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बेशुमार नोट उगलते करोड़पति बाबू

क्लर्क और पटवारियों से लेकर अफसरों पर पड़े छापों में अथाह संपत्ति का भांडा फूटा. इस लूट पर उजागर हुई राज्‍य सरकारों की बेबसी.

भ्रष्‍ट अधिकारी का बंगला
भ्रष्‍ट अधिकारी का बंगला
अपडेटेड 5 फ़रवरी , 2012

शायद कोई चपरासी पूरी नौकरी में भी अपनी तनख्वाह से 50 लाख रु. की संपत्ति जुटा पाने की कल्पना न कर सके. लेकिन मध्य प्रदेश में पुण्य नगरी उज्‍जैन में नगर निगम के चपरासी नरेंद्र देशमुख के यहां पिछले दिसंबर में लोकायुक्त की टीम ने छापा मारा तो 10 करोड़ रु. से ज्‍यादा की जायदाद सामने आई. इसी नगर निगम के सफाई दारोगा कैलाश सांगते के बेटे ने पिछले दिनों भ्रष्टाचार के विरोध में धरना दिया था. सांगते के घर 12 जनवरी को छापा पड़ा तो 11 करोड़ रु. की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ. वह प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा के बड़े नेताओं से सीधे जुड़ा है. 19 जनवरी को खंडवा के आबकारी अधिकारी भवानी प्रसाद भारके के भोपाल और इंदौर समेत चार ठिकानों पर छापा पड़ा तो पता चला कि वह तो 25 करोड़ रु. से ज्‍यादा की संपत्ति का आसामी है.

8 फरवरी 2012: तस्‍वीरों में इंडिया टुडे

इंदौर के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में ग्रेड सी कर्मचारी रमण धूलधोए की हैसियत देखिए! उसके यहां पिछले 18 दिसंबर को राज्‍य आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्लू) की टीम के छापे के बाद से अब तक उसकी 40 करोड़ रु. से ज्‍यादा की संपत्ति का खुलासा हुआ है.

मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रदेशों के सरकारी महकमों के अफसरों/बाबुओं में रिश्वतखोरी से लूट की तो जैसे बाढ़ आई हुई है. पिछले साल 16 सितंबर को उज्‍जैन के एक पटवारी ओ.पी. विश्वप्रेमी के घर छापे के दौरान मिली उसकी खुद की प्रतिक्रिया से इस लूट में बरती जा रही ढिठाई और बेशर्मी का अंदाजा लगाया जा सकता है. लोकायुक्त पुलिस ने सवेरे छह बजे छापा मारा तो वह बोल पड़ा, ‘अभी चार बजे तो मैंने सपने में देखा कि छापा पड़ रहा है. दो घंटे में आप आ ही गए!’ उसके यहां दो करोड़ रु. से ज्‍यादा की संपत्ति मिली.

1 फरवरी 2012: तस्‍वीरों में इंडिया टुडे

मध्य प्रदेश में इन दिनों करोड़पति बाबुओं के बारे में चर्चा का आलम यह है कि कुछेक लाख रु. की रकम के साथ पकड़े जाने वालों का बिरादरी में और जनता में भी मजाक-सा बन रहा है. लोकायुक्त और ईओडब्लू के चंगुल में आने वाले ऐसे भ्रष्ट मुलाजिमों की तादाद लगातार बढ़ रही है. इस संदर्भ में एक 'प्रतिमान' खड़ा किया इंदौर नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश कोठारी ने. चिड़ियाघर के कभी प्रभारी तो कभी पूरे शहर की सेहत सुधारने का जिम्मा संभालने वाले कोठारी ने 25 साल की नौकरी में और किसी की नहीं पर अपनी माली सेहत जबरदस्त ढंग से बनाई. लोकायुक्त की टीम ने जब उनके यहां छापा डाला तो वह यह देखकर भौचक रह गई कि इंदौर के अहम स्थानों पर तीन रेस्तरां उनके परिवार के हैं. पणजी में अलफांसो आम के बागान, अहमदाबाद में जमीन, 2-2 टाटा सफारी के अलावा होंडा सिटी और इंडिगो गाड़ियां भी मिलीं. लोकायुक्त पुलिस ने 55 करोड़ रु. से ज्‍यादा की संपत्ति का ब्यौरा हासिल किया. अधिकारियों की मानें तो ‘कोठारी की प्रॉपर्टी इससे कहीं ज्‍यादा है.’

