राज्य के सियासी घरानों ने अपने वारिसों को राजनीति का जमीनी पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया है. 2013 में होने जा रहे प्रदेश के विधानसभा चुनावों में ये युवा चेहरे अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व करते नजर आएं तो कोई आश्चर्य नहीं. कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अपने बेटे जयवर्धन सिंह को प्रदेश की राजनीति में हाल ही लांच करते हुए कहा था, ''अब हम बूढ़े हो चले हैं, समय युवा नेतृत्व को मौका देने का है,'' तो यह असल में उनके ही नहीं बल्कि और भी कई वरिष्ठ नेताओं के मन की बात थी.
04 जनवरी 2012: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
मिशन 2013 के लिए प्रदेश के जिन प्रभावशाली नेताओं के स्टार पुत्रों ने तैयारी शुरू कर दी है उनमें दिग्विजय सिंह के अलावा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री कमल नाथ के बेटे नकुल नाथ, ग्वालियर से भाजपा सांसद यशोधरा राजे सिंधिया के बेटे अक्षय राजे भंसाली सहित इंदौर से भाजपा सांसद सुमित्रा महाजन के बेटे मंदार और मिलिंद महाजन शामिल हैं. दिवंगत अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह और पूर्व मंत्री सुभाष यादव के बेटे अरुण यादव पहले ही सियासी पारी शुरू कर चुके हैं. माना जा रहा है कि प्रदेश का अगला विधानसभा चुनाव इसी जनरेशन नेक्स्ट के नाम पर होगा.
राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में सिंधिया घराने के ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट और मिंलिद देवड़ा की एक और जनरेशन नेक्स्ट अपना दबदबा कायम करने में पहले से ही जुट चुकी है तो ऐसे में प्रदेश की नई पीढ़ी कैसे पीछे रहती. जयवर्धन ने राज्य के मतदाताओं के बीच पैठ बनाने के लिए अपने गृह क्षेत्र राघोगढ़ से सात दिन की पैदल यात्रा निकाली और प्रदेश की राजनीति में अपनी आधिकारिक मौजूदगी दर्ज करवाई, जिसे कांग्रेस ही नहीं, भाजपा में भी नए राजनीतिक भविष्य का सूत्रपात माना जा रहा है.
28 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
दिग्विजय कहते हैं, ''जयवर्धन को राजनीति में नहीं आने की समझाइश दी थी क्योंकि यहां खूब थपेड़े और गालियां खानी पड़ती हैं. लेकिन वे राजनीति के प्रति प्रतिबद्घ नजर आए तो मैंने उन्हें कहा कि हवा-हवाई नेता बन कर नहीं चलेगा. एअरकंडीशन में बैठ कर काम नहीं चलेगा. जनता के बीच जाकर उसकी मुश्किलों को जानना होगा.'' कुछ दिन की छुट्टी पर आए जयवर्धन ने पैदल यात्रा की योजना बनाई और आदिवासियों, बंजारों, समाज के पिछड़े वर्ग के लोगों के घर रात को रुके.
कांग्रेसी हलकों में चर्चा है कि कमल नाथ के बेटे नकुलनाथ भी चुनावी तैयारियों में जुट सकते हैं. 2008 के बैतुल लोकसभा उप-चुनाव में उनके उतरने की पूरी संभावना थी लेकिन जब 2009 के लोकसभा चुनाव में इस सीट का आरक्षित होना तय हुआ तो महज 11 महीने के राज के लिए नकुल को चुनाव में नहीं उतारा गया. कमल नाथ के मुताबिक राजनीति में आने का निर्णय पूरी तरह से नकुल का ही होगा, दूसरी ओर कमलनाथ के नजदीकी लक्ष्मण ढोली कहते हैं, ''नकुल हर कार्यकर्ता का ध्यान रखते हैं. जहां कमलनाथ जी चुनाव प्रचार में नहीं पहुंच पाते वहां वे मौजूदगी दर्ज करवाते हैं. इंदौर में कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी पंकज संघवी के प्रचार में सलमान खान को वे ही लाए थे.''
21 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कहते हैं, ''दिग्विजय सिंह ने बेटे की राजनीतिक शुरुआत जमीनी स्तर से कर कई नेताओं को राह दिखा दी है. संभव है कि चुनाव से पहले कई नेता पुत्र प्रदेश में पैदल यात्रा या रैलियां करते नजर आएं.'' वैसे जयवर्धन ने जमीनी काम की शुरुआत काफी पहले ही कर दी थी. राजगढ़ के जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामचंद्र डांगी कहते हैं, ''जयवर्धन हमारे जिले में नए नहीं हैं.'' सही भी है, क्योंकि पिछले दो साल से वे राजगढ़ और राघोगढ़ में बेसहारा बच्चों को स्कूली शिक्षा देने के लिए प्रगति मानव सेवा नाम के एनजीओ की मदद से शिशु सदन स्कूल का संचालन कर रहे हैं.
बुंदेलखंड के विशेष पैकेज पर नेशनल रेनफेड अथॉरिटी के साथ भी उन्होंने काम किया है और सीबीएसई के हिंदूपत पब्लिक स्कूल की शुरुआत की है, जहां अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई कम फीस में उपलब्ध है. योजना आयोग के सदस्य मिहिर शाह के साथ जयवर्धन ग्रामीण विकास और जल संसाधन पर काम कर चुके हैं. शाह कहते हैं, ''जयवर्धन के साथ काम करने के दौरान कम समय में ही लगा कि उनमें सीखने की ललक और जुझारूपन है.'' अपने पिता और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को रोल मॉडल मानने वाले जयवर्धन कहते हैं कि पैदल यात्रा में क्षेत्र की जनता को और उनकी समस्याओं को करीब से जानने का मौका मिला. उनका साफ मानना है कि ''राजनीति में आने का मेरा मकसद सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं बल्कि जनता की सेवा करना है.''
