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भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उखाड़ा अपना ही स्टंप

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) का मानना है कि बैंकों के एक समूह ने निंबस कम्युनिकेशंस से पर्याप्त जमानत हासिल किए बिना उसकी ओर से बोर्ड को 2,000 करोड़ रु. की गारंटी दे दी.

भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया टेस्ट
भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया टेस्ट
अपडेटेड 3 जनवरी , 2012

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) का मानना है कि बैंकों के एक समूह ने निंबस कम्युनिकेशंस से पर्याप्त जमानत हासिल किए बिना उसकी ओर से बोर्ड को 2,000 करोड़ रु. की गारंटी दे दी.

4 जनवरी 2012: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

यह गारंटी निंबस कम्युनिकेशंस को घरेलू क्रिकेट मैचों के प्रसारण अधिकार हासिल करने के एवज में दी गई. बोर्ड के दावे के मुताबिक नतीजा यह निकला कि तीनों बैंक-यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और इंडियन बैंक-अब गारंटी के एवज में बीसीसीआइ की 1,600 करोड़ रु. के भुगतान की मांग को पूरा करने में असमर्थ/अनिच्छुक नजर आते हैं. बोर्ड की इतनी रकम निंबस पर बकाया है. निंबस तीसरी बार बीसीसीआइ का बकाया चुकाने से चूका है.

28 दिसम्‍बर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

बैंक राजी हो जाते तो बीसीसीआइ को 2,000 करोड़ रु. के अनुबंध की एवज में 1,600 करोड़ रु. हासिल होते. यह अनुबंध नवंबर, 2009 में छह वर्षों के लिए हुआ था. शेष 400 करोड़ रु. अनुबंध से बचे हुए उन मैचों के लिए तय किए गए थे, जिनका प्रसारण अब तक नहीं हुआ है.

बीसीसीआइ की वर्किंग कमेटी ने 2011 के सत्र के बकाया 50 करोड़ रु. का भुगतान करने में नाकाम रहने पर निंबस के साथ हुए अनुबंध को निरस्त कर दिया. यह रकम 75 करोड़ रु. की किस्त का एक हिस्सा थी.

21 दिसम्‍बर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

इसके लिए निंबस ने बोर्ड का 24 करोड़ रु. का भुगतान करते हुए 45 दिन की मोहलत मांगी. मगर बीसीसीआइ ने चैनल की पिछली दो चूकों का हवाला देते हुए किसी भी किस्म की राहत से इनकार कर दिया और पूरे 1,600 करोड़ रु. अदा करने की मांग की.

14 दिसंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

बीसीसीआइ के कानूनी मामलों के प्रमुख पी.आर. रमन कहते हैं, ''अपनी बकाया रकम हासिल करने के लिए हम सर्वोच्च स्तर पर कानूनी स्त्रोतों की मदद लेंगे और इस मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक से हस्तक्षेप करने का आग्रह करेंगे.''

07 दिसंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

उन्होंने दावा किया कि बोर्ड ने बैंकों को निंबस की पिछली गलतियों के बारे में भी आगाह किया था. नवंबर में जब निंबस तीसरी बार पैसा चुकाने में नाकाम रहा तो बोर्ड ने बैंकों से उनके द्वारा रखी गई मार्जिन मनी से 50 करोड़ रु. देने की मांग की. मार्जिन मनी बैंकों द्वारा ली जाने वाली वह राशि है जिसे वे किसी अनुबंध के पूरा होने तक अपने पास रखते हैं.

30 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

बैंक निंबस के साथ हुए सौदे के बारे में बोलने से अब या तो बच रहे हैं या चुप्पी साधे हुए हैं. दिल्ली में पंजाब नेशनल बैंक के सीएमडी के.आर. कामथ कहते हैं कि किसी कंपनी से गिरवी के तौर पर क्या मांगा जाए, यह उनका विशेषाधिकार है.

23 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

22 दिसंबर को अन्य बैंकों के साथ-साथ पंजाब नेशनल बैंक ने मुंबई हाइकोर्ट में कहा कि वे बीसीसीआइ को गारंटी राशि नहीं चुकाएंगे. इस सिलसिले में इंडिया टुडे की ओर से भेजे गए एक ई-मेल का इंडियन बैंक और यूनियन बैंक की ओर से कोई जवाब नहीं आया.

16 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

इंडिया टुडे के ई-मेल का जवाब देते हुए निंबस ने कहा कि बैंकों ने रिजर्व बैंक के तय निर्देशों का पालन किया. निंबस के चेयरमैन हरीश थवानी के मुताबिक, ''बैंकों ने बीसीसीआइ मैचों से निंबस को होने वाली प्राप्तियों, संपत्तियों और अन्य कई अतिरिक्त प्रतिभूतियों का भी जायजा लिया.'' हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि बैंकों को उनकी ओर से किन-किन संपत्तियों को बतौर जमानत पेश किया गया है.

बीसीसीआइ के कोषाध्यक्ष अजय शिर्के को भेजे गए एक पत्र में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि निंबस की गारंटी को तलब नहीं किया जा सकता क्योंकि बीसीसीआइ ने निंबस की पिछली गलतियों की प्रकृति और उसकी मात्रा का कोई संकेत नहीं दिया था.

उधर रमन का दावा है कि बीसीसीआइ को निंबस की खस्ता हालत का पता तभी लग पाया जब उसने मार्च, 2012 में प्रस्तावित भारत-पाक सीरीज के निरस्त होने पर उसकी ओर से जमा किए गए 250 करोड़ रु. वापस लौटाने की मांग की. निंबस ने बोर्ड को यह भी बताया कि इस पैसे से उसे बोर्ड के बकाया 50 करोड़ रु. चुकाने में भी मदद मिलेगी.

बीसीसीआइ अधिकारियों को चिंता है कि निबंस के साथ चल रहे विवाद का असर ब्रॉडकास्टर्स के साथ भविष्य में होने वाले अनुबंधों पर भी पड़ सकता है.

बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, ''अगर कोई बैंक तकनीकी कारणों से उसकी ओर से दी गई गारंटी का सम्मान नहीं करता यानी गारंटी अनुबंध के खत्म होने के बाद जब्त होती है, पहले नहीं-तो यह एक बहुत बुरी मिसाल बन जाएगी.''

हाइकोर्ट में बैंकों के कड़े रुख को देखते हुए जस्टिस एसज़े. वजीफदार ने इस मामले को आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) के लिए भेज दिया है. दुनिया के सबसे धनवान क्रिकेट बोर्ड का धन संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है.

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