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आपदाओं से निबटने का ओडिशा का अनुभव कोरोना में काम आ रहाः मुख्य सचिव

नवीन पटनायक की अगुआई वाले ओडिशा ने इस महामारी से निपटने में अलग किस्म की तत्परता दिखाई है. मुमकिन है कि बड़ी कुदरती आपदाओं से निबटने में राज्य सरकार का पहले का अनुभव कोरोना से निपटने में भी कारगर साबित हो रहा हो. अब राज्य सरकार का दावा है कि आपदा से निबटने में ओडिशा देशभर के लिए मॉडल राज्य हो सकता है. इस मसले पर ओडिशा के मुख्य सचिव असित त्रिपाठी से इंडिया टुडे के विशेष संवाददाता मंजीत ठाकुर ने बातचीत की

ओडिशा की कोरोना संक्रमण के खिलाफ तैयारियों का जायजा लेते मुख्य सचिव असित त्रिपाठी
ओडिशा की कोरोना संक्रमण के खिलाफ तैयारियों का जायजा लेते मुख्य सचिव असित त्रिपाठी
अपडेटेड 30 मार्च , 2020

देशभर में कोरोना पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है और लॉकडाउन ने देश के हर हिस्से को सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावित किया है. ऐसे में नवीन पटनायक की अगुआई वाले ओडिशा ने इस महामारी से निपटने में अलग किस्म की तत्परता दिखाई है. मुमकिन है कि बड़ी कुदरती आपदाओं से निबटने में राज्य सरकार का पहले का अनुभव कोरोना से निपटने में भी कारगर साबित हो रहा हो.

अब राज्य सरकार का दावा है कि आपदा से निबटने में ओडिशा देशभर के लिए मॉडल राज्य हो सकता है. कोरोना और लॉकडाउन से निबटने के लिए मुख्यमंत्री ने राज्य के मुख्य सचिव की अगुआई वाल सचिवों के समूह को कैबिनेट की तरफ से सारे फैसले लेने की शक्ति दे दी है. जरूरी मेडिकल उपकरणों और सामानों की खरीद से जुड़े फैसले लेने के से लेकर जागरूकता फैलाने तक, सचिवों के कई छोटे समूह बना दिए गए हैं इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो गई है. इसमसले पर ओडिशा के मुख्य सचिव असित त्रिपाठी से इंडिया टुडे के विशेष संवाददाता मंजीत ठाकुर ने बातचीत कीः

सवालः आज की तारीख में कोरोना संक्रमितों की संख्याओं के मामले में ओडिशा में वस्तुस्थिति क्या है?

असित त्रिपाठीः इस वक्त तक हमारे राज्य में तीन पॉजिटिव मामले हैं. उनकी हालत स्थिर है और उनमें सुधार आ रहा है. हमने एक व्यापक सिस्टमेटिक कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग अभियान चलाया है और ऐसे लोगों की पहचान की है जो उनके संपर्क में आए थे और उन्हें तन्हाई में और घर में क्वॉरंटीन में रखा है. इसमें सकारात्मक बात यह है कि वैसे लोग जो इन संक्रमितों के संपर्क में आए थे, सभी के सैंपल नेगेटिव मिले हैं. हमारी अभी तक की कोशिशें कामयाब रही हैं.

सवालः किन इलाकों में प्रसार हुआ है?

असित त्रिपाठीः ये तीनों पॉजिटिव मामले भुवनेश्वर के हैं. यानी खुर्दा जिले के लेकिन बाकी के सारे जिले लॉकडाउन के तहत हैं और इसके प्रसार को रोकने के लिए सभी उपाय अपनाए जा रहे हैं. दिलचस्प बात है कि इन में से 2 मामले ऐसे हैं जिसमें लोग विदेशों से आए थे और एक को संक्रमण दिल्ली से घरेलू यात्रा के दौरान हुआ. सामुदायिक प्रसार का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है. यह बहुत अच्छी खबर है.

सवालः कितने जिलों में लॉकडाउन है?

असित त्रिपाठीः शुरू में हमने 5 जिलों को ही लॉकडाउन किया था. पर बाद में इसे 14 जिलों तक विस्तारित किया. हमने केंद्र सरकार की घोषणा से पहले ही पूरे राज्य में संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी.

