बस एक शतक उन्हें एक और ऐसे रिकॉर्ड तक पहुंचा देता, जिसे तोड़ना किसी के लिए भी दुश्वार होता. सिर्फ एक और शतक उन्हें साल का सुर्खियों का सबसे बड़ा सरताज बना देता. क्रिकेट के देवता सचिन रमेश तेंडुलकर जब भी बल्लेबाजी करने के लिए मैदान में उतरे, उनके प्रशंसकों की फौज ने हर बार एक ही चीज चाही और उसी के लिए दुआ की है.
28 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
पर अफसोस कि वही न हुआ. और जब टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के लिए रवाना हो रही थी तो चेन्नै हवाई अड्डे पर एक तख्ती पर लिखा था, ''सचिन, अभी नहीं या कभी नहीं.'' संदेश से साफ जाहिर था कि उनके प्रशंसक कितने बेताब हैं और दुनिया के सबसे पूज्य क्रिकेटर से वे क्या चाहते हैं.
21 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
2011 में पूरे साल सचिन अपना वह सौवां शतक जमाने के लिए हरचंद कोशिश करते रहे, जिसे वे अपनी 'अंतिम इच्छा' बताते हैं. साल भर चले इंतजार ने प्रशंसकों को जैसे तोड़कर रख दिया. मौके आए और गए. मुंबई में विश्व कप के फाइनल में और फिर जुलाई में लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान भी वह मील का पत्थर गाड़ने में वे नाकाम रहे. मुल्क वापसी हुई तो हाल ही में वेस्ट इंडीज के साथ सीरीज में वे दो दफा पास पहुंचकर ठिठक गए.
सबसे नजदीकी मामला था मुंबई में झन्नाटेदार 94 रनों की पारी का. आयोजकों ने वहां पहले ही ऐलान कर रखा था कि सचिन ने वह उपलब्धि हासिल की तो उनके सम्मान में वे उनकी तस्वीर ढले सोने के सौ सिक्के बनवाएंगे.
14 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
बात सिर्फ एक शतक की नहीं थी. सीरीज में सफलता के साथ उन पर करीब 200 करोड़ रुपए का दांव था, जो सचिन के आठ ब्रांडों के प्रचार की कीमत है. सचिन के सौ शतकों की खास छाप वाले उत्पाद बिक्री के लिए तैयार हैं. करोड़ों के विज्ञापन अभियान भी इंतजार कर रहे हैं.
07 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज के प्रसारणकर्ता ईएसपीएन-स्टार स्पोर्ट्स उम्मीद कर रहे हैं कि यह काम ऑस्ट्रेलिया में हो जाए. उन्होंने पहले ही सीरीज का नाम अग्निपथ रख दिया है. खराब दौर से गुजर रही ऑस्ट्रेलियाई टीम ने सचिन के प्रशंसकों में जल्द ही जश्न मनाने की नई उम्मीदें जगा दी है.

