यह तो अभी शुरुआत है. कांग्रेस सांसद और 2010 की राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के दागी अध्यक्ष सुरेश कलमाडी की गिरफ्तारी के बाद अब सीबीआइ अपनी जांच का दायरा बढ़ा रही है. इसके दायरे में वह उन लोगों को भी ला रही है, जो खेलों के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थे.
शुंगलू समिति की छह विस्तृत रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दायरे में दिल्ली के उपराज्यपाल तेजिंदर खन्ना, मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, तत्कालीन खेल मंत्री एम.एस. गिल और तत्कालीन शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी आ सकते हैं. सीबीआइ के सूत्र बताते हैं कि जांच एजेंसी का ध्यान अभी कलमाडी पर केंद्रित है, पर उसके अधिकारी दूसरों के खिलाफ भी सबूत जुटाने लगे हैं.
सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''शुंगलू समिति ने अनियमितताओं के कुछ स्पष्ट मामले बताए हैं और हमें प्रधानमंत्री कार्यालय से उनकी जांच के निर्देश मिले हैं.''
शुंगलू समिति की पांच रिपोर्टें तो मूल प्रसारण, खेल गांव, शहर के बुनियादी ढांचे, खेल आयोजन स्थलों तथा आयोजन समिति को लेकर हैं और एक मुख्य रिपोर्ट खेल आयोजन और संचालन से संबंधित है.
शहर के बुनियादी ढांचे संबंधी रिपोर्टदिल्ली सरकार को कठघरे में खड़ा करती है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह रिपोर्ट दिल्ली सरकार के जवाब के लिए गृह मंत्रालय को भेज दी. मंत्रालय ने दिल्ली सरकार को इन आरोपों का जवाब देने के लिए एक महीने का समय दिया है. मुख्यमंत्री शीला दीक्षित कहती हैं, ''शुंगलू समिति के नतीजों के जवाब में हम अंतिम रिपोर्ट बना रहे हैं. इसमें हरेक आरोप का अनुच्छेदवार जवाब होगा. हमारी रिपोर्ट लगभग तैयार है.''
हालांकि सीबीआइ को अभी अधिकृत तौर पर दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए नहीं कहा गया है, लेकिन एजेंसी ने अपनी प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है.
सीबीआइ के अधिकारी के मुताबिक, 'एक स्तर पर जाकर शुंगलू समिति के गिनाए सारे नामों के खिलाफ जांच एक ही मुकाम पर पहुंचती है और एकदूसरे से जुड़ती है. वे सभी मंत्रियों के उस समूह का हिस्सा थे, जिसने सारी परियोजनाओं को मंजूरी दी.''
कलमाडी ने अदालत में अपनी जमानत की अर्जी पर सुनवाई के दौरान सारा दोष गिल पर डाला. खेल मंत्री के तौर पर गिल 17 में से 9 स्टेडियमों के निर्माण कव्ह्णभारी थे. यह पक्का करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की थी कि खेलों में पैसे की कमी न हो. इंडिया टुडे की कई कोशिशों के बावजूद गिल टिप्पणी के लिए नहीं मिले.
शुंगलू समिति ने आयोजन स्थलों से संबंधित अपनी चौथी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है और असल में फिजूलखर्च और देरी होने की बात कही है. रेड्डी खेल गांव की वजह से जांच के दायरे में हैं, जिसमें डीडीए ने अपने पीपीपी पार्टनर-एम्मार एमजीएफ को 766 करोड़ रु. का पैकव्ज देकर उबार लिया था.
शहर के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए परियोजनाओं से संबंधित अपनी तीसरी रिपोर्ट में शुंगलू समिति ने बताया है कि दिल्ली सरकार ने कोई तैयारी नहीं की थी. उसने मुख्यमंत्री को उन फैसलों के लिए दोषी ठहराया है, जिनकी वजह से राष्ट्रमंडल खेलों से संबंधित परियोजनाओं की लागत बढ़ गई.
रिपोर्ट में कहा गया है, ''सभी परियोजनाओं की तैयारी में वक्त लगता है. यह काम 200506 में शुरू हो जाना चाहिए था.'' रिपोर्ट में कहा गया है कि ठेकव्दारों को कम समय देकर अनुचित लागत का फायदा पहुंचाया. शुंगलू समिति के एक अनुमान केअनुसार, दिल्ली सरकार ने 5,500 करोड़ रु. से ज्यादा के काम करवाए, जिनमें अधिकांश पीडब्लूडी ने किए.
रिपोर्ट में यह सवाल भी उठाया गया है कि व्ययवित्त समिति मुख्यमंत्री के तहत केंद्रीकृत क्यों थी और किस आधार पर उसने सभी तरह की परियोजनाओं को मंजूरी दी. समिति ने ठेकों के आवंटन में कलमाडी और उनके साथियों को भी दोषी पाया है और कहा है कि ''शीर्ष पर सत्ता का जबरदस्त केंद्रीयकरण था और आयोजन संमिति के अधिकारियों के बीच हितों का टकराव था.''
सूत्रों का कहना है कि अब कलमाडी की गिरफ्तारी के बाद कई और लोग सबूत देंगे. जांच में शामिल एक अधिकारी ने बताया, ''अभी तक कलमाडी पर शिकंजा कसना मुश्किल काम था. उन्होंने शायद ही किसी दस्तावेज पर खुद हस्ताक्षर किए हों. उनका तरीका धौंस देकर अपने मातहतों से गलत काम कराने का था. इसका अर्थ यह नहीं है कि इससे दूसरे लोगों को फायदा नहीं हुआ.''
कार्यक्रम नियोजन और कार्यबल समर्थन के मामले में सलाह के लिए स्विस कंपनी ईवेंट नॉलेज सर्विस (ईकेएस) को ठेका देने में अनियमितताओं के अलावा कलमाडी के खिलाफ जालसाजी, फर्जीवाड़ा, रिकॉर्ड तैयार करने, देरी और वित्तीय हेराफेरी के अन्य स्पष्ट मामले हैं. कलमाडी पर जांच का शिकंजा जिन अन्य ठेकों में कसा है, उनमें ऑस्ट्रेलियन फर्म स्पोर्ट्स माकेर्टिंग ऐंड मैनेजमेंट (एसएमएएम) को प्रायोजक जुटाने के लिए नियुक्त करना और एक अन्य को कैटरिंग के लिए नियुक्त करना शामिल है.
एसएमएएम और आयोजन समिति के बीच हुए एक संदेहास्पद करार के अनुसार, एसएमएएम 'लाइसेंसिंग ठेकों के लिए अकेली और विशिष्ट वार्ताकार तथा निर्णायक थी,' और उसे खेल के लिए मिलने वाले हरेक प्रायोजक पर 1520 प्रतिशत कमीशन मिलना था.
सीबीआइ कैटरिंग के ठेके की भी जांच कर रही है, जो पहले दिया गया, फिर बिना कारण बताए खारिज किया गया, फिर नए सिरे से उसके टेंडर किए गए और फिर वही ठेका उसी कंपनी को दे दिया गया, जो इस दौरान अपनी बोली तीन गुना बढ़ा चुकी थी, जिससे आयोजन समिति को 100 करोड़ रु. से ज्यादा का नुक्सान हुआ. और जब राष्ट्रमंडल खेलों के विभिन्न खिलाड़ी घपले में फंसे हैं, सीबीआइ को उम्मीद है कि वे एक दूसरे के भेदखोलेंगे, जिससे उसे लाभ होगा.

