डर
विमलचंद्र पांडेय
भारतीय ज्ञानपीठ, लोदी रोड,
नई दिल्ली-3,
कीमतः 150 रु.
परिवर्तनों पर गहरी पकड़ः विमलचंद्र पांडेय
नई सदी में नए कहानीकारों की एक लंबी फेहरिस्त है. उन रचनाकारों में से कुछेक महत्वपूर्ण नाम हैं जिन्होंने कथा साहित्य में अपनी पहचान बनाई है, कथ्य के साथ-साथ भाषा और शिल्प में काफी तोड़फोड़ की है, समय-समाज को सूक्ष्मता से देखने-परखने का सफल प्रयास किया है. विमलचंद्र पांडेय उन्हीं में से एक हैं. डर उनका पहला कहानी संग्रह है. इससे गुजरते हुए उनकी दृष्टि संपन्नता, वस्तुपरक ढंग से चीजों को रखने की क्षमता साफ जाहिर होती है.
संग्रह की सभी कहानियां समकालीन जीवन के किसी क्षण को कलात्मकता के साथ प्रस्तुत करती हैं. इनमें वस्तु और शिल्प का उचित समन्वय देखने को मिलता है. स्वेटर कहानी पीढ़ियों के अंतर्द्वंद्व को सामने लाती है. युवा कथावाचक ऑस्ट्रेलिया जा रहा है. मां, पिता की मनोदशा ऐसी है, मानो कलेजा निकलकर बाहर हो रहा है. वे पल-पल उस क्षण में उसके करीब रहना चाह रहे हैं और वह मित्रों के साथ है. पिता एयरपोर्ट तक जाना चाहते हैं लेकिन बेटा नहीं चाहता क्योंकि वहां गर्लफ्रेंड उसे विदा करने आने वाली है.
मन्नन राय गजब के आदमी हैं कहानी के माध्यम से पुराने और नए बनारस या कि पुराने-नए समय के बीच की दूरी को रेखांकित किया गया है. पहले कस्बों, छोटे शहरों में मन्नन राय जैसे निर्भीक, फक्कड़ चरित्रवान, निस्वार्थ व्यक्ति मिल जाते थे जो अघोषित रूप से अन्याय का विरोध करते थे. न कोई झंडा, न बैनर. बाद में उन्हें आहत भाव से बनारस ही छोड़ना पड़ता है.
डर कहानी संकेत करती है कि भूत-प्रेत, अजगर आदि का काल्पनिक भय असामाजिक तत्वों के भय से कम खतरनाक है. डर की चौदह वर्षीया लड़की जिन-जिन चीजों से डरती है, वही उसे पनाह देती हैं जबकि मनुष्य धोखा देता है. सिगरेट दो वृद्धों की कहानी है. दोनों किशोरावस्था से ही एक साथ सिगरेट पीते हैं. एक बूढ़े की मौत पर दूसरा महसूस करता है कि अब जीवन खत्म हो गया. एक दिन पार्क में वह दो लड़कों को सिगरेट पीते देखता है और महसूस करता है कि एक जीवन खत्म हो रहा है, तो दूसरा शुरू हो रहा है.
सोमनाथ का टाइम टेबल और एक शून्य शाश्वत महत्वपूर्ण कहानियां हैं. इनमें पांडेय की प्रतिभा और कथा कहने की सामर्थ्य का पता चलता है. कई छोटी-छोटी कहानियां दोनों ही कहानियों में एक साथ चलती हैं. सोमनाथ का टाइम टेबल किशोर बालक और सलोनी की प्रेम कहानी से शुरू होते हुए गुंडागर्दी और सांप्रदायिकता जैसे बड़े मुद्दों को स्पर्श करती है. एक शून्य शाश्वत में शाश्वत, सुनील, वाचक और मालविका बौद्धिक दृष्टिसंपन्न युवा नौकरी न मिलने पर एक जाल बुनते हैं. शाश्वत को योग गुरु के रूप में लांच किया जाता है. पैसों की बाढ़-सी आ जाती है. लेकिन एक गरीब बस्ती में शाश्वत के विचारों में परिवर्तन होने लगता है. पार्टनर सुनील और मालविका को यह अच्छा नहीं लगता. पूरी संपत्ति पर कब्जा कर शाश्वत को वे पागल घोषित कर देते हैं. यह कहानी धर्म, मीडिया और संपत्ति के पारस्परिक संबंधों को क्रूरतापूर्वक प्रस्तुत करती है.
सफर, उसके बादल और वह जो नहीं है कहानियां संवेदनशील विषयों पर लिखी गई हैं. सभी कहानियां पढ़ने के बाद पाठकीय टिप्पणी यही है कि विमलचंद्र पांडेय तीक्ष्ण दृष्टि से अपने चारों ओर होने वाले परिवर्तनों को लिपिबद्ध करने में सक्षम हैं. विभिन्न घटनाओं को कथा के एक सूत्र में पिरोने की अद्भुत क्षमता है उनमें. कहानीकार के पास समृद्ध भाषा और सधा हुआ शिल्प है.