हमने लोगों से अपील की की कि राज्य की मदद के लिए स्वयंसेवा के लिए आगे आएं. इससे राज्य की क्षमता बढ़ जाएगी. मुख्यमंत्री ने खुद दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अनुरोध किया कि हमारे राज्य के प्रवासी मजदूरों को वहीं रोक रखें जहां वे हैं. हम भी बाहर के राज्यों के सभी कामगारों को लेकर ओडिशा में वही कर रहे हैं. इससे इस वक्त पर यात्रा करने से कोरोना के फैलने का खतरा रुक जाएगा. राज्य में गमने ओडिया प्रवासियों और यहां बाहर से आए कामगारों की मदद के लिए हेल्पलाइन भी शुरू किया है. दूसरे राज्यों में मौजूद ओड़िया समुदाय से हमने अपील की है कि वे वहां मौजूद हमारे प्रवासी कामगारों की मदद करें.

सवालः कर्फ्यू लागू करने का कोई प्रस्ताव है?

असित त्रिपाठीः जनता हमें बहुत अच्छे से सहयोग कर रही है और हमारा जागरूकता अभियान भी गांव-गांव तक पहुंच रहा है ऐसे में कर्फ्यू लागू करने का हमारा कोई विचार नहीं है.

सवालः संक्रमण से रोकने के लिए राज्य की क्या तैयारी है? मेरा मतलब अस्पतालों में बेड, डॉक्टरों और कुशल नर्सिंग स्टाफ से है.

असित त्रिपाठीः उम्मीद है कि लॉकडाउन से इसके प्रसार के रफ्तार में कमी आएगी और हमें इतना समय मिल जाएगा कि हम इस वायरस से लड़ने के लिए तैयारी कर सकें. अस्पतालों में इलाज को लेकर हमें पूरा भरोसा है. हम पहले राज्य हैं जहां सिर्फ कोरोना के इलाज के लिए 1000 बेड का अस्पताल बनाया गया है जो 2 हफ्ते में काम करने लग जाएगा. हम दूसरे जिलों में निजी अस्पतालों में इसी मॉडल पर कोरोना अस्पताल बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

अधिकतर सरकारी इमारतों को पहले से ही क्वॉरंटीन सुविधाओं के लिए लिहाज से तैयार किया जा रहा है. इसके लिए जिला अस्पतालों को इसके लिए कहा जा चुका है.

हमारा कार्यक्रम वैज्ञानिक तरीके से बनाया गया है इसमें सूचना तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. हमने अधिक जोखिम वाले लोगों की पहचान की है जो विदेशों से आए हैं. हमने उन्हें घर में ही तन्हाई में रखा है ताकि संक्रमण के विस्तार को रोका जा सके. ओडिशा सरकार ने देश में पहली दफा, विदेश से लौटे हर उस व्यक्ति लिए 15,000 रुपए का अनुदान देने का फैसला किया है, जो अपने बारे में सरकारी पोर्टल पर सूचना देगा. यह पोर्टल है https://covid19.odisha.gov.in जो डेटा के आधार पर हमारे फैसले लेने की प्रक्रिया को तेज बना रहा है.

हमने सबसे अधिक रिपोर्टिंग वाले 5 जिलों में 22 मार्च से ही लॉकडाउन घोषित कर दिया. इसकी वजह से हमें क्वॉरंटीन की व्यवसथा में नियंत्रण स्थापित करने में भी मदद मिली है.

हमने पुलिस और डॉक्टर के साथ कॉल सेंटर भी जोड़े हैं. इससे चेन तोड़ने में हमें मदद मिल रही है. सरकार ने अपने हेल्पलाइन 104 को आम जनों के लिए कोरोना से जुड़े किसी भी सूचना के लिए खोल दिया है.

सूबे ने और भी मिसालें की हैं जिसमें मुख्यमंत्री खुद फेसबुक और ट्विटर के जरिए लोगों से खुद के बारे में बताने के लिए कह रहे हैं. इसकी मिसाल उन्होंने खुद पेश की है और अपनी बहन गीता मेहता के बारे में जानकारी दी. पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव और उनके परिवार ने भी सरकार के कोविड-19 में खुद को पंजीकृत किया. इस बात ने कि राज्य सरकार ने महामारी कानून 1897 लागू किया और इसको तोड़ने पर आइपीसी के तहत सजा के प्रावधान किए इससे भी हमारी कसरत कामयाब बन रही है.

