अपने यहां छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए सूबे के सात बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों ने आसान तरीका निकाला. इन कॉलेजों ने नियम-कायदों को ताक पर रख बीई की एक और शिफ्ट शुरू कर दी. इस तरह हर कॉलेज में बीई प्रथम वर्ष में सीटों की संख्या 60 से बढ़कर 120 हो गई. इस खेल का खुलासा आरटीआइ में हुआ. अदालत के निर्देश पर स्वामी विवेकानंद तकनीकी विवि के आला अधिकारियों सहित दो दर्जन कॉलेज संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज तो हुई लेकिन आरोपितों के खिलाफ सबूत इकट्ठा कर चुके जांच अधिकारी को ऐन वक्त पर बदल दिया गया.
28 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
कॉलेजों में बीई सेकेंड शिफ्ट के बारे में आरटीआइ कार्यकर्ता डॉ. वी.के. सिंह ने विवि में आवेदन लगाया तो दिलचस्प खुलासा हुआ. पता चला कि तकनीकी शिक्षा संचालनालय की टीम जिस प्रपत्र-ए के आधार पर कॉलेजों का निरीक्षण करती है, उसे कॉलेजों ने भेजा ही नहीं था. फिर भी इस प्रपत्र को, जिसमें कॉलेज अपने संसाधनों की जानकारी देते हैं, निरीक्षण टीम ने वेरीफाइ कर दिया. कहीं सुनवाई नहीं होते देख सिंह ने दुर्ग की अदालत में शिकायत दायर की. जिसके बाद सरकार ने सेकेंड शिफ्ट पर रोक लगा दी और इस बैच को पहली शिफ्ट में शामिल करने का आदेश दिया.
21 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
दरअसल सेकेंड शिफ्ट शुरू करने के लिए ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआइसीटीई) से अनुमोदन, तकनीकी शिक्षा संचालनालय से एनओसी और तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्घता जरूरी होती है. लेकिन दुर्ग के भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, भिलाई के श्री शंकराचार्य कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी, रायपुर के दिशा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ऐंड टेक्नोलॉजी, दुर्ग के छत्रपति शिवाजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रुंगटा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी भिलाई, रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, राजनांदगांव ने जरूरी मंजूरियां लेने की बजाए इन तीनों संस्थाओं को अपने साथ मिला लिया.
14 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
07 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
एआइसीटीई ने बिना विजिट किए ही कॉलेजों को सेकेंड शिफ्ट की इजाजत दे दी, तकनीकी शिक्षा विभाग ने एनओसी देने से पहले ही प्रवेश की काउंसलिंग करवा दी. अदालत के निर्देश पर जब भिलाई थाने के टीआइ संजय पुढीर ने जांच की तो पता चला कि तकनीकी विवि ने इन कॉलेजों को संबद्धता देने के लिए नियम-कायदों को ताक पर रख दिया. कॉलेजों को संबद्धता विवि की सर्वोच्च समिति कार्यपरिषद देती है लेकिन विवि के रजिस्ट्रार भगवंत सिंह ने कार्यपरिषद के निर्णय का हवाला देते हुए खुद ही सातों कॉलेजों को सेकेंड शिफ्ट का संबद्धता आदेश जारी कर दिया. जबकि, कार्यपरिषद सदस्यों का कहना है, कार्यपरिषद ने संबद्धता दी ही नहीं. विवि के कुलपति विमलचंद मल कहते हैं, ''मुझे इस बारे में कुछ पता नहीं है. हमारे ओएसडी से पूछिए.''
30 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
इंडिया टुडे के पास तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के इस फर्जीवाड़े के पुख्ता प्रमाण हैं. रुंगटा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी ने तकनीकी शिक्षा संचालनालय में 27 अगस्त, 2010 को एनओसी के लिए आवेदन किया, इस दिन कार्यालय के आवक क्रमांक 8425 में आवेदन दर्ज है. और एनओसी एक दिन पहले 26 अगस्त को ही जारी कर दी गई. एनओसी देने के लिए किए गए निरीक्षण प्रतिवेदन में एडिशनल डायरेक्टर डॉ. एम.आर. खान, एडिशनल डायरेक्टर जी.एस. बेदी और ज्वाइंट डायरेक्टर ए.के. अहिरवार के हस्ताक्षर हैं, मगर रिपोर्ट में कहीं भी निरीक्षण की और न ही हस्ताक्षर की तारीख डाली गई है. इस मामले में तकनीकी शिक्षा के तत्कालीन डायरेक्टर और काउंसलिंग कमेटी के प्रमुख रोहित यादव, जो फिलहाल रायपुर के कलेक्टर हैं और तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव नारयण सिंह भी संदेह के घेरे में हैं. कॉलेजों को सिंह के एप्रूवल पर ही एनओसी दिया गया था.
23 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
16 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
वी.के. सिंह आरोप लगाते हैं कि आधा दर्जन अन्य इंजीनियरिंग कॉलेज एआइसीटीई टीम के निरीक्षण के बिना ही खुल गए हैं. दस्तावेज भी बताते हैं कि 30 अन्य कॉलेजों में तकनीकी शिक्षा संचालनालय के अधिकारियों ने बिना एनओसी दिए ही काउंसलिंग करवा दी थी. संचालनालय ने भी माना है कि इन इंजीनियरिंग कॉलेजों को एनओसी नहीं दी गई थी.
इस बीच अचानक ही जांच अधिकारी भी बदल दिया गया. बताया जाता है कि पुढीर आरोपियों को गिरफ्तार करने की तैयारी में थे.

