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आईपीएल-5: बादशाह की धमाकेदार जीत

लंबे समय तक सजावटी माल कहे जाने वाली कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम ने प्रेरक नेतृत्व और टीमवर्क के बूते आइपीएल-5 में जोरदार जीत के साथ अपनी हैसियत सबको जता दी है.

अपडेटेड 5 जून , 2012

फाइनल मैच यानी 27 मई से पहले की रात, कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के मालिकों में से एक शाहरुख खान ने अपनी टीम को ताज कोरोमंडल के कॉन्फ्रेंस रूम में रात 8.30 बजे पहुंचने को कहा. कुछ ही मिनटों में वे भी पहुंच गए. मार्च 2012 में नियुक्त हुए ऑस्ट्रेलियाई कोच ट्रेवर बेलिस ने जल्द ही रोल कॉल ली. 46 वर्षीय खान ने दाढ़ी नहीं बनाई थी और उनके बाल बिखरे थे. वे मेज के सामने खड़े हुए और बोले, ''मैं चाहता हूं कि आप अपने बारे में उन लोगों की सुनें जो आपको चाहते हैं. इसे सुनें और चैन से सोएं. सुबह नई जिंदगी होगी, जो एकदम बदली हुई होगी.''

बत्तियां मंद कर दी गईं और सपोर्ट स्टाफ के एक सदस्य ने आठ मिनट का एक वीडियो क्लिप चालू किया, जिसे खान ने जल्दबाजी में निर्देशित किया था और अपनी आवाज भी दी थी. खिलाड़ियों ने उसे हैरानी से देखा. सबसे पहले थे गौतम गंभीर के अभिभावक, जो अपने बेटे से कह रहे थे, ''हम जानते हैं, आखिरकार तुम्हारी जीत होगी, हम तुम्हारे साथ हैं.'' इसके बाद उनकी तस्वीरें धुंधली हो गईं और वहां जैक कैलिस की मंगेतर मॉडल शैमोन जार्डिम की तस्वीर उभर आई, जो बिल्कुल बॉलीवुड अंदाज में कह रही थीं, ''माइ लव, कल हमारी सगाई को एक नया अर्थ मिलेगा. तुम जीत जाओगे.''

यूसुफ पठान के माता-पिता ने अपने बेटे से कहा कि वह ऐसा कुछ करे, जिससे वे उस पर गर्व कर सकें. इसके बाद थे मनविंदर सुल्तान सिंह बिसला के पिता और हिसार के हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के रिटायर्ड अधिकारी सुल्तान. अटकती आवाज में उन्होंने कहा, ''हमने हमेशा तुम्हारा साथ दिया है, हमारी दुआएं चेन्नै में तुम तक पहुंच जाएंगी, तुम जीत जाओगे.''

गंभीर के पास अब हंसने का पूरा बहाना है और वे हंसते हुए याद करते हैं, ''इस वीडियो ने तनाव खत्म करने का काम किया'' 53 दिन के इस पूरे टूर्नामेंट में केकेआर के 29 वर्षीय कप्तान ने अपने खिलाड़ियों और अपनी टीम को अपनी प्राथमिकता बनाए रखा था. वे अकसर अपने खिलाड़ियों से कहते थे, ''सुर्खियों में रहना एक समस्या है. इससे दूर रहो, दूर रहो.''IPL

यह कवायद रंग लाई. लेकिन बदलाव की बयार 2011 में ही बहना शुरू हो गई थी. 2010 केकेआर के लिए सबसे खराब था. वह सभी टीमों में सबसे नीचे थी. अगले साल, खान और अन्य मालिक मुंबई के मेहता समूह के 51 वर्षीय जय मेहता ने टीम के सभी प्रमुख लोगों को बुलाया, जिनमें नए सीईओ वेंकी मैसूर, मार्केटिंग प्रमुख जॉय भट्टाचार्य और उस समय के कोच ऑस्ट्रेलियाई डेव व्हाटमोर शामिल थे. वे सब एक साथ मुंबई में खान के बंगले मन्नत में जुटे और 48 घंटे से ज्‍यादा समय तक सिर खपाते रहे.

