रदेश माध्यमिक सेवा चयन बोर्ड, उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग जैसी संस्थाओं के पूरा होने में तीन से चार वर्ष लग रहे हैं. कर्मचारी चयन आयोग की 2017 और 2018 की भर्ती तीन से चार वर्ष पूरे होने के बाद भी लंबित है. कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल भर्ती परीक्षा 2018 की प्रक्रिया तीन वर्ष से बड़े ही धीमी गति से चल रही है. 31 मार्च को लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद स्किल टेस्ट कराया जाएगा. इसका नतीजा आते-आते जून का महीना आ जाएगा. प्रदेश में वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद से उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड से कोई भी भर्ती घोषित नहीं हुई है. वर्ष 2016 की टीजीटी, प्रवक्ता भर्ती के लिए अभी तक चयन प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है. अक्तूबर 2020 में चयन बोर्ड की ओर से 15,508 पदों के लिए भर्ती करने की घोषणा हुई. भर्ती में विसंगति के चलते चयन बोर्ड ने इसे वापस ले लिया. इसके बाद किसी दूसरी भर्ती पर कोई निर्णय नहीं लिया जा चुका है.
प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले रमेश चौरसिया बताते हैं कि चयन संस्थाएं भर्ती प्रक्रियाओं को समय पर नहीं पूरा करा रही हैं, कई सारी परीक्षा प्रक्रियाओं पर गड़बड़ी का आरोप लगने के कारण ये कोर्ट में लंबित हैं. इसका खमियाजा प्रतियोगी छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. लंबी चयन प्रक्रिया के कारण प्रतियोगी छात्रों की उम्र बढ़ जाती है और वे नौकरी की रेस से बाहर हो जाते हैं. परीक्षाओं के दबाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों पर पुस्तक लिखने वाले अनूप मिश्र बताते हैं, “गांव व छोटे शहरों से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने बड़े शहर का रुख करने वाले प्रतियोगी छात्र काफी दबाव में होते हैं. इनमें ज्यादा तैयारी के खर्चे के लिए परिवार पर ही आश्रित रहते हैं. ऐसे में चयन न होने या असफलता मिलने पर यह आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं.” अनूप मिश्र की सलाह है कि जिन परिवारों के बच्चे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए बाहर हैं उनके अभिभावक निरंतर बच्चों से बात करते रहें और बच्चों पर पूरा भरोसा करें न कि उन्हें किसी खास पद पर चयनित होने का दबाव बनाएं.
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