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देश में और भी हैं कई अन्‍ना

भारत में किशन बाबूराव हजारे ऊर्फ अण्णा अगर भ्रष्टाचार-विरोधी लहर की मिसाल बन चुके हैं वहीं ये कम चर्चित चेहरे, जिन्हें दूसरे अण्णा ही कहा जाएगा, जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में जुटे हैं.

अपडेटेड 30 अगस्त , 2011

भारत में किशन बाबूराव हजारे ऊर्फ अण्णा अगर भ्रष्टाचार-विरोधी लहर की मिसाल बन चुके हैं वहीं ये कम चर्चित चेहरे, जिन्हें दूसरे अण्णा ही कहा जाएगा, जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में जुटे हैं.

कुछ अनजान-से जिलों के गांवों में ऐसे कई अन्य अण्णा इस गांधीवादी के संदेशों का प्रसार कर रहे हैं. आपस में अनजान इन लोगों ने तो एक-दूसरे के बारे में कभी सुना तक नहीं है.

इनमें से कई हजारे से कभी मिले तक नहीं हैं, उन्हें देखा है तो बस टेलीविजन पर. वे 'मैं अण्णा हूं' लिखी टोपियां नहीं पहनते, न तिरंगा लहराते हैं और न ही दिलचस्प नारे उछालते हैं. फिर भी उन्होंने देश भर में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान की लौ जलाए रखी है.

गया में किताबों की दुकान के एक मालिक, मैक्सिको से छुट्टियों में अपने घर चेन्नै आई एक 38 वर्षीय युवती, चंडीगढ़ का एक मैकेनिकल इंजीनियर, अण्णा के साथ अनशन पर पहले बैठ चुका एक मुंबईकर और बंगलुरू में एक्सएलआरआइ का एक पूर्व छात्र इस अनोखे समूह के घटक हैं. पर यही अण्णा की मौन सेना है.

शिक्षक, चेन्नै
भावना उपाध्याय, 38 वर्षभावना उपाध्‍याय

इस साल मई में जब नेशनल ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी ऑफ मैक्सिको के कम्युनिकेशन विभाग की फैकल्टी सदस्य 38 वर्षीया भावना उपाध्याय चेन्नै में अपने अभिभावकों के पास तीन माह की छुट्टी पर आईं तो उन्होंने सोचा तक नहीं था वे लौटकर नहीं जाएंगी. अण्णा हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन आगे बढ़ा तो उपाध्याय को इसमें कुछ बदलाव लाने का अवसर दिखा. 15 अगस्त को मैक्सिको जाने वाली अपनी उड़ान जानबूझ्कर छोड़कर अब वे चेन्नै के विरोध प्रदर्शन स्थल की समन्वयक बन चुकी हैं.

अड्यार से तिरुवानमियूर को जाने वाली और विरोध प्रदर्शन स्थल से लगी व्यस्त सड़क पर उपाध्याय और उनका तीन सदस्यों का दल पक्के फर्श पर बैठकर प्रेस नोट और पर्चे तैयार करता है और ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को अपने साथ जुडऩे की अपील करता है. प्रदर्शन स्थल पर भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं के लिए स्थिति सहज बनाने के अलावा वे इस बात का खास ध्यान रखती हैं कि ज्‍यादा से ज्‍यादा युवा पेशेवर और नामी लोग प्रदर्शन स्थल पर आएं.  इस संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई भी. अब भ्रष्टाचार के प्रति विरोध जताने रोजाना 2,000 से ज्‍यादा लोग यहां आते हैं.

भावना कहती हैं, ''मई में जब मैं चेन्नै आई थी तो सोचा भी नहीं था कि मैं अपने देश को बचाने की खातिर ऐसे किसी ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनूंगी.'' उनके अभिभावक शुरू में विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के उनके फैसले के खिलाफ थे, पर उन्होंने उन्हें मना लिया. उन्होंने मैक्सिको की नौकरी छोड़ एसएसएफ ग्लोबल नामक एनजीओ से जुड़ने का फैसला किया. पर इससे वे अण्णा के जन लोकपाल बिल को लेकर जारी संघर्ष के कामयाब होने के बाद ही जुड़ेंगी. भावना कहती हैं, ''वे मेरी बात मान गए हैं.''

आइटी एक्जीक्यूटिव, बंगलुरू
राजेश अग्रवाल, 43 वर्षराजेश अग्रवाल

22 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी के दिन सुबह के आठ बजे हैं और यह राजेश अग्रवाल के अनशन का छठा दिन है.  बंगलुरू में इंडिया अगेंस्ट करप्शन के इस महत्वपूर्ण सदस्य और ह्ढौद्योगिकी विशेषज्ञ का कहना है, ''मैंने चार दिन की छुट्टी ली थी, पर निकट भविष्य में हल निकलता न देख छुट्टी हफ्ता भर और बढ़ा ली है.'' 20 अगस्त को अग्रवाल ने अपना जन्मदिन प्रदर्शन स्थल फ्रीडम पार्क में साथी प्रदर्शनकारियों के साथ ही मनाया. अग्रवाल बताते हैं, ''मेरा कोई छह किलो वजन कम हो गया है और शारीरिक रूप से कमजोर भी महसूस कर रहा हूं, पर मानसिक रूप से इससे ज्‍यादा दृढ़ता पहले कभी महसूस नहीं की.'' आइआइटी से स्नातक और एक्सएलआरआइ से स्नातकोत्तर अग्रवाल आइआइटी में अरविंद केजरीवाल के सहपाठी थे.

