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तेल कंपनियों को घाटे की चिंता, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

रविवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक बार फिर बढ़ीं. पेट्रोल के दाम 62 पैसे लीटर और डीजल के मूल्य में 64 पैसे लीटर की बढ़ोतरी की गई. यह लगातार बढ़ोतरी का आठवां दिन है. तेल कंपनियां जून 2017 के बाद से दैनिक आधार पर कीमतों की समीक्षा कर रही हैं.

फोटोः बिजनेस टुडे
फोटोः बिजनेस टुडे
अपडेटेड 14 जून , 2020

रविवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक बार फिर बढ़ीं. पेट्रोल के दाम 62 पैसे लीटर और डीजल के मूल्य में 64 पैसे लीटर की बढ़ोतरी की गई. यह लगातार बढ़ोतरी का आठवां दिन है. तेल कंपनियां जून 2017 के बाद से दैनिक आधार पर कीमतों की समीक्षा कर रही हैं. तब से पेट्रोल के दाम में 62 पैसे और डीजल के मूल्य में 64 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी सर्वाधिक है. पिछले आठ दिनों में पेट्रोल के दामों में 4.52 रुपए प्रति लीटर और डीजल की दर में 4.64 रुपए लीटर की कुल बढ़ोतरी हुई है.

इस बढ़ोतरी से पहले 82 दिनों तक पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किए गए थे.

सात जून से दाम में लागत के हिसाब से फेर-बदल शुरू किया गया. उसके बाद से यह लगातार आठवां दिन है जब ईंधन के दाम बढ़े हैं.

नई बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल का मूल्य 75.16 रुपए से बढ़कर बढ़कर 75.78 रुपए लीटर जबकि डीजल के दाम 73.39 रुपए से बढ़कर 74.03 रुपए पहुंच गए हैं. राज्यों में लगने वाले वैट के आधार पर विभिन्न राज्यों में पेट्रोल डीजल की कीमतें अलग अलग होगी.

कच्चे तेल की गिरावट का फायदा सरकार को

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोरोना वायरस महामारी के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का लाभ उठाने और अतिरिक्त संसाधन जुटाने के इरादे से सरकार ने 14 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी.

उसके बाद सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतों की दैनिक समीक्षा रोक दी थी.

उसके बाद सरकार ने फिर पांच मई को पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए. इन दो बार की बढ़ोतरी से सरकार को 2 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त कर राजस्व प्राप्त हुए. आम जनता को इस कच्चे तेल की गिरावट का कोई फायदा नहीं मिला. हालांकि सरकार की ओर से की गई बढ़ोतरी को तेल कंपनियों ने ग्राहकों को आगे नहीं बढ़ाया.

तेल कंपनियों को सताई घाटे की चिंता

सरकार की ओर से उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी करने का पूरा भार तेल कंपनियों को उठाना पड़ा. कच्चे तेल की कीमतों में भी इस बीच तेजी देखने को मिली. 21 अप्रैल को बेंट क्रूड की कीमत 17 डॉलर के करीब थी जो आज 38 डॉलर के पास कारोबार कर रही है. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, सरकार की ओर से उत्पाद शुल्क का भार ये दोनों चीजें तेल कंपनियों के घाटे को बढ़ा रही थीं. इसके अलावा लॉकडाउन के कारण ईंधन की मांग में आई कमी भी कंपनियों के घाटे का बढ़ा कारक बना.

क्रेडिट सुईस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अगर तेल कंपनियां यह बढ़ोतरी नहीं करती हैं तो उनके मार्जिन नकारात्मक हो जाएंगे और वे घाटे पर डीजल और गैस बेचने के लिए मजबूर होंगे. ऐसे में 16 जून की समीक्षा से पहले यह बढ़ोतरी लाजमी है, जिससे तेल कंपनियां अपने मार्जिन को नकारात्मक होने से बचा सकें.

कंपनियों को नुकसान होने पर वे सरकार को लाभांश देने में भी समर्थ नहीं होती. पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कंपनियों के लिहाज से अच्छा कदम है. यही कारण है कि बीपीसीएल, आइओसी और एचपीसीएल के शेयर भाव में बीते एक हफ्ते में बढ़त देखने को मिल रही है.

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