14 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
ग्वालियर की भाजपा सांसद यशोधरा राजे सिंधिया के बेटे अक्षयराजे भंसाली का नाम प्रदेश की राजनीति में उस वक्त सुर्खियों में आया था जब पांच साल पहले लोकसभा चुनाव में अपनी मां के प्रचार के लिए वे न्यूयॉर्क से खासतौर से यहां आए थे. एमटीवी चैनल में प्रोड्यसर और लेखक भंसाली के साथ भाषा की दिक्कत जरूर रही लेकिन इसे उन्होंने अपनी राजनीतिक सक्रियता में बाधा नहीं बनने दिया. अक्षय मानते हैं कि अभी तो उन्होंने सिर्फ राजनीतिक प्रचार ही किया है, सक्रिय राजनीति में आने पर वे खुद को भाग्यशाली समझेंगे.
यशोधरा राजे के समर्थक और ग्वालियर मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष अनुराग बंसल कहते हैं, ''पिछले दिनों शिवपुरी के नगरपालिका चुनाव में अक्षय ने पार्टी प्रत्याशी सीता आस्थाना के समर्थन में प्रचार किया था, और हमेशा की तरह अपनी सहजता से कार्यकर्ताओं का दिल जीत लिया.'' वहीं, यशोधरा राजे का मानना है कि उनके दिवंगत भाई और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माधवराव सिंधिया की छवि अक्षय में साफ नजर आती है. वे कहती हैं कि अक्षय जब चुनाव प्रचार में उतरते हैं तो जैसे पूरे अभियान में ताजगी भर जाती है.
07 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
निकट भविष्य में दो और नेता पुत्र राजनीति में अपना भाग्य आजमा सकते हैं. इंदौर से सात बार सांसद रह चुकीं भाजपा की सुमित्रा महाजन (ताई) के बेटे मंदार महाजन वैसे तो मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब में फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं लेकिन पिछले दस साल से राजनैतिक तौर पर भी खासे सक्रिय हैं. पिछले दो विधानसभा चुनावों में वे दावेदार के तौर पर उभरे हैं. संभावना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में इंदौर की एक सीट उनके दावे में शामिल होगी.ताई के बड़े बेटे और आइटी कंपनी मिराश इंफोटिक्स के मालिक मिलिंद अपनी मां के थिंक टैंक के तौर पर जाने जाते हैं. सूत्रों की मानें तो अगर सुमित्रा महाजन 2014 का चुनाव नहीं लड़ती हैं तो उनकी ओर से इस सीट के प्रमुख दावेदार मिलिंद ही होंगे. 40 वर्षीय मंदार और 47 वर्षीय मिलिंद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से हैं. अपने बेटों के बारे में सुमित्रा महाजन की स्पष्ट राय है, ''उनमें काबिलियत है तो मौका जरूर मिलना चाहिए.''
30 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
पीढ़ियों से जब नसों में राजनीति दौड़ रही हो, उस पर विदेश से पढ़ाई का ठप्पा हो, युवा चेहरा हो, राजनीति की जमी-जमाई विरासत हो तो फिर सफल होने से कौन रोक सकता है.
अक्षय राजे भंसाली, 26 वर्ष, यशोधरा राजे सिंधिया के वारिस
न्यूयॉर्क में एमटीवी चैनल में प्रोड्यूसर, राइटर और डायरेक्टर हैं.
दम दिखाया पांच साल पहले जब लोकसभा चुनाव के दौरान. मां के चुनाव प्रचार के लिए भारत आए और खूब भीड़ जुटाई.
माधव राव सिंधिया की छवि देखती हैं यशोधरा राजे अपने बेटे में.
कैप्टन मंदार महाजन, 40 वर्ष, सुमित्रा महाजन के वारिस
मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब के चीफ इंस्ट्रक्टर मंदार आधुनिक प्लेन बीच बैरन जी 58 उड़ाते हैं.
दावेदार पिछले दो विधानसभा चुनावों में टिकट के दावेदार रह चुके हैं. राजनीति में औपचारिक प्रवेश भले ही न किया हो लेकिन पिछले दस साल से मां के प्रचार में सक्रिय रहे.
नकुल नाथ, 37 वर्ष, कमलनाथ के वारिस
बोस्टन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर चुके नकुल एविएशन क्षेत्र के स्पान ग्रुप और कई शैक्षणिक संस्थानों की कंपनियों का संचालन कर रहे हैं. वे पिता के निर्वाचन क्षेत्र छिंदवाड़ा में भी खासे सक्रिय हैं.
चर्चा में जनवरी 2008 में उस वक्त आए जब भोपाल में उन्हें आधिकारिक तौर पर लांच किया गया. उनके बैतुल चुनाव में उतरने की भी खबरें थी.
लाइफ स्टाइल पूरी तरह हाइटेक. ब्लेक बैरी और आइपैड का इस्तेमाल करते हैं. मृदुभाषी और मिलनसार माने जाते हैं.
जयवर्धन सिंह, 24 वर्ष, दिग्विजय सिंह के वारिस
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल ऐंड पब्लिक अफेयर से एमबीए कर रहे हैं. इससे पहले मुंबई में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत थे.
लोकप्रियता के लिए गृह क्षेत्र राघोगढ़ और राजगढ़ में बेसहारा बच्चों के लिए शिशु सदन स्कूल खुलवाए. राघोगढ़ से 21 दिसंबर को 150 किमी की सात दिन की पदयात्रा शुरू कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा.
लाइफ स्टाइल आइफोन और लैपटॉप हरदम साथ.

