रांची झारखंड की राजधानी है और टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का गृहनगर भी. लगता है, इस शहर में सिर्फ दो तरह के लोग हैं. एक, कुछ चुनिंदा लोग, जो धोनी को जानते हैं; दूसरे वे जो धोनी को जानने की नाकाम कोशिश करते रहते हैं. पहले समूह में उनके परिवार के लोगों के अलावा उनके बहनोई गौतम गुप्ता, पूर्व कोच चंचल भट्टाचार्जी, संतोष, शब्बीर और गौतम उपाध्याय जैसे मित्र हैं. यह समूह कप्तान के कष्टों और उनकी सफलताओं के जखीरे को जनता की निगाहों से पूरी तरह छिपा कर रखता है. बचपन के मित्रों के लिए धोनी की गर्मजोशी जरा भी कम नहीं हुई है.
लगता है, प्रेम से माही कहे जाने वाले टीम इंडिया के कप्तान धोनी रांची में अपने चुनिंदा मित्रों से तमाम बातें साझा करते हैं. एक मित्र ने भेद खोला है कि माही ने एक बार जब एक मैच से खुद को जबरन विश्राम दिलाया था, तभी से वे अपने खेल के बारे में विचार कर रहे हैं. एक मित्र ने और खुलासा किया, ‘माही टेस्ट मैचों में विकेट कीपिंग से मुक्ति चाहते हैं. वे चाहते हैं कि जैसे श्रीलंका ने कुमार संगकारा को कीपिंग से मुक्त कर दिया था, बीसीसीआइ वैसे ही उन्हें भी मुक्ति दे.’
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज ठीक रहती तो धोनी यह बात चयनकर्ताओं तक पहुंचा भी देते. पर इसकी उम्मीद अब नहीं. सिडनी टेस्ट में अर्धशतक को छोड़ दें तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में बल्लेबाज के तौर पर वे कुछ कर नहीं सके. कीपिंग में भी औसत से कहीं पीछे रहे हैं. माही के मित्र इस बात पर खफा हैं कि जो उन्हें नजर आ रहा है, वह बोर्ड को नजर नहीं आता. यह कि माही की हथेलियां सूजी हुई हैं और उनका दर्द खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. माही अपनी वकालत खुद नहीं करेंगे. दिनेश कार्तिक साथ खेल रहे थे, तब भी माही ने कीपिंग खुद की और दिनेश को विशेषज्ञ बल्लेबाज की तरह खेलने दिया.
धोनी हमेशा ही टीम का नेतृत्व आत्मविश्वास के साथ करते रहे हैं. शांत दिमाग को मैदान पर उन्होंने कभी बेकाबू नहीं होने दिया, भले ही कहा जाता रहा हो कि प्लेइंग कंडीशंस को लेकर वे खुश नहीं. पर लगता है, नितांत निजी बातचीत में वे सारी बातें कह डालते हैं. इंग्लैंड के विध्वंसक दौरे के बाद, जब धोनी रांची में थे तब किसी ने उनकी मां के मोबाइल पर उनसे बात की. धोनी ने उदास मन से कहा था, ‘देखते हैं, कब तक चलता है सर. रन नहीं बनेगा तो छोड़ देंगे.’ धोनी ने उनसे यह भी कहा कि उनमें अब टेस्ट क्रिकेट के लिए ज्यादा धैर्य नहीं बचा है.
मोटरसाइकिल चलाना उन्हें हमेशा पसंद है, उससे उनकी थकावट भी दूर हो जाती है. लेकिन विडंबना यह है कि वे रांची में इसे चला नहीं सकते. अपने एक दोस्त से उन्होंने कहा थाः ‘रांची में मेरे लिए अब मेरे घर की चहारदीवारी ही बची है. मैं अपनी मोटरसाइकिल भी नहीं चला सकता.’ जाहिर है, धोनी उन नजरों से नाराज हैं, जो लगातार उन पर गड़ी रहती हैं.
अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए धोनी अपने जबड़े को दाएं-बाएं करते हैं. रांची में एक पुराने कोच बताते हैं, ‘जब हम टीवी पर देखते हैं कि धोनी दातं पीस रहे हैं, तो समझ जाते हैं कि माही किसी स्थिति या इंसान से नाराज हैं.’ ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान जब धोनी ने कहा कि वे 2013 तक टेस्ट क्रिकेट छोड़ देंगे ताकि 2015 के विश्व कप के लिए दुरुस्त रह सकें, तब रांची में उनके कुछ करीबियों ने इस बयान को दूसरे खिलाड़ियों के लिए संदेश माना था. इन लोगों का दावा है कि उन्होंने इस मसले पर टीम इंडिया के कप्तान से बातचीत की थी.
धोनी हाल ही में रांची में अपने एक पुराने साथी के घर गए थे. उससे उन्होंने कहा, ‘खेल की एक शैली से रिटायर होने के बारे में अगर मैं सोच सकता हूं, तो वे लोग क्यों नहीं जो प्रदर्शन नहीं कर पा रहे?’ शायद यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले ट्वेंटी-20 मैच के ठीक एक दिन पहले उन्होंने यह कहते हुए कप्तानी छोड़ने की पेशकश की कि ‘मुझसे बेहतर कोई मिले तो...’ धोनी की मां देवकी देवी ने इस पर अपने बेटे से पूरी सहमति जताई थी. अपने एक परिचित से उन्होंने कहा था, ‘माही को कप्तानी छोड़ अपने खेल पर ध्यान देना चाहिए, खासकर बल्लेबाजी पर.’

