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लुटियंस दिल्ली में स्मार्ट सिंचाई सिस्टम कैसे लगाएगा वायु प्रदूषण पर लगाम?

इस परियोजना के पहले चरण (फेज-I) में करीब 19.3 किलोमीटर लंबी 11 प्रमुख सड़कों को कवर किया जाएगा

India Gate as smog engulfs the area
इंडिया गेट
अपडेटेड 19 जनवरी , 2026

जल संरक्षण, वायु प्रदूषण नियंत्रण और हरित शहरी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) लुटियंस दिल्ली के प्रमुख इलाकों में इस वर्ष पहली बार स्मार्ट इरिगेशन (सिंचाई) सिस्टम लागू करने जा रही है. इस पहल से सिंचाई में उपयोग होने वाले पानी की बर्बादी में लगभग 70 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद है.

परियोजना के पहले चरण (फेज-I) में करीब 19.3 किलोमीटर लंबी 11 प्रमुख सड़कों को कवर किया जाएगा. इनमें नेहरू पार्क, पेशवा रोड, मंदिर मार्ग, आरके आश्रम मार्ग और भाई वीर सिंह मार्ग के आसपास के इलाके शामिल हैं. इन सड़कों को जानबूझकर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) के पास चुना गया है, ताकि बुनियादी ढांचे की लागत कम हो और शोधित पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.

NDMC द्वारा विकेंद्रीकृत STPs से पाइपलाइन बिछाकर ग्रीन बेल्ट, सेंट्रल वर्ज, सड़क किनारे पौधारोपण और लैंडस्केप्ड क्षेत्रों की सिंचाई की जाएगी. इसके अलावा पेड़ों की धुलाई के लिए हाइड्रेंट्स और कई स्थानों पर नोज़ल भी लगाए जाएंगे.

NDMC के उपाध्यक्ष कुलजीत चहल ने बताया कि यह प्रणाली पूरी तरह स्वचालित (ऑटोमेटेड) होगी और इसकी कड़ी निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की लीकेज या दुरुपयोग को रोका जा सके. उन्होंने कहा, “स्मार्ट कंट्रोलर्स वास्तविक जरूरत के आधार पर सिंचाई का समय तय करेंगे, जिससे पानी की बर्बादी में उल्लेखनीय कमी आएगी. इससे पानी के टैंकरों और मानव संसाधन पर होने वाला खर्च भी घटेगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टैंकरों की आवाजाही कम होने से प्रदूषण स्तर में भी कमी आएगी.”

फेज-I के लिए लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से टेंडर जारी किया गया है और मार्च तक कार्य आवंटित होने की संभावना है. परियोजना के छह से नौ महीने में पूरा होने की उम्मीद है. वहीं, दूसरे चरण में 11 और सड़कों तथा कई प्रमुख पार्कों को इस स्मार्ट सिंचाई नेटवर्क से जोड़ा जाएगा.

NDMC भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की स्थापना और सीवर लाइनों के पुनर्विकास पर भी काम कर रहा है, जिससे राजधानी में जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को और मजबूती मिल सके.

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