खान बोले, ''नए सिरे से शुरुआत करो. मुश्किल और अप्रिय चुनौतियां स्वीकार करो. लेकिन क्रिकेट की जीत होने दो. सितारे भले ही चले जाएं, प्रशंसक बने रहने चाहिए. वे नहीं जाएंगे, मुझे भरोसा है.''

बंगलुरू में जनवरी 2011 में हुई नीलामी में मालिकों ने कप्तान सौरव गांगुली और लंबे शॉट लगाने वाले क्रिस गेल सहित बड़े सितारों को हटा दिया. उन्होंने बोली लगाने की प्रक्रिया शुरू होने के शुरुआती 30 मिनट में ही गंभीर, कैलिस, पठान और सुनील नारायण को लेने के लिए 50 लाख डॉलर (25 करोड़ रु.) खर्च कर डाले.

2012 के आइपीएल की नीलामी की तैयारी में गंभीर, खान और मेहता ने स्तर ऊंचा कर दिया. व्हाटमोर पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुके थे. श्रीलंका के पूर्व कप्तान सनत जयसूर्या से सकारात्मक रिपोर्ट मिलने के बाद केकेआर की तीन सदस्यीय टीम ने बेलिस से मुलाकात की.

बेलिस के आने के बाद दिसंबर 2011 में नकली नीलामी के जरिए उन लोगों ने आइपीएल-5 के लिए एक महीने तक तैयारी की. खान ने एक बात साफ कर दी थी-क्रिकेट से स्टार शब्द हटा दो. गंभीर इससे सहमत थे. फरवरी में बंगलुरू में हुई नीलामी में केकेआर ही ऐसी टीम थी जिसके मालिक मौजूद नहीं थे. खान चाहते थे कि उनका प्रतिनिधित्व मैनेजर्स करें.

फरवरी के दूसरे हफ्ते में कोलकाता में शुरू हुए 20 दिन के तैयारी कैम्प में इसका असर देखा जा सकता था. टीम में सुधार कैसे करें, टीम के साथी अकसर इस विषय पर अपने नोट्स हाथ से लिखकर होटल में कप्तान के कमरे में डाल जाते थे. शुरुआत अच्छी नहीं थी और डेल्ही डेयर डेविल्स और राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ टीम अपने पहले दो मैच हार गई. हल्का डिप्रेशन घर कर रहा था.

खान हमेशा टीम के साथ रहते थे. उसी कबीर खान की भूमिका में जो 2007 की सुपरहिट फिल्म चक दे! इंडिया में उन्होंने निभाई थी. वे सफलता और विफलता संबंधी जीवन की वास्तविक कहानियां सुनाते थे. बदलाव शुरू हो गया था. अच्छा प्रदर्शन न कर पाने वाले खिलाड़ियों के प्रति धैर्य रखते हुए गंभीर ने एक कप्तान के तौर पर मिसाल कायम की.

उन्होंने हर किसी का हौसला बढ़ाया. 21 लाख डॉलर (10.5 करोड़ रु.) में खरीदे गए यूसुफ पठान की तरह, जो सिर्फ एक बार चल सके. कु छ और भी कारण थे, जिन्होंने इस टीम की मदद की.

नारायण खूब चमके और उन्होंने केकेआर और मुंबई इंडियंस के बीच उनकी नीलामी को लेकर हुई कड़ी टक्कर को सही साबित कर दिया. जब उन्होंने प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट की ट्रॉफी उठाई तो उन्होंने सात लाख डॉलर (3.5 करोड़ रु.) की अपनी कीमत को सार्थक बना दिया. नौ लाख डॉलर (4.5 करोड़ रु.) की कीमत वाले ब्रेंडन मैकु लम ने 12 पारियों में एक हाफ सेंचुरी समेत 289 रन बनाए.