अग्रवाल के मुताबिक, अण्णा के अनशन में उन्हें ज्‍यादा जिम्मेदाराना और पारदर्शी शासन प्रणाली की आस दिखती है. ''भारत में भ्रष्ट ताकतों पर अंकुश लगाने की मैं अपनी तरह से कोशिश कर रहा हूं. मैं रिश्वत नहीं देता जिसकी वजह से मुझे आज तक मेरी संपत्ति के कागजात नहीं मिले हैं. जन लोकपाल बिल देश की हर समस्या का हल नहीं कर सकता, और कोई बिल कर भी नहीं सकता, पर इससे परिस्थितियों को बहुत हद तक काबू में जरूर लाया जा सकेगा.''

मैकेनिकल इंजीनियर, चंडीगढ़
राहुल भारतीय, 31 वर्षराहुल भारतीय

इन दिनों चंडीगढ़ के अंतरराज्‍यीय बस अड्डे से  अगला गोल चक्कर शहर का व्यस्ततम स्थल बना हुआ है. 31 साल के राहुल भारतीय 16 अगस्त से ही यहां इंडिया अगेंस्ट करप्शन अभियान के भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों की अगुआई कर रहे हैं. पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर भारतीय किरण बेदी के गैर-सरकारी संगठन नवज्‍योति और इंडिया विजन फाउंडेशन के साथ पिछले छह साल से काम कर रहे हैं. भारतीय दावा करते हैं, ''कंपनी को भ्रष्टाचार के विरूद्ध उनका रुख रास नहीं आया और इसी वजह से मुझे कंपनी छोड़ देने के लिए कहा गया.'' वे बताते हैं, ''मैं उस कंपनी की विपणन इकाई का प्रमुख था और मैंने लोगों को रिश्वत देने से इनकार कर दिया था.''

बुक स्टोर मालिक, गया
अजीत अग्रवाल, 53 वर्षअजीत अग्रवाल

अण्णा हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के चलते अजीत अग्रवाल के भीतर का कार्यकर्ता  किताब विक्रेता पर हावी हो गया है. गया में उनकी किताबों की दुकान कार्यकर्ता कार्यालय में तब्दील हो चुकी है. अग्रवाल बैनर लगाकर और पर्चे बांटकर जन लोकपाल बिल के लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं. वे कहते हैं, ''मेरे ज्‍यादातर खरीदार छात्र हैं और मेरा लक्ष्य भी वे ही हैं. मैं उनसे कहता हूं कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के जरिए उन्हें अर्थपूर्ण दखल देना चाहिए क्योंकि जन लोकपाल बिल ही उन्हें साफ-सुथरी प्रणाली दिला सकता है.'' वैसे, अग्रवाल का मानना है कि लोगों को अपना कामकाज बंद नहीं करना चाहिए और न विरोध जताने के लिए हिंसा का सहारा लेना चाहिए.

अग्रवाल पहले भी कई अभियानों के अगुआ रह चुके हैं. रोटरी क्लब की गया शाखा के अध्यक्ष के नाते उन्होंने फाल्गु नदी पर अतिक्रमण का विरोध किया था.

नागरिक अधिकार कार्यकर्ता, मुंबई
मयंक गांधी, 52 वर्षमयंक गांधी

जन लोकपाल बिल के लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए 20 अगस्त को मुंबई में 1,50,000 लोगों ने बांद्रा से जुहू तक रैली निकाली थी. पुलिस का शुरुआती अनुमान था कि इस रैली में 5,000 से ज्‍यादा लोग शामिल नहीं होंगे, मगर रैली पर नियंत्रण करने के लिए उसे इतना ही संख्या बल लगाना पड़ गया. इस रैली के पीछे दिमाग 52 वर्षीय मयंक गांधी का था, जो अण्णा हजारे को 2003 से जानते हैं, जब वे सूचना का अधिकार कानून की मांग करते हुए मुंबई के आजाद मैदान में अनशन पर बैठे थे. यह कानून अंततः बनाना पड़ा था. गांधी पिछले नौ साल से ''व्यवस्था के भीतर सुधार लाने के लिए' काम करते आ रहे हैं. 2007 में गांधी ने जागृत नागरिक मंच (जेएनएम) की स्थापना की जो 22 एनजीओ संगठनों का सर्वोच्च संगठन है. उसने बृहन्नमुंबई महानगरपालिका के चुनावों में भाजपा के दिग्गज अमित सटाम की जगह सिटिजन कैंडिडेट के रूप में जु के एडोल्फ डीसूज़ा को उतारा. जेएनएम की कारगर मुहिम रंग लाई और डीसूजा आसानी से चुनाव जीत गए.

गांधी के प्रबंधन कौशल की ओर हजारे के सहायक अरविंद केजरीवाल का ध्यान गया. इस साल जनवरी में केजरीवाल ने गांधी को मुंबई में इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अभियान की अगुआई करने का जिम्मा सौंपा. गांधी ने कार्यकर्ताओं को संगठित किया, रैलियां निकालीं, कैंडललाइट रतजगा किया और हस्ताक्षर अभियान चलाकर आजाद मैदान को मुंबई का रामलीला मैदान बना दिया.
-निर्मला रवींद्रन, किरण तारे, अरविंद छाबड़ा, लक्ष्मी सुब्रमण्यन और जितेंद्र पुष्प

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