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झुग्गियों से छप्परफाड़ कमाई

भारत नगर, बांद्रा (पूर्व) में स्थित अपने घर के सामने कीचड़ में खड़े और कचरे के ऊंचे ढेर की ओर टकटकी लगाए शमशुजमा अंसारी उज्‍ज्‍वल भविष्य का सपना देख रहे हैं.

अपडेटेड 4 सितंबर , 2011

भारत नगर, बांद्रा (पूर्व) में स्थित अपने घर के सामने कीचड़ में खड़े और कचरे के ऊंचे ढेर की ओर टकटकी लगाए शमशुजमा अंसारी उज्‍ज्‍वल भविष्य का सपना देख रहे हैं. मुंबई के एक बिल्डर ने 225 वर्ग फुट की ईंट और सीमेंट की छत वाली उनकी झुग्गी को 1.25 करोड़ रु. में खरीदने का प्रस्ताव रखा है. 30 वर्षीय अंसारी की मोबाइल फोन और इसके साजो-सामान की दुकान है और इस झुग्गी में वे अपनी पत्नी और माता-पिता के साथ रहते हैं. अब अंसारी मुंबई के किसी उपनगर में फ्लैट खरीदने की और बाकी के पैसों को अपने व्यवसाय में लगाने की सोच रहे हैं.

अंसारी अकेले नहीं हैं जो रंक से राजा बने हैं या बनने वाले हैं. 2,400 झुग्गियों वाली झुग्गी बस्ती भारत नगर के कम-से-कम 800 झुग्गीवालों को रियल एस्टेट के दिग्गज एचडीआइएल से 80 लाख रु. से 1.45 करोड़ रु. तक मिले हैं (राज्‍य सरकार की झुग्गी पुनर्विकास योजना के तहत नजदीक ही बनी इमारत में 280 वर्ग फुट के फ्लैट की कीमत महज 35 लाख रु. है).

इनमें से ज्‍यादातर पश्चिमी उपनगरों नालासोपारा और भायंदर में अपने खुद के फ्लैटों में जा चुके हैं, जहां 300 वर्ग फुट के एक कमरे और रसोई वाले अपार्टमेंट की कीमत 15-18 लाख रु. के बीच है. बाकी पैसा घरों के आस-पास दुकानें खरीदने में निवेश किया गया है. लेकिन कुछ लोगों के लिए किस्मत का चमकना भी अच्छी खबर नहीं रही. पिछले 40 सालों से भारत नगर में रह रहीं 55 साल की खालिदा जो फ्लैट में रहने जा चुकी हैं कहती हैं, ''कई लोगों ने डांस बार या जुए में पैसे गंवा दिए. कुछ लोग बीमार पड़ गए क्योंकि झुग्गी से बाहर नहीं रह सकते. इलाज कराने पर उनका बहुत सारा पैसा खर्च हो गया.''

20 लाख वर्ग फुट में फैला भारत नगर पिछले 50 सालों में मीठी नदी के किनारों तक आ गया है. यह जमीन राज्‍य सरकार की थी जिसके लिए यहां के हरेक निवासी से हर महीने 55 रु. किराया लिया जाता था. 1995 से पहले बनी यहां की सभी झुग्गियों को नियमित कर दिया गया है इसलिए झुग्गी मालिक इन्हें बेच सकते हैं. सभी झुग्गियों में बिजली, टेलीविजन सेट तो हैं ही, कई झुग्गियों में तो फर्श पर टाइलें भी लगा दी गई हैं. भारत नगर इतनी मांग में इसलिए है क्योंकि यह व्यावसायिक केंद्र बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलैक्स (बीकेसी) को संभ्रात काला नगर से जोड़ता है. चूंकि बीकेसी में मौजूद खाली भूखंड निचले स्तर के कुर्ला इलाके के नजदीक है इसलिए बांद्रा के पास जमीन की मांग खरीदारों को भारत नगर खींच लाई है.

रियल एस्टेट का मूल्यांकन करने वाली कंपनी लियासेस फोरस के एमडी पंकज कपूर के मुताबिक डेवलपर झुग्गी वालों से बड़ी खुशी-खुशी जमीन खरीद रहे हैं. वे कहते हैं, ''भारत नगर में जमीन की कीमत इसके बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलैक्स के नजदीक होने से काफी ऊंची है. डेवलपर पैसा देकर जमीन ले रहे हैं और इसेएक पूरी परियोजना के नजरिए से देखा जाना चाहिए.''

नरीमन प्वाइंट के विकल्प के रूप में विकसित किया गया 370 हेक्टेयर के बीकेसी कारोबारी केंद्र में कई बैंक, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और भारत डायमंड बॉर्स (सर्राफा) हैं. भारत नगर में जमीन की कीमत अब 50,000 रु. प्रति वर्गफुट को छू रही है. एचडीआइएल ने यह जमीन गौतम अड़ानी समूह की ओर से खरीदी है, जिसने यहां पर अपने अधिकार में आ चुके भूखंडों पर व्यावसायिक केंद्र का निर्माण शुरू कर दिया है.

टाटा कॉलोनी में, जो 300 झुग्गियों की भारत नगर के नजदीक ही मौजूद एक अन्य झुग्गी बस्ती है, डीबी रियल्टी ने सभी तो नहीं लेकिन 65 झुग्गियां खरीद ली हैं. इसके लिए हरेक झुग्गी को 80 लाख रु. से लेकर 1 करोड़ रु. तक मिले हैं. डीबी रियल्टी ने 45 लाख रु. चेक के जरिए दिए हैं जबकि बाकी का पैसा नकदी में दिया है. यही नहीं, झुग्गी के मालिकों को पैसा निवेश करने और कर बचाने के संबंध में मार्गदर्शन देने के लिए एक निजी बैंक को भी तैनात किया गया है. फर्म की यहां व्यावसायिक कॉम्पलैक्स बनाने की योजना उस वक्त खटाई में पड़ गई जब इसके दो एमडी विनोद गोयनका और शाहिद बलवा को 2जी स्पैक्ट्रम मामले में जेल जाना पड़ा.

वर्ली के जीजामाता नगर में एक झेपड़ी की कीमत 45 लाख रु. है. डीबी रियल्टी और लोखंडवाला बिल्डर्स की नजर 68,400 वर्ग मीटर के इलाके में फैली इस झुग्गी बस्ती पर टिकी है. डीबी रियल्टी 16 करोड़ रु. खर्च कर पहले ही यहां की कई झुग्गियां खरीद चुकी है. झुग्गी समाज के अध्यक्ष दत्ता नावघाने कहते हैं, ''पुनर्विकास के बाद इस जमीन की कीमत एक लाख रु. प्रति वर्गफुट हो जाएगी और इसी वजह से वे करोड़ों रु. खर्च कर सकेंगे.'' वर्ली के महात्मा फुले नगर में एक बिल्डर हरेक झुग्गी के लिए 45 लाख रु. की पेशकश पहले ही कर चुका है.

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