आदिवासियों और दलितों के हक के लिए पिछले 15 साल से संघर्ष कर रहीं देश की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता माधुरी कृष्णास्वामी अब आदतन अपराधियों की सूची में शामिल हो गई हैं. माधुरी को यह नई पहचान दी है मध्य प्रदेश के शासकीय तंत्र ने, जिसने प्रदेश के राज्य सुरक्षा अधिनियम का हवाला देते हुए उन्हें आतंक और अशांति का पर्याय बताकर जिला बदर करने का नोटिस थमा दिया.
इस पर देशभर के जन संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश, प्रख्यात अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, अरुणा राय आदि ने तीखी प्रतिक्रिया दी. नतीजे में प्रशासन ने मामूली कारणों का हवाला देकर नोटिस वापस लेने की घोषणा तो कर दी, लेकिन इस घटना ने जन संगठनों के प्रति सरकार के रवैए को जरूर उजागर कर दिया. ज्यां द्रेज कहते हैं, ''माधुरी जिस तरह से आदिवासियों के वैधानिक अधिकारों के लिए साहस के साथ जुटी हैं, वह काबिले तारीफ है. उनके खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई करना निंदनीय है.''
भारतीय वायु सेना में एअर वाइस मार्शल रहे कृष्णास्वामी और इंदिरा कृष्णास्वामी की बेटी माधुरी दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.फिल. करने के बाद 1993 में मध्य प्रदेश में खरगौन पहुंचीं और दलितों-आदिवासियों के हक के लिए काम करने लगीं. इस बंजर इलाके में अब तक पुलिस, वन विभाग और साहूकारों का आतंक था. लेकिन जैसे-जैसे जागृत आदिवासी दलित संगठन का आधार मजबूत होता गया, यह स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती बनता गया. आज छह हजार से ज्यादा आदिवासी दलित परिवार इस संगठन के सदस्य हैं.
माधुरी को जिला बदर का नोटिस इसलिए दिया गया है क्योंकि उनका संगठन प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर रहा है. स्वास्थ्य सेवा, पीडीएस, वनाधिकार जैसे मामलों को लेकर प्रशासन और संगठन के कार्यकर्ता आए दिन आमने-सामने हो रहे हैं.
यह संगठन की ताकत का ही नतीजा है कि बड़वानी देश का पहला जिला है, जहां 2006 में 1,574 आदिवासियों को 4,75,386 रु. बेरोजगारी भत्ता मिला.
अरुणा राय कहती हैं, ''जागृत दलित आदिवासी संगठन स्वास्थ्य, राइट टू फू ड, मनरेगा पर जबरदस्त काम कर रहा है. यह नोटिस बताता है कि निहित स्वार्थ में लगे लोग कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं.''

