शायद आपको याद हो कि बैंडिट क्वीन और चाइना गेट के बाद डकैतों पर कोई बड़ी फिल्म नहीं आई है और जासूसों पर बनने वाली फिल्मों का दौर तो पहले ही लद चुका है. लेकिन अब जिगर को संभालिए. आपकी चाहत मार्च में पूरी होने जा रही है. तिग्मांशु धूलिया की पान सिंह तोमर एक डकैत की कहानी है तो श्रीराम राघवन ने बॉलीवुड में जासूसी फिल्मों का आगाज कर दिया है और वे एजेंट विनोद के साथ आ रहे हैं. यह मजेदार इत्तेफाक है कि मार्च में बॉलीवुड से एक साथ क्राइम, थ्रिलर और सस्पेंस का तड़का चखने को मिलेगा.
इन दो फिल्मों के अलावा, एक गर्भवती महिला का अपने पति को खोजना, जिसके अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह लगा है, कुछ अटपटा टॉपिक लगता है मगर सुजॉय घोष की कहानी में विद्या बालन कुछ ऐसा ही कर रही हैं. भट्ट कैंप की ब्लड मनी एक छोटे शहर के युवा के बड़े-बड़े ख्वाबों के पीछे भागने की कहानी बुनती है जो जुर्म की दलदल में फंस जाता है.
एक ही महीने में, रोमांच के मसाले से भरी फिल्मों के आने के बारे में फिल्म समीक्षक जोगिंदर टुटेजा बताते हैं, ‘इन सभी फिल्मों को लंबे समय से रिलीज का इंतजार है. एजेंट विनोद छह महीने से तैयार है, कहानी एक साल से, ब्लड मनी को भी तीन-चार महीने हो गए हैं जबकि पान सिंह तोमर दो साल से बनकर तैयार है. इनका एक ही महीने में रिलीज होना वाकई अच्छा इत्तेफाक है.’
तिग्मांशु और इरफान की जोड़ी हासिल के बाद एक बार फिर से पान सिंह तोमर में नजर आएगी. फिल्म के बारे में निर्देशक तिग्मांशु बताते हैं, ‘यह एक किसान-फौजी-एथलीट से डाकू बने शख्स की कहानी है. जिसकी खासियत यही है कि वह इज्जत और शान के लिए लड़ा.’ खास बात यह है कि बैंडिट क्वीन की शूटिंग के दौरान तिग्मांशु मशर निर्देशक शेखर कपूर के असिस्टेंट थे. वे बताते हैं, ‘मैं चंबल में वहीं पहुंचा जहां बैंडिट क्वीन की शूटिंग को अंजाम दिया था. सब कुछ जाना-पहचाना-सा था.’
यह पान सिंह नाम के एक ऐसे शख्स की कहानी है, जो स्टीपलचेज दौड़ में सात साल लगातार राष्ट्रीय चैंपियन रहा था. लेकिन मजबूरन उसे बंदूक उठानी पड़ी. इसी संघर्ष की दास्तान फिल्म में है. फिल्म की शूटिंग ज्यादातर उन्हीं जगहों पर की गई है जो असल में पान सिंह से जुड़ी थीं. तिग्मांशु इसे इत्तेफाक मानते हैं और बताते हैं, ‘हम रुड़की में उसी बटालियन के साथ शूट कर रहे थे जिसमें पान सिंह थे. हमें पुराने समय के बैरक की जरूरत थी. हम एक बैरक में शूट करने लगे. बाद में पता चला कि इसी बैरक में पान सिंह रहते थे. इस तरह के कई इत्तेफाक हमारे साथ हुए.’
फिल्म में पान सिंह की भूमिका निभा रहे इरफान बताते हैं, ‘फिल्म में काफी दौड़ना पड़ा. भाषा पर भी मेहनत करनी पड़ी. रियल लोकेशंस पर काम करना मजेदार रहा.’ फिल्म पर 7 करोड़ रु. की लागत आई है. रोमांटिक कॉमेडी और पीवीआर मूवीज के जमाने में एक डकैत की कहानी को सिल्वर स्क्रीन पर उतारने से जुड़े रिस्क के बारे में पूछने पर तिग्मांशु कहते हैं, ‘अग्निपथ और दबंग जैसी फिल्मों को युवाओं ने पसंद किया है. ऐसे में इस पीढ़ी के लिए डाकू नया विषय है, वे इसे भी पसंद करेंगे.’
पा, इश्किया, नो वन किल्ड जेसिका और द डर्टी पिक्चर से विद्या बालन बॉलीवुड में एक अलग मुकाम हासिल कर चुकी हैं. और यह हाल की बात है कि संगीतकार विशाल-शेखर जोड़ी के शेखर रावजिवाणी ने उन्हें 'फीमेल हीरो' की संज्ञा से नवाजा है. ऐसे में उनसे उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं. उनकी आने वाली फिल्म कहानी के साथ ऐसा ही है. फिल्म के चयन में पटकथा पर खास जोर देने वाली विद्या बताती हैं, ‘मैंने स्क्रिप्ट पूरी होने तक इसलिए हां नहीं कहा क्योंकि मैं पक्का कर लेना चाहती थी कि यह मेरे लिए सही चयन है.’ मजेदार यह कि कहानी की शूटिंग में 52 दिन का समय लगा, पर इसकी पटकथा तैयार करने में दो साल लगे.