खंडवा के आबकारी अधिकारी भवानी प्रसाद भारके के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस को लगातार शिकायत मिल रही थी. 19 जनवरी को जब होशंगाबाद, खंडवा, इंदौर और भोपाल के उसके ठिकानों पर एक साथ छापे पड़े तो शुरुआती कार्रवाई में ही उनके पास रायसेन में 50 एकड़ और सीहोर में 44 एकड़ जमीन होने के तथ्य सामने आए.

25 जनवरी 2012: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

लालच में फिसलते ये बाबू खांटी मध्यवर्गीय ऊहापोह का शिकार हैं. एक ओर नैतिकता तो दूसरी ओर सुख, समृद्धि का लालच. राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन के उप-प्रबंधक सुरेंद्र शर्मा को ही लीजिए. करीब डेढ़ साल पहले उसके पास से पांच करोड़ रु. नकद और 11 किलो सोना बरामद हुआ था. 2005 तक सरकारी क्वार्टर में रहा यह अध्यापक पुत्र सादगी की मिसाल था. परिवार के एल्बम इसकी पुष्टि करते थे. उसके बाद तो उसने बेभाव लूटना शुरू किया. अगस्त 2010 में जब एसीबी ने पहली बार सुरेंद्र के यहां छापा मारा तो बीकानेर, अजमेर, जयपुर और हरियाणा में उसकी अकूत संपत्ति का पता चला. राजस्थान में कई जगहों पर तैनात रहे शर्मा का काम चारे पर अनुदान पास करना था. वह हर गाड़ी पर कमीशन लेता था. शर्मा फिलहाल जेल में है. दो और मामलों में एसीबी उसके खिलाफ चार्जशीट पेश करने जा रही है.

अपने खिलाफ कार्रवाई न होने को लेकर भ्रष्ट अफसर/बाबू इतने आश्वस्त रहते हैं कि आखिरी दिन तक लूटने में संकोच नहीं करते. राजस्थान के बांसवाड़ा में, 35 साल नौकरी कर चुके सिंचाई महकमे के जूनियर इंजीनियर मलखान सिंह इसी जनवरी में रिटायर होने वाले थे. उससे ठीक दस दिन पहले जब उन्हें दबोचा गया तो तीन मंजिला भव्य शोरूम, सागवान के 800 पेड़ों का फार्म हाउस उनकी संपत्ति में मिले. पहली नजर में उनकी संपत्ति 4 करोड़ रु. तक बैठती है. 21 बैंक खाते और कई लॉकर खंगाले जाने बाकी थे.

18 जनवरी 2012: तस्‍वीरों में देखिए इंडिया टुडे

रिश्वतखोर बाबू काली कमाई का बड़ा हिस्सा जमीन में लगा रहे हैं. ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट भी कहती है कि भारत में जमीन के सौदों में हर साल 70 करोड़ डॉलर की रिश्वत ली-दी जाती है. ऐसे में हैरत की बात नहीं कि जमीन की खरीद-फरोख्त में अहम कड़ी माने जाने वाले पटवारी बड़े पैमाने में घपला करते पकड़े जा रहे हैं. इंडिया अगेन्स्ट करप्शन के मनीष सिसोदिया भी कहते हैं, ‘हर जगह जमीनी स्तर पर तो तीसरी और चौथी श्रेणी के कर्मचारी ही भ्रष्टाचार का औजार बनते हैं. उस खेल में शामिल होने से जो इनकार करते हैं, उनकी जिंदगी दुश्वार हो जाती है.’

भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में सरकारें खुद अड़चन बनती हैं. राजस्थान में रिश्वतखोर अफसरों के खिलाफ 188 मामले हैं, जिन पर सरकार मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं दे रही. इनमें से 33 तो कार्मिक विभाग के ही हैं, जो खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अधीन है. 71 मामलों में आरोपियों ने हाइकोर्ट से स्टे ले लिया. मध्य प्रदेश को लीजिए. नगरीय प्रशासन विभाग के अफसरों/कर्मचारियों के खिलाफ 350 से ज्यादा मामले लोकायुक्त में लंबित हैं. विभाग लोकायुक्त को जानकारी ही नहीं भेजता.

