बृहनमुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों के पहले शिवसेना ने विकास को अपना चुनावी मुद्दा बनाने का फैसला किया है. प्रवासियों की खबर लेने के अपने पुराने हथकंडे से पूरी तरह उलट.
4 जनवरी 2012: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
इस नीति के साथ पार्टी शहरी गरीबों तक पहुंचने की कोशिश करती नजर आ रही है.
अलग राह पकड़ चुके चचेरे भाई, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे पर बिना नाम लिए सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगाते हुए शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने इंडिया टुडे से कहा, ''हमारा एजेंडा भावनात्मक अपील के बजाए विकास होगा. बाकी लोग भावनात्मक मुद्दों के साथ लोगों का मनोरंजन करते हों तो करें, हम अपने विकास के एजेंडे पर कायम रहेंगे.''
28 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
नवी मुंबई के बाद बीएमसी देश का दूसरा सबसे मालदार नगर निगम है. पिछले 17 साल से इसका नियंत्रण शिवसेना के हाथों में है. इसके चुनाव फरवरी, 2012 में होने हैं. पूरे शहर में 250 होर्डिंग लगाए गए हैं, जिन पर नारा लिखा है-'करून देखावले'-मराठी में इसका अर्थ होता है-हमने कर के दिखाया.
21 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
स्थानीय अखबारों में पूरे पेज के विज्ञापन जारी किए गए हैं, जो शिवसेना के इतिहास में एक अभूतपूर्व कदम है.
14 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
उद्धव दावा करते हैं, ''हालांकि राज्य सरकार पूरी तरह गैर-मददगार है, हमने मुंबईकरों को बेहतर साफ-सफाई, पानी की आपूर्ति, स्वास्थ्यप्रद वातावरण, सस्ती बिजली, परिवहन और मनोरंजक पार्क दिए हैं. हमें इस आधार पर वोट मांगने का अधिकार है.''
उद्धव ठाकरे जिन उपलब्धियों का श्रेय लेते हैं, उनमें पानी की आपूर्ति के लिए 12.5 किमी लंबी टनल का निर्माण और स्कूली छात्रों के लिए वर्चुअल क्लासरूम कार्यक्रम शामिल हैं.
07 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
विश्लेषक हेमंत देसाई कहते हैं, ''जब से उद्धव ने कमान संभाली है, शिवसेना ने सड़कों पर झगड़ना बंद कर दिया है. उन्होंने एक अलग रास्ता चुना है. उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने कार्यकर्ताओं को कैसे जुटाते हैं.''.
हालांकि बीएमसी में विपक्ष के नेता कांग्रेस के राजहंस सिंह कहते हैं कि निगम की उपलब्धियों का श्रेय प्रशासन को मिलना चाहिए. वे कहते हैं, ''बीएमसी ने अच्छे प्रशासन के कारण काम करके दिखाया है. शिवसेना उस काम का श्रेय लेना चाहती है, जो दूसरों ने किया है.''.
वे इस आरोप को भी खारिज करते हैं कि राज्य सरकार ने सहयोग नहीं किया. उनके शब्दों में, ''मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण मुंबई से जुड़े मसलों पर बारीकी से नजर रखते हैं. वे शहर में ढांचागत परियोजनाओं के लिए ज्यादा पैसा आवंटित करवाने के लिए केंद्र सरकार के पीछे लगातार लगे हुए हैं.''.
इस बदली रणनीति से शिवसेना के कट्टर समर्थक सहमत नहीं हैं. उनका मानना है कि पार्टी की शक्ति पहचान की राजनीति में है. लेकिन उद्धव इससे विचलित नहीं हैं..
वे कहते हैं, ''मेरी रुचि लोगों का घर जलाने के बजाए उनके घरों का चूल्हा जलाने में है. अगर लोग विकास का मेरा एजेंडा स्वीकार नहीं करते हैं, तो यह उनके लिए नुकसानदेह होगा.''