विद्या की काम के प्रति संजीदगी मशर है और इसी का उदाहरण देते हुए निर्देशक सुजॉय बताते हैं, ‘बजट कम था, जिसका वे खास ख्याल रखती थीं. कई बार तो ऐसा हुआ कि हम सड़क किनारे शूटिंग कर रहे होते थे, और विद्या को शूट के लिए कपड़े चेंज करने होते थे. अगर वे वापस होटल जातीं तो लौटने में समय और पैसा दोनों खर्च होते. ऐसे मौकों पर अक्सर वे इनोवा पर काला कपड़ा डलवा कर ही चेंज कर लेती थीं.’
कहानी के बिजनेस पर टुटेजा कहते हैं, ‘फिल्म साल भर पहले तैयार हो गई थी. उस समय प्रोडक्शन कॉस्ट लगभग 10 करोड़ रु. पड़ी थी. ऐसे में फिल्म के घाटे में रहने का सवाल ही नहीं है. लेकिन द डर्टी पिक्चर जैसी अपेक्षा करना सही नहीं है.’ यही नहीं, फिल्म की पटकथा लिखने वाली अद्वैता काला फिल्म को उपन्यास का रूप भी देने वाली हैं.
मार्च में एक्शन और सस्पेंस का सिलसिला यहीं नहीं थमता. एक फिल्म जिसका लंबे समय से इंतजार है, श्रीराम राघवन की एजेंट विनोद है. वे एक हसीना थी और जॉनी गद्दार जैसी थ्रिलर फिल्में दे चुके हैं. हालांकि ये फिल्में छोटे बजट की थीं, लेकिन इस बार वे 60 करोड़ रु. के बजट की फिल्म का जिम्मा संभाले हुए हैं. फिल्म के लिए सैफ अली खान ने अच्छी-खासी मशक्कत की है. उन्होंने विएतनाम में मार्शल आर्ट सीखा, मोटरसाइकिल क्लासेज और एक्शन क्लासेज में भी खासा वक्त गुजारा है.
कहा जा रहा है कि फिल्म के अधिकतर स्टंट उन्होंने खुद किए हैं. वे फिल्म के प्रोड्यूसर भी हैं. सैफ के मुताबिक, एजेंट विनोद थोड़ी-थोड़ी बॉन्ड और थोड़ी-सी टिनटिन सरीखी फिल्म है.
मजेदार यह कि फिल्म में सैफ और करीना कपूर की जोड़ी दर्शकों की कसौटी पर है. यही नहीं, रा.वन में छम्मक छल्लो गीत के जरिए लुभाने वाली करीना इसमें मुजरा करती दिखेंगी. फिल्म को मोरक्को, रूस और लात्विया समेत 12 देशों में शूट किया गया है. इसकी शूटिंग को पूरे होने में 19 महीने का समय लगा है. फिल्म के कामयाब होने पर इसके सीक्वल की भी तैयारी है. राघवन बताते हैं, ‘अगर फिल्म अच्छा काम करती है तो कुछ भी संभव है.’
यही नहीं, सैफ का कहना है कि अगर फिल्म बड़ी हिट जाती है तो वे एजेंट विनोद को एक ब्रांड में तब्दील करना चाहेंगे. उनकी प्लेस्टेशन-3 के लिए गेम लॉन्च करने की भी योजना है. हालांकि सैफ फिल्म के 100 करोड़ रु. का आंकड़ा पार करने की उम्मीद लगाए हुए हैं क्योंकि फिल्म को भारत समेत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 3,500 सिनेमाघरों में रिलीज किया जा रहा है, जिसमें 2,500 भारत में हैं.
इसी कड़ी में मुकेश भट्ट की ब्लड मनी का भी नाम है. निर्देशक विशाल महाड़कर की यह पहली फिल्म कुणाल खेमू और मिया उएदा के बीच लवमेकिंग दृश्य के कारण पहले ही काफी सुर्खियां बटोर चुकी है. फिल्म कुणाल नाम के ऐसे युवक की कहानी है, जो केपटाउन चला जाता है और वहां हीरों के कारोबार में लग जाता है. लेकिन उसे यह पता ही नहीं चलता कि वह गुनाह के दलदल में गले तक धंस चुका है.
हालांकि फिल्म विश्लेषकों का मानना है कि भट्ट कैंप का पूरा ध्यान फिलहाल जन्नत और राज़ के सीक्वल पर है, इस कारण ब्लड मनी को जिस तरह की तवज्जो दी जानी चाहिए वह नहीं दी जा रही है.
फाल्गुन के रंग भरे महीने में ये फिल्में रहस्य, रोमांच और मारधाड़ की बौछार लिए हुए हैं. पर यह नहीं भूलना चाहिए कि इन फिल्मों के सितारों के लिए इनसे जुड़ा रोमांच कम नहीं है. सैफ-करीना पर अपनी जोड़ी को सफल बनाने का दबाव है. द डर्टी पिक्चर की सफलता ने विद्या के कंधों पर जिम्मेदारियां बढ़ी दी हैं. ब्लड मनी विशाल की पहली फिल्म है, जबकि कुणाल खेमू को एक अदद हिट की सख्त दरकार है. और पान सिंह तोमर में यह देखना दिलचस्प होगा कि रियलिस्टिक किरदार में इरफान किस कदर अपनी अदाकारी की छाप छोड़ते हैं.
पान सिंह तोमर
कलाकारः इरफान खान, माही गिल
निर्देशकः तिग्मांशु धूलिया
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एजेंट विनोद
कलाकारः सैफ अली खान, करीना कपूर
निर्देशकः श्रीराम राघवन
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कहानी
कलाकारः विद्या बालन
निर्देशकः सुजॉय घोष
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ब्लड मनी
कलाकारः कुणाल खेमू, अमृता पुरी
निर्देशकः विशाल महाड़कर
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