11 जनवरी 2012: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

और सजा? राजस्थान में पिछले बरस महानरेगा में ही भ्रष्टाचार के 500 से ज्‍यादा मामले दर्ज हुए, जिनमें से पांच मामलों में सजा हो सकी. ज्‍यादातर में अंतिम रिपोर्ट लग चुकी है. मध्य प्रदेश में पिछले सालों में दोषी पाए गए छोटे कर्मचारियों को दो-एक साल की कैद और 1,000 से 10,000 रु. के बीच जुर्माना हुआ है. दूसरे दर्जे के कुछ अफसरों को भी तीन साल की सजा और 50,000 रु. तक का जुर्माना हुआ. पर बड़ी मछलियां बची रहीं. पिछले साल विधानसभा में बताया गया था कि राज्‍य सरकार से जुड़े 2,675 मामलों में भ्रष्टाचार की जांच की जा रही है.

इस लिहाज से बिहार की मिसाल बेहतर है. 1981 बैच के जिन आइएएस शिवशंकर वर्मा को विजिलेंस टीम ने 2.14 करोड़ रु. की संपत्ति के साथ पकड़ा था, बिहार विशेष अदालत कानून के तहत पटना स्थित उनके मकान को जब्त करके वहां महादलित बच्चों के लिए प्राइमरी स्कूल खुलवा दिया गया है. भ्रष्टाचार के ही एक मामले में पकड़े गए पटना के एक ट्रेजरी क्लर्क रहे गिरीश कुमार के मकान में भी बालिका विद्यालय खोला गया है. अभी ऐसे 41 मामले विशेष अदालत में लंबित हैं.

04 जनवरी 2012: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

मध्य प्रदेश के लोकायुक्त पी.पी. नावलेकर को विपक्षी कांग्रेस ने पहले ही घेर रखा है, यह आरोप लगाकर कि बड़े अफसरों की बजाए चपरासियों/बाबुओं को निशाना बनाया जा रहा है. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता के.के. मिश्र कहते हैं, ‘चपरासियों, बाबुओं के घर से अगर करोड़ों रु. निकल रहे हैं, तो आइएएस अफसरों और मंत्रियों के बारे में फिर अंदाज ही लगाया जा सकता है.’ दूसरी ओर लोकायुक्त पी.पी. नावलेकर साफ करते हैं, ‘भ्रष्ट अफसरों, कर्मचारियों के बारे में सबूत मिलने पर हम फौरन कार्रवाई करते है. ठोस सबूतों के बगैर यह संभव नहीं. वैसे लोग अब खुद आगे आकर कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें कर रहे हैं.’

28 दिसम्‍बर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

पर छापेमारी भी कोई बहुत उत्साह नहीं जगा पा रही. वजह? कार्रवाई के लिए मंजूरी तो राज्‍य सरकार ही देती है. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रहे लोकायुक्त की सिफारिश के बाद भी मामला अदालत तक जाए या नहीं, यह फैसला सरकार का विधि विभाग लेता है, जहां जिला न्यायाधीश स्तर के अधिकारी राय देते हैं. लंबा खिंचने के बाद मामला अदालत का रुख करता है, जहां कई साल लग जाते हैं. लोकायुक्त व्यवस्था में रहे एक पुलिस अधिकारी कहते हैं, ‘मामले अदालत जाने पर आरोपी के बैंक वगैरह और ऐसे कई लोगों की गवाही कराई जाती है जो उससे सीधे जुड़े नहीं होते.’ यहां भी मामला फंसता है.

राजस्थान हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश विनोद शंकर दवे कहते हैं कि ‘हाकिम (नेता) सुधर जाएं तो मातहत खुद लाइन पर आ जाएंगे.’ पर लाख टके का सवाल है कि कौन सुधारे हाकिम को?

-साथ में जयश्री पिंगले, समीर गर्ग, विजय महर्षि, पीयूष पाचक, क्षितिज गौड़, रामप्रकाश मील और अशोक प्रियदर्शी

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