राम शेषाद्रि मुझे अपने जीवन में मिला सर्वश्रेष्ठ छात्र है, उस जैसे और छात्र सेंट स्टीफंस में आएं. स्टीफंस के छात्रों से यह कहना था 77 वर्षीय सी.एन.आर. राव का, जो भारत के प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के प्रमुख हैं. वे सेंट स्टीफंस कॉलेज में मार्च 2011 में अंतरराष्ट्रीय केमिस्ट्री वर्ष के समारोह में भाषण दे रहे थे.
1989 में सेंट स्टीफंस से केमिस्ट्री में बीएससी करने वाले 38 वर्षीय शेषाद्रि अब कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में बायोकेमिस्ट्रिी के प्रोफेसर हैं. दो पुराने टेनिस कोर्ट की जमीन बनाया गया सेंट स्टीफंस का साइंस विभाग पिछले 130 साल से शेषाद्रि जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को तैयार करता आ रहा है और यही बात इसे कुछ खास बना देती है.
भारत के बेस्ट साइंस कॉलेजों के इंडिया टुडे-नीलसन सर्वेक्षण में टॉप पर आया यह विभाग अपनी मामूली-सी शुरुआत के बाद से एक लंबा सफर तय कर चुका है. अगर शुरुआती दौर की बात करें तो इसे फंड के रूप में कुछ खास नहीं मिला करता था. लेकिन 2005 से 2010 तक दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर रहे दीपक पेंटल के कार्यकाल में उस समय इसकी किस्मत ने पलटी मारी जब विभाग को 2.5 करोड़ रु. का पहला भारी-भरकम अनुदान मिला.
इस अनुदान के नतीजे 2011 में नए सिरे से तैयार की गई चार मॉड्युलर साइंस लेबोरेटरीज, कैंपस में हाइ स्पीड वाइ-फाइ कनेक्टिविटी, 40 से अधिक सालाना फैकल्टी अनुसंधान परियोजनाएं और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, ब्राउन यूनिवर्सिटी, मैक्स प्लांक लेबोरेटरी और ओहायो यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से फैकल्टी के यहां आने के रूप में आज एकदम साफ दिखाई देते हैं.
कॉलेज के प्रिंसिपल वेल्सन थंपू जोर देकर कहते हैं, ''सेंट स्टीफंस के बारे में एक बात ऐसी है जिसे कोई अन्य कॉलेज कभी पछाड़ नहीं सकता. वह यह कि जिस यूनिवर्सिटी के बारे में आंकड़े बताते हैं कि क्लास से दूर रहने वाले शिक्षकों का आंकड़़ा 30 फीसदी है, वहीं स्टीफंस में फैकल्टी की उपस्थिति की दर शत-प्रतिशत है. मेरे सहकर्मियों ने अध्ययन के अपने क्षेत्र के लिए अपना सब कुछ झेंक दिया है. फैकल्टी मेंबर्स कक्षाओं के बाहर भी उपलब्ध रहते हैं और हर छात्र की बात समझने वाले गुरु के तौर पर बारीकी से काम करते हैं.''
स्टीफंस में 'साइंसवालों' के साइंसवाला बने रहने की वर्तमान दर 50 फीसदी से अधिक है, जो भारत में सबसे अधिक है. दूसरे शब्दों में, किसी भी बैच और किसी भी क्षेत्र के 50 फीसदी से अधिक छात्र दीर्घकालिक करियर के तौर पर साइंस को ही चुनते हैं.
डीन ऑफ एकेडमिक्स और केमिस्ट्री विभाग के प्रमुख 60 वर्षीय एस.वी. ईश्वरन कहते हैं, ''साइंस के क्षेत्र में यह एक बहुत बेहतरीन संख्या है. हमारे विभाग ने कु छ उल्लेखनीय वैज्ञानिक और अविष्कारक पैदा किए हैं. उदाहरण के लिए 1945 बैच के नित्यानंद ने सेंटक्रोमैन की खोज की. यह एक गर्भनिरोधक है, जो सहेली के नाम से भी जाना जाता है, और इसके बाद वे केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान के निदेशक बने.''
स्टीफंस की एक अनूठी विशेषता, जो साइंस के क्षेत्र में इस कॉलेज के शीर्ष स्थान को जायज साबित करती है, वह है वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रति समर्पण जिसे कैंपस पूरे साल निभाता है. कॉलेज ने छात्रों के लिए बंगलुरू के इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज और जवाहरलाल नेहरू डिग्री सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में 150 से अधिक ग्रीष्मकालीन रिसर्च प्रोजेक्ट उपलब्ध कराए हैं.
स्टीफंस में पिछले 40 साल से केमिस्ट्री पढ़ा रहे ईश्वरन कहते हैं, ''ये बायो-डाटा को चमकाने भर की कवायद नहीं है बल्कि असली वैज्ञानिक अध्ययन का अनुभव है. पिछले साल हमारे छात्रों में से एक सम्यक मित्तल ने कोलकाता के इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक शोध पत्र लिखा था, जो आंगेवांते केमी इंटरनेशनल एडीशन इंग्लिश में प्रकाशित हुआ था. न यह कोई छोटी उपलब्धि है और न ही यह कोई अलग-थलग सा उदाहरण है. हम भारत में एकमात्र ऐसे कॉलेज हैं, जो अंडरग्रेजुएट लेवल पर भी गंभीर रिसर्च को बढ़ावा देते हैं.''