टीम के सभी खिलाड़ियों ने एक होकर काम करना शुरू कर दिया. यदि एक सदस्य पास के किसी चर्च में जाता था, तो लौटने के बाद वह कहता था कि उसने सभी के लिए प्रार्थना की थी. 2011 के बाद से टीम के गेंदबाजी कोच वसीम अकरम कहते हैं, ''हर किसी की प्रशंसा की जाती थी. उसकी, जिसने बड़ा स्कोर बनाया, उसकी, जिसने कई विकेट लिए, और उसकी जिसने बाउंड्री रोक कर 15 रन बचाए और खेल का पासा पलट दिया.'' फाइनल में लक्ष्मीपति बालाजी चोटिल हो गए और उनकी जगह ब्रेट ली ने ली.

गंभीर ने टीम को संतुलित करने के लिए विकेटकीपर-बल्लेबाज बिसला को जगह दी और मैकु लम का पत्ता काटा. न्यूजीलैंड के अनुभवी क्रिकेटर मैकुलम ने उफ तक नहीं की.

कुछ घंटे बाद, एक चमचमाती वोल्वो 9400 इंटर-सिटी कोच कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम को लेकर चेन्नै के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम पहुंची. हिमाचल प्रदेश के 27 वर्षीय विकेटकीपर बिसला के पास एक केकेआर प्रशंसक पहुंचा और उसने बताया कि ग्राउंड स्टाफ ने घास छील दी है, जो जाहिर तौर पर चेन्नै सुपरकिंग्स की बल्लेबाजी के अनुरूप ढाली गई है. और मदुरै में एक करोड़ रु. का यज्ञ शुरू हो गया है.

खान और गंभीर दोनों इस पर जमकर हंसे. बिसला को कोई फर्क नहीं पड़ा. यह आइपीएल-5 में उनका सातवां मैच था. चिंतित खड़े साथियों और स्टैंड्स में मौजूद उतनी ही घबराई हुई प्रेमिका-अर्पिता-के देखते-देखते बिसला ने कमान अपने हाथ में ली और रात केकेआर के नाम कर दी.

आइपीएल की पहली बार की इस जीत ने केकेआर से नाकाम टीम का तमगा भी हटा दिया और 10 करोड़ रु. की पुरस्कार राशि भी हासिल कर ली. मेहता ने इंडिया टुडे को बताया, ''चैम्पियंस के खर्च ने हमें दिक्कत में डाल दिया है.'' हालांकि कोई अधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, अनुमान है कि केकेआर ने इस सीजन में 100 करोड़ रु. खर्च किए हैं, जिसमें खिलाड़ियों पर किया गया 50 करोड़ रु. का खर्च शामिल है.

18 प्रायोजकों से केकेआर को 35 करोड़ रु. की कमाई हुई है, जो सभी टीमों में सबसे अधिक है. आठ मैच ईडन गार्डंस में खेले गए, जहां हरेक मैच में 40,000 टिकटों की बिक्री से होने वाली आमदनी को मनोरंजन कर पर मिली 35 लाख रु. की पश्चिम बंगाल सरकार की छूट से और बल मिला. हर गेम में दस कॉर्पोरेट बॉक्स बेचे गए, जिनमें से हरेक की लागत 10 लाख रु. थी.

जीत के कई घंटे बाद, खान ने मेहता के साथ अचानक एक बैठक की, जिसमें केकेआर के अन्य प्रमुख सदस्य भी शामिल थे और इस बैठक में अगले साल के लिए स्पॉन्सरशिप रेट में वृद्धि करने की जरूरत पर जोर दिया गया. मेहता कहते हैं, ''हमें नए स्पॉन्सर भी मिल सकते हैं.'' खान को विश्वास है कि उनकी टीम की ब्रांड वैल्यू, जो वर्तमान में 5.75 करोड़ डॉलर (28.8 करोड़ रु.) आंकी जा रही है, 2013 में और भी बढ़ जाएगी.

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