scorecardresearch

फिल्‍मी अंदाज में लूटते गांव के बंटी-बबली

अशोक और प्रकाश ने अभिषेक बच्चन और रानी मुखर्जी की चर्चित फिल्म बंटी और बबली नहीं देखी थी, लेकिन दोनों ने बखूबी यह जान लिया कि उन्हें किसी को शिकार बनाना है तो महिला सहयोगी उनका काम आसान करेगी.

नशीली दवा खिलाकर लूटते हैं
नशीली दवा खिलाकर लूटते हैं
अपडेटेड 5 जनवरी , 2012

अशोक और प्रकाश ने अभिषेक बच्चन और रानी मुखर्जी की चर्चित फिल्म बंटी और बबली नहीं देखी थी, लेकिन दोनों ने बखूबी यह जान लिया कि उन्हें किसी को शिकार बनाना है तो महिला सहयोगी उनका काम आसान करेगी.

ऐसे में अशोक ने विवाहित रानी को साथी बनाया तो प्रकाश ने अविवाहित मेनका उर्फ मैना को. एक जोड़ा बसों और रेलगाड़ियों में यात्रियों विशेषकर वृद्ध महिलाओं को बेहोश कर लूटता, दूसरा अलग-अलग दुकानों से महंगे कपड़े चुराता.

अब सींखचों के पीछे आने के बाद दोनों जोड़ों को अफसोस हो रहा है, पर बाहर आने के बाद वे फिर से यह सिलसिला शुरू नहीं करेंगे, कोई भी इसकी गारंटी देने को तैयार न होगा.

गंगानगर पुलिस के विशेष दस्ते ने यहां के बस स्टैंड पर 28 वर्षीय अशोक और 22 साल की रानी उर्फ रिंकू दबोचा, उस समय वे एक वृद्धा सुखपाल कौर को नशीली दवा पिलाकर बेहोशी की हालत में ला चुके थे और उसका कीमती सामान पार करने ही वाले थे.

उनके पास से नशीली गोलियां और एक दवा भी मिली. आम तौर पर वृद्ध सहयात्री को विश्वास में लेने के लिए यह युगल उसके गांव का पता पूछता और फिर खुद भी उसी गांव में जा रहे होने की बात कहते हुए बातों में फांस लेता.

दोनों वैसे तो पंजाब में फाजिल्का तहसील के रहने वाले हैं, लेकिन उन्होंने सारी वारदातें राजस्थान के गंगानगर या यहां आने-जाने के रास्ते में ही अंजाम दीं. ऐसा करने की वजह?

अशोक से सुनिए, ''यहां के लोग भोले होते हैं और फिर हमें यहां कोई पहचानता भी नहीं.''

दोनों ने आधा दर्जन वारदातों की बात कबूली. यात्रियों को बेहोश करने वाली उनकी दवा खत्म ही होने वाली थी. यह दवा उन्हें हरिद्वार से आते वक्त ट्रेन में खुद को साधु बताने वाले एक शख्स ने दी थी.

पुलिस के सहायक उप निरीक्षक विजय थालोड़ कहते हैं, ''दवा खत्म होने के बाद इन दोनों को पकड़ पाना शायद मुमकिन ही नहीं होता.'' सहयात्री के सांवला होने पर रानी खुद को उसकी बेटी बताती, रंग साफ होता तो अशोक उसका बेटा होने का दिखावा करता. ऐसे में अन्य यात्रियों को दोनों पर शक ही नहीं होता. वारदातों से हासिल रकम से दोनों ने घर का राशन-पानी खरीदा और अशोक ने एक मोटरसाइकल ली. कुछ जेवर भी पुलिस ने बरामद कर लिए हैं.

प्रकाश और मैना भी कम शातिर न थे. कई दिन तक दर्जियों की दुकानों पर घूमने के बाद प्रकाश ने प्रेमिका मैना को महंगे सूट देने की सोची, फिर कामयाबी मिलती रही, तो दुकानों से पार किए हुए सूट लोगों को बेचने शुरू कर दिए.

प्रकाश दुकानदार को अपनी बातों में उलझता, मैना सूट पसंद करने का दिखावा करती और मौका पाते ही कई सूट खाली थैले में डाल लेती. बाद में कुछ भी पसंद न होने की बात कहते हुए निकल लेते.

लेकिन शहर के एल ब्लॉक में दीपक टेलर्स की दुकान को निशाना बनाते समय किस्मत दगा दे गई. मालिक दीपक का माथा ठनका, जब उसने देखा कि खाली थैले के साथ आए युवक का थैला जाते वक्त भरा हुआ था.

उसने तुरंत दोनों के बाइक का नंबर नोट किया और फिर अपनी दुकान के अंदर जाकर देखा, तो कई महंगे सूट गायब थे. बाइक के नंबर पुलिस के काम आए और उनकी पड़ताल करते हुए पुलिस इस शातिर जोड़े तक जा पहुंची. शुरुआती पूछताछ में ही दोनों ने ऐसी कई वारदातें कबूल कर लीं. अब दोनों जेल की सलाखों के पीछे हैं.

दुकानों और घरों से ठगी कोई नई बात नहीं, और इसके तरीके भी अलग-अलग होते हैं लेकिन जिस तरह से दोनों जोड़े वारदातों को अंजाम देते रहे, वैसा कभी नहीं देखा गया.''

रानी को चिंता है कि अब वह अपने तीनों बच्चों के सामने क्या मुंह लेकर जाएगी? ''एक बार बाहर आ जाएं तो मेहनत-मजदूरी करके पेट पाल लेंगे.''

पहले भी मोटरसाइकल चोरी में पकड़ा जा चुका अशोक सुधरेगा, पुलिस को इसकी उम्मीद कम है. प्रकाश और मेनका में सुधार भी दूर की कौड़ी लगता है, पर पुलिस के रिकॉर्ड में आ जाने के कारण अब उन्हें शायद कोई दूसरे ठिकाने तलाशने पड़ेंगे.

Advertisement
Advertisement