दिल्ली विश्वविद्यालय ने 2011 से वैज्ञानिक शोध पर जोर देने की शुरुआत की है और इसका लाभ कॉलेज को हुआ है. दिल्ली विश्वविद्यालय ने जिन 118 रिसर्च प्रोजेक्टों को शैक्षणिक वर्ष 2012-13 के लिए मंजूरी दी है, उनमें से सात सेंट स्टीफंस को मिले हैं. इनमें से प्रत्येक प्रोजेक्ट को 10 लाख रु. दिए जाएंगे.
मुंबई का सेंट .जेवियर्स कॉलेज 2011 में 18वें स्थान पर था और इस बार उसने किसी जादूगर की तरह साइंस के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाते हुए दूसरा रैंक हासिल कर लिया है. सेंट .जेवियर्स के 45 वर्षीय वाइस प्रिंसिपल (साइंस) राजेंद्र शिंदे इस तरक्की के लिए कॉलेज के साइंस विभाग को मुंबई यूनिवर्सिटी द्वारा दी गई स्वायत्तता को आंशिक रूप से श्रेय देते हैं.
परंपरागत रूप से, 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर छात्रों की भर्ती यूनिवर्सिटी ही करती थी और उन्हें यूनिवर्सिटी के तहत आने वाले तमाम कॉलेजों के तमाम विभागों में बांट दिया जाता था. फिर भी 2011-12 में सेंट .जेवियर्स ने न सिर्फ छात्रों की भर्ती अपने आप की बल्कि वह विभिन्न विषयों में अपने सिलेबस के मसौदे पर भी काम कर रहा है.
शिंदे कहते हैं, ''हमने अपने साइंस विभाग को बेहतर बनाने पर पर्याप्त समय और संसाधन खर्च किए हैं. हमारी फैकल्टी, रिसर्च के काम और उपकरणों की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने हमें पैसा दिया है. हमने अपने रिसर्च जर्नल एक्सप्लोर का प्रकाशन भी शुरू किया है, जो अपने साथ के लोगों की समीक्षा करने वाली भारतीय शिक्षा जगत में अपनी तरह की पहली वैज्ञानिक पत्रिका है.''
सेंट .जेवियर्स में साइंस के छात्रों के लिए ढेर सारे विषय हैं, बेहतरीन लेबोरेटरीज हैं और उन्हें ब्लैटर हरबेरियम, इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च के लिए केअस लेबोरेटरी और नाडकर्णी-साकासा केमिस्ट्री रिसर्च लैबोरेटरी जैसे प्रसिद्ध अनुसंधान केंद्रों की एक विस्तृत श्रृंखला का लाभ मिलता है.
इस साल टॉप पांच में शामिल होने वाला एक और नया नाम है कोलकाता का प्रेसिडेंसी कॉलेज. 1817 में स्थापित यह कॉलेज लंबे समय तक केमिस्ट्री, ज्योलॉजी, बायोसाइंसेज और फिजिस्क के क्षेत्रों में शैक्षणिक उत्कृष्टता और बेहतरीन नतीजों के लिए जाना जाता रहा है.
कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज की वाइस चांसलर मालबिका सरकार कहती हैं, ''पिछले एक साल में, प्रेसिडेंसी कॉलेज ने साइंस के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण काम किए हैं. हमने बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के सोमक रायचौधरी जैसे कुछ बेमिसाल शिक्षाविदों को रखा है. दूसरा, पायलट रिसर्च प्रोजेक्टों के लिए हमारे क्लस्टर इनोवेशन सेंटर्स को प्रधानमंत्री कार्यालय ने भारत में अपनी तरह का पहला संस्थान माना है. इन प्रयासों से शैक्षणिक इनपुट की गुणवत्ता में वास्तव में सुधार हुआ है.''
लेकिन बात जब नंबर एक होने की आती है तो कोई कॉलेज छात्रों के जीवन स्तर, बुनियादी सुविधाओं, नई पहल और उपलब्ध सुविधाओं के पैमाने पर सेंट स्टीफंस से आगे नहीं निकल पाता है.
बीएससी केमिस्ट्री (ऑनर्स) की अंतिम वर्ष की छात्रा चंद्रिमा मजूमदार कहती हैं, ''कॉलेज की फैकल्टी ने हमेशा मुझे बेहतरीन तरीके से प्रेरित किया है. कॉलेज कैंपस के भीतर और बाहर छात्रों को मिलने वाला व्यावहारिक अनुभव मुझे बहुत पसंद है.''
बीस वर्ष की उम्र में आइआइटी-चेन्नै में रिसर्च करते हुए 'एप्लाइड ऑर्गेनोमैटेलिक केमिस्ट्री' पर एक एकेडमिक पेपर प्रकाशित करवा चुकीं मजूमदार की उपलब्धि सेंट स्टीफंस में मिलने वाले प्रोत्साहन और वहां के प्रगतिशील माहौल का एक हलफनामा है.

