नालंदा जिले के नूरसराय में एक महिला पर हुई बर्बरतापूर्ण कार्रवाई के बाद पुलिस मुख्यालय ने प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए राज्य के सभी एसपी को वीडियो फुटेज तैयार कराने का निर्देश दिया था जिससे फुटेज के आधार पर दोषी प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की जा सके. लेकिन 20 फरवरी को पटना में एक महिला और उसके बेटे के साथ सिटी एसपी किम के बर्ताव ने कई प्रश्नों को जन्म दे दिया है.
उस रात पटना के कंकड़बाग थाना के पुराने बाइपास के निकट निर्माणाधीन सड़क के किनारे पानी भरे गड्ढे में करंट की चपेट में आने से दो किशोरों की मौत हो गई. दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और आश्रितों को मुआवजे की मांग को लेकर लोग गुस्से में थे. शिकायत है कि स्थिति को काबू करने पहुंची सिटी एसपी किम ने उग्र नागरिकों जैसा बर्ताव किया. उन्होंने पहले अनिमेश, फिर उसकी मां सुजाता को थप्पड़ जड़ा. जवाब में सुजाता ने भी उन्हें झापड़ रसीद कर दिया. अनिमेष बताते हैं, ‘हम उन्हें घटना की जानकारी देने पहुंचे थे. लेकिन वह मारपीट पर उतर आईं. बचाव में जब मां आईं तो उन्हें भी थप्पड़ मार दिया.’
सिटी एसपी पर कार्रवाई की मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों ने सदन से वाक आउट कर दिया. हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सिटी एसपी के इस कथित बर्ताव को लेकर माफी मांगी है. उन्होंने कहा है, ‘सिटी एसपी की यह पहली पोस्टिंग है, यंग ऑफिसर हैं, संभव है उनसे कोई चूक हुई हो. उनकी काउंसलिंग कराई जाएगी ताकि वे भविष्य में ऐसा न दोहराएं.’
मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट तलब की है कि किसने सड़क खोदी थी और किसके आदेश से यह काम हो रहा था. उधर, दो किशोरों की मौत के सिलसिले में सड़क निर्माण करा रहे ठेकेदार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है. बहरहाल, नागरिकों का उग्र प्रदर्शन जायज नहीं था. लेकिन उग्र प्रदर्शन पर नियंत्रण का यह पुलिसिया अंदाज कितना सही था?

