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राजस्थान: जिले को लेकर आपस में जंग

जिला बनवाने के लिए अपना दावा मजबूत करने को कुचामन और डीडवाना के लोगों ने फेसबुक और जमीन पर छेड़े आक्रामक अभियान.

अपडेटेड 29 जुलाई , 2012

अपनी-अपनी तहसीलों को जिला बनवाने की यह अलग तरह की जंग है. नागौर जिले के कुचामन और डीडवाना के लोगों ने जमीनी आंदोलनों से लेकर नेट तक पर प्रतिस्पर्धा में अभियान चला रखा है. बानगी देखिएः ''डीडवाना के लोग बेकवर्ड हैं, जो आज भी सब्जी में भुजिया चूर के खाते हैं.'' कुचामन की ओर से किए गए हमले का जवाब तुरंत डीडवाना से आया, ''हम जमीन से जुड़े हैं. कुचामन की तरह हवाई बातें नहीं करते.''

अब कुचामन का जमीनी जवाब, ''कुचामन शिक्षानगरी के नाम से जाता है और हमारी आबादी से ज्‍यादा यहां विद्यार्थी पढ़ते हैं.'' अब मजबूत हमले का जवाब डीडवाना की तरफ  से भी तैयार था, ''कुचामन जिस शिक्षा के बलबूते जिले की मांग कर रहा है, वह आवाज डीडवाना के स्कूल और कॉलेज की देन है.'' डीडवाना की तरफ  से आए दमदार तर्क के बाद कुचामन की तरफ  से एक और वार, ''अगर कुचामन अपने यहां से सब्जी भेजना बंद कर दे तो डीडवाना वालों की थाली में रोटी अकेली पड़ जाएगी.''

अब डीडवाना चुप नहीं बैठेगा. इस तरह से फेसबुक पर पिछले छह महीने से जंग जारी है. और इधर महीने भर से मैदान पर भी ताल ठोकी जाने लगी है. दोनों जगहों के लोग तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित कर सरकार का ध्यान बांटना चाहते हैं. डीडवाना की वकालत में वहां की संस्था श्रीराम फाउंडेशन की तरफ से तहसील के हर गांव में संकल्प रथ यात्रा जाकर लोगों के हस्ताक्षर जुटा रही है.

संस्था के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह का विश्वास देखिए, ''डीडवाना का जिला बनना तय है पर हम कुचामन के लोगों को बताना चाहते है कि जिले के लिए कार्यक्रम करने हमें भी आते हैं.'' जिले की दूसरी बड़ी तहसील होने के साथ मजबूत प्रशासनिक ढांचा होने की वजह से भी डीडवाना थोड़ा आश्वस्त दिख रहा है.

दूसरी ओर पिछले 10 वर्षों में तेजी से उभरा कुचामन सिटी एक बड़े शहर की शक्ल ले रहा है. यह ऊंचे जीवन स्तर के साथ शिक्षानगरी के नाम से भी जाना जाता है. छात्रों की संख्या यहां की आबादी को भी पार कर गई है. जिले के लिए यहां भी पिछले दो महीने में दर्जनों कार्यक्रम हो चुके या चल रहे हैं. हाल ही में 31,000 छात्रों की महारैली निकाली गई.

हस्ताक्षर अभियान और महिला संगठनों के भी कार्यक्रम जारी हैं. 'कुचामन जिला बनाओ' अभियान के संयोजक ज्ञानाराम रणवां डीडवाना पर बरसते हैं, ''नए जिले के गठन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा कुचामन के ही पास है. डीडवाना दूर-दूर तक नहीं ठहरता.''

जिले का मुद्दा जनप्रतिनिधियों पर भी सवार है. कुचामन के पक्ष में नावां विधायक महेंद्र चौधरी की सुनिए, ''हमारी मांग 30 साल पुरानी है.'' इस पर डीडवाना के विधायक ??? डूडी थोड़ा व्यंग्य कसते हैं, ''याद रहे कि शादी के लिए उम्र कम-से-कम 18 साल होनी जरूरी है.'' यानी कुचामन अभी उप-तहसील से तहसील बना है जिला बनना तो बहुत दूर की बात है.

प्रदेश में कोटपुतली, नीम का थाना, ब्यावर, फलौदी, डीडवाना और कुचामन को जिला बनने की मांग लंबे समय से उठ रही है. इस पर राज्‍य सरकार ने एक कमेटी बनाई है. वह इन सभी क्षेत्रों को कई पैमानों पर कसेगी. लोगों को अगले बजट में या आने वाले चुनाव से पहले जिले की घोषणा होने की उम्मीद है. जरूरत है जिले के मसले पर जंग न लड़कर एक जाजम पर बैठने की, ताकि क्षेत्र का विकास हो.

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