सभी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में तन्हाई की सुविधाएं हैं. आज की तारीख तक, 540 आइसोलेशन बेड तैयार हैं. ग्रामीण इलाकों में क्वॉरंटीन सुविधाओं के लिए सभी पंचायतों को पंचायती राज और पेयजल मंत्रालय ने 5-5 लाख रु.दिए हैं.

राज्य सरकार चार महीने के लिए अग्रिम सामाजिक पेंशन का भुगतान कर रही है, जिससे लाभार्थियों, विशेष रूप से बुजुर्ग व्यक्तियों को कोरोनो वायरस से संक्रमित होने से रोका जा सके. मधु बाबू पेंशन योजना के तहत अग्रिम भत्ता का भुगतान अप्रैल, मई, जून और जुलाई के महीनों में किया जाएगा, जिसमें बुजुर्ग व्यक्तियों, विधवाओं और शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों सहित लगभग 28 लाख लाभार्थियों को लाभ मिलेगा. यह आगे भी ओडिशा में राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत लाभार्थियों की एक समान संख्या में मदद करेगा।

सवालः क्या राज्य में समुचित संख्या में मास्क और सेनिटाइजर उपलब्ध हैं?

असित त्रिपाठीः हमने ओडिशा में ही सैनिटाइजर का उत्पादन शुरू कर दिया है. अब ऑर्डर की आपूर्ति होने लगी है. मास्क के लिए भी ऑर्डर दे दिए गए हैं. पर उसकी आपूर्ति में दिक्कतें आ रही हैं. पर इस अंतर को पाटने के लिए हम कुछ और तरीके अपना रहे हैं.

सवालः कोरोना को लेकर जागरूकता कैसे फैला रहे हैं. खासकर ग्रामीण इलाकों में?

असित त्रिपाठीः प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए ओडिशा हमेशा तैयार रहता है. कोरोना वायरस एक स्वास्थ्य आपदा है लेकिन हम आइईसी संचार और प्रौद्योगिकी और पारंपरिक तरीकों का उपयोग करके राज्य के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंच बना सकते हैं.

ओडिशा सरकार ने किसी भी उभरती स्थिति से निपटने के लिए सभी 6,798 ग्राम पंचायतों में 7276 अस्थायी चिकित्सा शिविरों की पहचान की है. अस्थायी चिकित्सा शिविर के लिए प्रत्येक पंचायत में एक अधिकारी को नोडल अधिकारी घोषित किया गया है. राज्य सरकार ने सभी आवश्यक सामग्री जैसे भोजन, बिस्तर, बिस्तर-चादर आदि की आपूर्ति के लिए सेवा प्रदाताओं की पहचान की है. जरूरत पड़ी तो हम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की मदद लेंगे औउन्हें तैयार रहने को कहा गया है. इस मद में प्रखंड विकास पदाधिकारियों को सीएचसी के लिए 10 लाख रु. और पीएचसी के लिए 5 लाख रु. खर्च करने के लिए अधिकृत किया गया है.

मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए घोषणा की है कि उन्हें अप्रैल, मई, जून और जुलाई की तनख्वाह अप्रैल में ही दी जाएगी ताकि उनके परिवार वालों को दिक्कत न हो.

हमने अधिक तैयारी के लिए कुशल मेडिकल स्टाफ से आवेदन मांगे हैं जिनमें सेवानिवृत्त कर्मचारी भी योग्य होंगे कि वे सरकारी अस्पतालों में नियुक्त किए जा सकें. यह नियुक्ति 30 जून तक के लिए की जाएगी. अगर जरूरत पड़ी तो यह नियुक्ति अवधि आगे तक बढ़ाई भी जाएगी.

सवालः इस महामारी के चलते अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ गई है. यही पर्यटन का भी हाल है. इसे कैसे सुधारेंगे?

असित त्रिपाठीः हमारी सारी ऊर्जा अभी इस वायरस से लड़ने और इसके प्रसार के रफ्तार को रोकने में खर्च हो रही है. सबसे अधिक जोखिम वाले समूहों की देखभाल की जा रही है. हर ग्राम पंचायत में हमने आज ही मुफ्त खाने की व्यवस्था की घोषणा की है और इसके लिए 32 करोड़ रु. आवंटति किए हैं. एक बार हम इस वायरस को रोक पाए और इसका संक्रमण नहीं बढ़ने दिया तो हमें भरोसा है हम अर्थव्यवस्था को भी सुधार देंगे क्योंकि उसका आधार बहुत ठोस है.

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