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संस्मरण: अपनी आलोचना के फ्रेम में

मंडेला का नाम आते ही जेहन में उनकी कई छवियां उभरती हैं. 27 साल जेल में बिताने के बाद भी यह शख्स टूटता नहीं है. अपने समाज और देश को बदलने के लिए वह हर रास्ता अपनाने को तैयार हो जाता है.

अपडेटेड 10 जनवरी , 2012

नेलसन मंडेलाः मेरा जीवन बातों-बातों में
नेलसन मंडेला
ओरिएंट पब्लिशिंग, अंसारी रोड, दरियागंज, नई दिल्ली-2
कीमतः 595 रु.

नेलसन मंडेलाः बेबाक

मंडेला का नाम आते ही जेहन में उनकी कई छवियां उभरती हैं. 27 साल जेल में बिताने के बाद भी यह शख्स टूटता नहीं है. अपने समाज और देश को बदलने के लिए वह हर रास्ता अपनाने को तैयार हो जाता है. कैद से अाजाद होकर मुक्ति का जबरदस्त योद्धा सुलह-समझैते का समर्थक हो जाता है.

एक पार्टी को बनाने के बाद राष्ट्रपति के तौर पर वह देश के अंदर लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना में जुट जाता है, विकास का प्रारूप बनाता है. राष्ट्रपति के पद से मुक्त होने के बाद भी सबको समान अवसर देने की अपनी लड़ाई जारी रखता है. इन सबके बीच हमेशा भड़कीले कपड़ों में नजर आने वाले मंडेला के जीवन की दूसरी तस्वीर भी सामने आती है, जिसमें 78 साल की उम्र में दूसरी पत्नी को तलाक देकर दो साल बाद वे तीसरी शादी रचाते हैं.

नेलसन मंडेला एक इंसान के तौर पर कैसे थे, वे किन-किन बातों से प्रभावित होते थे, उनका जीवन किन चीजों से चमत्कृत होता और कब उनकी संवेदनाओं के तार झ्ंकृत होते हैं, क्या उनका दिल परिवार के लिए कु छ करने को नहीं तड़पता? क्या वे यारी-दोस्ती के लिए वक्त नहीं निकालना चाहते थे.

इस किताब में मंडेला खुद इन सवालों के जवाब दे रहे हैं. दरअसल, अपने जीवन और सियासी लड़ाई को विषय बनाते हुए मंडेला ने आत्मकथा लांग वॉक टु फ्रीडम के नाम से लिखी थी. उसमें वे अपनी चिट्ठियां, डायरी, भाषण और इंटरव्यू के जिन अंशों को शामिल नहीं कर पाए, उन्हें एकत्र करके नेलसन मंडेला फाउंडेशन ने उसे पुस्तक की शक्ल में छापा है. उसी का हिंदी अनुवाद ओरिएंट पब्लिशिंग से नेलसन मंडेलाः मेरा जीवन बातों-बातों में के रूप में आया है.

पुस्तक की भूमिका में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा लिखते हैं कि ''वे पूर्ण व्यक्ति नहीं रहे. आम आदमियों की तरह उनमें भी कमियां रहीं लेकिन उनकी कमियां ही हैं जो हमें प्रेरित करती हैं.'' यह किताब मंडेला की सार्वजनिक छवि से अलग उनके वास्तविक चरित्र को दिलचस्प अंदाज में पेश करती है. एक अध्याय में वे बताते हैं कि ''जब भी मैं अपने पुराने लेख और भाषणों को देखता हूं तो लफ्फाजी, बनावटीपन और मौलिकता की कमी से चकित रह जाता हूं. उन भाषणों में दूसरों को प्रभावित करने और अपना विज्ञापन करने की भावना स्पष्ट झ्लकती है.'' खुद के प्रति इससे ज्‍यादा ईमानदार आलोचना और क्या हो सकती है.

पुस्तक में पत्र भी शामिल हैं जो समय- समय पर मंडेला ने पहली पत्नी एवलिन, दूसरी पत्नी विनी और बेटे-बेटियों को लिखे हैं. इनमें मंडेला की, परिवार के लिए कुछ भी खास न कर पाने की बेचैनी मुखर होकर सामने आती है. मंडेला के पत्रों को पढ़ना जीवन को बेहतर बनाने के उपायों को समझ्ने से कम नहीं है. पुस्तक का अनुवाद महेंद्र कु लश्रेष्ठ ने किया है, जिसे और सहज होना था.

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